Kaisi Vidambana Hain Ye (Story On Gang-Rape)


कैसी विडम्बना हैं येक्यों सुरक्षित नहीं हैं नारी हमारे देश की

कब सीखेंगे ये दरिंदे करना सम्मानदेश की बहु-बेटियों का

  पिछले दो तीन दिनों से मेरे घर के सामने वालें घर में रहने वाली निकिता जी नज़र नहीं आ रहीं थीयूँ तो हम दोनों के बीच ऐसी कोई ख़ास बोलचाल नहीं थीबस सुबह-शाम गुड़ मॉर्निंग व गुड़ इवनिंग ज़रूर हो जाया करती थीइसके अलावा एक-दो बार एक दूसरे के परिवार के बारें में ज़रूर हमारी बातचीत हुईइससे ज्यादा हमारा कोई रिश्ता नहीं थाशायद इसी वजह से निकिता जी के कुछ दिनों तक नहीं दिखाई देने से मुझे कोई फर्क ही नहीं पड़ासोचा गयी होगी कहीं किसी काम सेवैसे भी मुझे इतनी फुर्सत ही कहाँ थी कि लोगों के घरों में क्या हो रहा हैं इस बात की जानकारी रखूँपूरा दिन ऑफिस में और बाकी वक़्त पति और अपने दो-दो बच्चों को संभालने में बीत जाता था।

  लेकिन कुछ दिनों बाद एक दिन जब मैं सुबह अखबार उठाने बाहर गयी तो क्या देखती हूँ कि निकिता जी के घर के बाहर अखबारों का ढ़ेर पड़ा हैंइस ओर मेरी नज़र पहले नहीं गयी थीइतने में ही वहाँ दूध वाला भी आ गयालेकिन घर में ताला लगा देख वापिस जाने लगाफिर एकाएक मुझ पर नज़र पड़ते ही रुक गया।

"मैडम ये निकिता मैडम कहाँ गयी हैं?" 

"भैया मुझे तो नहीं पताक्या आपको कुछ भी नहीं बताकर गयी?" 

"नहीं ,मैडम कुछ भी नहीं बतायाअगर बताया होता तो मैं क्यों बेवज़ह रोज़-रोज़ इनके घर के चक्कर क्यों लगाता।" ऐसा कहते हुए दूधवाला वापिस चला गयाउसके बाद तो मैं भी सोचने लगी कि ऐसी क्या बात हुई होगी जिस वजह से निकिता जी किसी को भी बिना बताए चली गईमेरे मन में तरह-तरह के ख्याल आने लगेसोचा कहीं ऐसा ना हो उनके परिवार में कोई अनहोनी घटना घटी होजिसकी वजह से उन्हें अचानक से जाना पड़ा। यूँ तो मैं उनके परिवार के बारें में ज्यादा तो कुछ नहीं जानती थी लेकिन हाँ इतना ज़रूर पता था कि उनके परिवार में उनके माता-पिता एवं एक छोटी बहन हैंवो सभी मुंबई में रहते हैंउनका परिवार बहुत ही गरीब हैंपिता एक अपार्टमेंट में वहाँ खड़ी गाड़ियों की साफ़ सफाई का काम करते हैंएवं माँ उसी अपार्टमेंट के कई घरों में साफ़-सफाई करने का काम करती हैं बहन हैं जो अभी पढ़ रहीं हैंये तो निकिता जी के पढ़ाई में होशियार होने की वजह से उनकी नौकरी बैंक में लग गयीऔर उनकी पहली पोस्टिंग यहाँ पुणे में हो गयी। 

निकिता जी को गए हुए दस दिन से ज्यादा हो चुके थेलेकिन अभी तक उनकी कोई ख़ैर-ख़बर नहीं थीहाँ मैंने ज़रूर उनके मोबाइल पर एक-दो बार फ़ोन लगाया थालेकिन फ़ोन हर बार ही स्विच-ऑफ बताता थासोचा हो ना हो ज़रूर कोई बहुत ही ज़रूरी काम रहा होगा तभी तो फ़ोन भी स्विच-ऑफ किया हुआ हैंलेकिन एक दिन जब सुबह जब मैं अखबार उठाने बाहर गयी तो क्या देखती हूँ कि एक अधेड़ उम्र का दम्पति निकिता जी के घर के बाहर खड़ा हैंवो लोग शायद किसी को ढूँढ रहे थे, "माफ़ करनाआपको किससे मिलना हैं?" मैंने आवाज़ लगाकर जब  दम्पति से पूछा तो

"अरे बेटा यहाँ निकिता रहती हैं ना?" 

"जी हाँ वो यहीं रहतीं हैं।" 

"वो कहाँ गयी हुई हैं?" 

"पता नहींलेकिन आप लोग कौन हैं?" 

"बेटा हम उसके माता-पिता हैंपिछले दस दस बारह दिनों से उससे बात ही नहीं हो पा रही हैंहर बार फ़ोन स्विच-ऑफ ही बताता हैंइसलिए हमें उसकी चिंता हो रही थीअब तो मुझे भी निकिता जी की चिंता होने लगी थी, कुछ तो पडोसी होने के नाते तो कुछ इंसानियत के नाते

"आप लोग मेरे यहाँ आइए मैं चाय बनाती हूँ बैठकर बात करेंगे।" 

"बेटा कोई घबराने वालीं बात तो नहीं हैं नापिछले दस दिनों से हमारी निकिता से बात नहीं हो पाई हैंपहले तो वो हर दूसरे दिन मुझसे बात करती थीलेकिन अब इतने दिनों से जब उससे बात नहीं हो पा रहीं हैं तो हमें उसकी चिंता हो रहीं हैंबेटा प्लीज जो भी बात हो हमसे छुपाना मत" निकिता जी की माँ मेरे सामने हाथ जोड़े खड़ी थी।  

"अरे आंटी आप ऐसे क्यों कर रहीं हैं आइए अंदर" और मैं उन्हें अपने घर के अंदर ले आईऔर पिछले दस-बारह दिनों में जो कुछ भी हुआ उन्हें साफ़-साफ़ बता दिया। 

"हमें अभी पुलिस स्टेशन चलना चाहिए" ऐसा कहते हुए एकाएक ही निकिता के पापा उठकर खड़े हो गए। 

"निकिता कौन आया हुआ हैं।" इतने में ही मेरे पति राघव भी वहाँ आ गएराघव को मैं पहले ही निकिता जी के बारें में सबकुछ बता चुकी थी। 

"राघव ये निकिता के माता-पिता हैंहम लोग गलत समझ रहे थेवो अपने घर नहीं गयी हुई हैंये बेचारे तो खुद ही उनकी तलाश में यहाँ आए हुए हैं।" 

"तो फिर बात तो चिंता की हैंहमें अभी पुलिस स्टेशन जाना चाहिए।" राघव के कहते ही

"जी मैं भी अभी यही कह रहा था।" और कुछ ही देर बाद हम चारों पुलिस स्टेशन के लिए रवाना हो गए।

 पुलिस स्टेशन पहुँचकर हमने निकिता जी के गुम होने की रिपोर्ट लिखवा दीऔर इंस्पेक्टर साहब ने हमें आश्वासन भी  दिया कि वो जल्द से जल्द निकिता जी को ढूँढ़ने की कोशिश करेंगे। इसके बाद हम लोग घर वापिस आ गएलेकिन हमारी चिंता बरक़रार थीकिसी भी काम में मन नहीं लग रहा थानिकिता जी के माता-पिता के रहने का इंतज़ाम भी हमने हमारे ही घर में कर दियापुलिस में रिपोर्ट लिखवाए हुए अब एक हफ़्ते से भी ज्यादा गुज़र चुका थाइस दौरान हमनें भी निकिता जी को ढूँढने की काफी कोशिश कीलेकिन पुलिस और हमदोनों ही उन्हें ढूँढ़ने में नाकामयाब रहें , पुलिस द्वारा उनके बैंकउनके साथ काम करने वाले कलीग्स  एवं उनके जितने भी जान पहचान के लोग थे सभी से पूछताछ की गयी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। दिन-पर-दिन गुज़रते जा रहें थेलेकिन निकिता जी का कुछ भी पता नहीं चल पा रहा थालेकिन निकिता जी के गायब होने के एक महीनें बाद एक दिन अचानक से पुलिस-स्टेशन से फ़ोन आता हैं कि उन्हें मुंबई-पुणे हाईवे के पास झाड़ियों में एक लड़की की लाश मिली हैंजिसकी शक्ल निकिता जी से मिलती हैंहम चारों तुरंत ही वहाँ जाने के लिए रवाना हो गएलाश मुंबई-पुणे के बीच बने एक अस्पताल के मुर्दाघर में रखी हुई थीहम चारों घबराते हुए अस्पताल पहुँचेनिकिता जी के माता-पिता को लाश की पहचान करने के लिए मुर्दाघर के अन्दर भेजा गयालेकिन जब वो वापिस बाहर आये तो उनके हालात बहुत बुरे थेवो लाश निकिता जी की ही थी। राघव बार-बार मुझे इशारा कर रहें थे कि मैं निकिता जी की माँ को सम्भालूंलेकिन मैं उन्हें क्या संभालती मेरे तो खुद के हालात खराब थेमेरी आँखों के आगे अँधेरा छा चुका थाऔर एकाएक ही मैं चक्कर खाकर वहीं पास रखी कुर्सी पर लगभग गिर सी गयी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक  निकिता जी का गैंग-रैप हुआ था और उसके बाद रेपिस्ट ने उनकी हत्या कर दीसबकुछ ख़त्म हो चुका थारिपोर्ट के मुताबिक रैप करने वाले चार से पाँच लोग थेलेकिन ये पता नहीं चल पाया कि वो दरिंदे कौन थे और ना ही ये पता चल पाया कि निकिता जी वहाँ हाईवे तक पहुँची कैसे क्यों कि उनके घर और बैंक के रास्ते में तो कोई भी हाईवे आता ही नहींवैसे भी क्या हुआ था अब इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ताक्यों कि निकिता जी तो वापिस आने वालीं नहींलेकिन हाँ उनके बलात्कारी ज़रूर खुले घूम रहें हैं और जिनकी वजह से आज भी समाज की बेटी-बहुओं पर ख़तरा मंडरा रहा हैं 


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