Kaamchor Kaamwaali (Story On Maid)
“क्या बात है दिशा थकी-थकी सी लग रही हो, तबीयत तो ठीक है तुम्हारी?” मेरे दरवाजा खोलते ही ऑफिस से लौटे पतिदेव ने पूछा।
“हाँ ठीक हूँ, तुम्हारा दिन कैसा गया अमित”
“वैसा ही जैसा हमेशा जाता है, कुछ खास नहीं हुआ, लेकिन तुम्हारे हाव-भाव जरूर
बदले-बदले से नजर आ रहें हैं, कुछ खास हुआ है क्या आज घर में” अमित ने मेरा चेहरा
पढ़ने की कोशिश की।
“चाय पीओगे?” मैंने पूछा।
“हाँ, बना लो, मैं चेंज करके आता हूँ।“ इतना कह अमित कपड़े चेंज करने चले गए
और मैं किचन में चाय बनाने।
कुछ देर बाद, “अब बताओ क्या हुआ है।“ अमित ने चाय का कप उठाते हुए पूछा।
“अरे कुछ नहीं, सब ठीक है।“ मैंने भी उसे टाल दिया।
“दिशा कुछ ना कुछ तो हुआ है, अब बता भी दो क्या हुआ है।“
“अमित, ये अच्छी maids क्यों नहीं
मिलती हैं।“
“अरे, अरे क्या हुआ, झगड़ बैठी क्या कामवाली से” अमित के कहते ही,
“नहीं, झगड़ा नहीं हुआ है।“
“तो फिर”
“दरअसल पिछले कुछ हफ्तों से मुझे घर कुछ ज्यादा ही गंदा नजर आ रहा था, जमीन
पर पैर रखो तो रखते ही पैरों में मिट्टी लगती थी, कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि ऐसा
क्यों हो रहा है, तो फिर आज मैंने घर में सफाई करने की सोची, अमित जानते हो ये
सफाई मैंने कामवाली के सफाई करके जाने के बाद की।“
“दिशा तुम्हारा दिमाग खराब है क्या, क्या जरूरत थी ये सब करने की, अरे पहले
ही तुम्हें back-pain की प्रॉब्लम
है।“ मुझे जिस बात का शक था वो ही हुआ, मैं जानती थी कि अगर मेरे द्वारा साफ-सफाई
की बात अमित तक पहुँची तो वो नाराज हो जायेंगे।
“अब छोड़ो भी, अब तो हो गयी सफाई” मैंने अमित को शांत करने की कोशिश की
“अच्छा अब ये बताओ कि क्या-क्या साफ-सफाई की तुमने ?”
“अमित जाने दो ना”
“दिशा बताओ, मुझे भी तो पता चले कि हमारी कामवाली कैसा काम करती हैं।
“तुम तो बस इतना जान लो कि वो कुछ नहीं करती।“
“मतलब !”
“पूरे घर का झाड़ू-पोंछा किया है मैंने आज, और जानते हो हर कमरे से कचरा
निकला, और दरवाजों के पीछे तो धूल और मिट्टी का ढ़ेर मिला, खिड़कियाँ, दरवाजे सभी पर
धूल जमा थी, और जब पोंछा लगाया तो पहले ही कमरे में पानी बिल्कुल गंदा हो गया,
जिसमे कि मैं उससे पहले झाड़ू लगा चुकी थी।“ मेरे कहते ही,
“दिशा, मुझे लगता है ये गंदगी काफी पहले से जमा हो रही थी, जब ही तो
तुम्हारे झाड़ू लगाने के बाद भी पोंछे का पानी पहले ही कमरे में गंदा हो गया।“ अमित
के कहते ही,
“सारी गलती मेरी है, कभी कामवाली पर ध्यान ही नहीं दिया कि वो कैसा काम कर
रही है।“ मैं इन सबके लिए खुद को गुनाहगार समझ रही थी।
“दिशा, दिशा, खुद को कोसना बंद करो, इसमे तुम्हारी कोई गलती नहीं है, तुम
जॉब करती हो, चाहे work
from home ही हो
तुम्हारा, लेकिन काम तो है, और एक टाइम में तुम दो-दो जगह कैसे ध्यान दे सकती हो,
गलती कामवाली की है, जो कामचलाऊ सफाई करके हमारा उल्लू बना रही है, अरे अगर पैसे
पूरे चाहिए तो सफाई भी तो अच्छे से करे, हम क्या पूरे घर में उसके पीछे-पीछे
घूमेंगे।“ अमित के चेहरे पर गुस्सा साफ नजर आ रहा था।
“लेकिन अमित क्या गारंटी है कि इसको हटाने के बाद दूसरी कामवाली अच्छी ही
मिलेगी।“ मेरे कहते ही,
“नहीं, इसे रहने दो, क्योंकि हो सकता है जो दूसरी आए वो इससे भी गंदा काम
करे, इसलिए हमें कोई रिस्क नहीं लेना है, और वैसे भी सुनने में आ रहा है कि मेरा
ट्रांसफ़र होने वाला है।“
“ट्रांसफ़र ! कहाँ, और कब?” मैं एकाएक ही उछल पड़ी।
“पता नहीं, कहाँ और कब, शायद मुंबई”
“Wow अमित, ये खुशखबरी तुमने पहले क्यों नहीं सुनाई।“
“पहले तुम्हारी तकलीफ की वजह जान लेना चाहता था।“ अमित के कहा
“अगर बता देते तो मेरी तकलीफ पहले ही कम हो जाती, काश जल्द से जल्द
तुम्हारा ट्रांसफ़र हो और हम इस कोलकाता शहर को टाटा, बाय, बाय कहें।“ मैंने बेहद
ही उत्सुकता से कहा।
“हाँ सो तो है......लेकिन दिशा शहर कोई बुरा नहीं होता है, बुरे या अच्छे
होते हैं उसमे रहने वाले लोग, अब देखो ना किस्मत से तुम्हें जो कामवाली मिली वो
कामचोर निकली तो इसका मतलब ये तो नहीं ना कि सभी कामवालियाँ कामचोर होती हैं।“
“अमित ये कामचोर ही नहीं बल्कि उल्टा जवाब भी देती है, बहुत ही जिद्दी है,
खुद को होशियार समझती है और मुझे बेवकूफ”
“बस, बस दिशा बस, एक ही बार में सारी भड़ास निकाल लोगी क्या।“
“सॉरी अमित, लेकिन आज जो कुछ हुआ उस वजह से मेरा मूड़ बहुत खराब है।“ मैं इस
तरह से ऑफिस से थके-हारे आए अमित से बात नहीं करना चाहती थी।
“कोई बात नहीं, लेकिन इस बारे में कामवाली से कुछ मत कहना, छोड़कर चली गयी
तो दूसरी मिलनी मुश्किल हो जाएगी, और घर में साफ-सफाई के अलावा भी काम हैं।“ अमित
ने मुझे सतर्क करते हुए जैसे ही कहा, मैं हँस पड़ी।
“अब तुम ये हँसी क्यों, मैंने तो कोई हँसने वाली बात नहीं की” अमित आश्चर्य
से मेरी ओर देखने लगे।
“नहीं वो तो कुछ सोचकर मुझे हँसी आ गयी।“ मैंने बमुश्किल हँसी रोकते हुए
कहा।
“मुझे भी तो पता चले तुम्हारे हँसने की वजह” अमित की व्याकुलता उसके चेहरे
पर साफ नजर आ रही थी।
“दरअसल आज जो कुछ हुआ वो अगर मैंने कामवाली को बताया तो उसका क्या रिएक्शन
होगा, ये सोचकर मुझे हँसी आ गयी।“
“क्या रिएक्शन होगा?” अमित के पूछते ही,
“जितना मैं उसे जानती हूँ, वो कहेगी, तो ठीक है साफ-सफाई आप ही कर लिया
करो, और जब पैसों की बात आएगी तो गारंटी एक भी पैसा कम नहीं करवाएगी महारानी” मेरे
कहते ही,
“वो ये नहीं कहेगी कि भाभी सॉरी आगे से मैं अच्छा काम करने की कोशिश
करूँगी।“ अमित को जैसे मेरी बात पर विश्वास ही नहीं हो रहा था।
“नहीं पतिदेव ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा, बल्कि उसे धेले भर की शर्म भी
महसूस नहीं होगी, लेकिन हाँ, बदतमीजी से उल्टे जवाब जरूर दे देगी।“
“गजब है, तो फिर खुद ही करो ना सारे काम, पैसे भी दो और उनकी बदतमीजी भी
सहो।“
‘हाँ बात तो तुम्हारी सही है, इन कामवालियों को सिर चढ़ाने में हमारा ही
सबसे बड़ा हाथ है, हम ही उन्हे important फ़ील करवाती
हैं, और ऐसे behave करती हैं कि अगर वो नहीं होती तो हम मर ही जाते, बल्कि
ऐसा कुछ नहीं है, हम भी घर का काम कर सकते हैं, यकीनन कामवालियों से तो अच्छा ही
करेंगे......अमित मुझे लगता है हमे कामवाली हटा देनी चाहिए।“
“शांत बीवी, शांत धेर्य से काम लो, जरूरी नहीं है की हर वक्त घोड़े पर ही सवार रहा जाए, हटा देना लेकिन अच्छे से सोच-विचार करने के बाद, फिलहाल खाना लगा दो, क्योंकि तुम्हारे इस बेचारे पति का तुम्हारी बातों से पेट ही नहीं भरा।“ अमित के इतना कहते ही हम दोनों ठहाका लगाकर हँस पड़े और किचन में जाकर खाना गर्म करने लगे। लेकिन कामवाली के काम करने के तरीके को मैं यूँ ही नजरंदाज नहीं कर सकती थी, इसलिए बहुत सोच-समझ कर मैंने उसे हटाने का फ़ैसला लिया और महीनें के अंत में वेतन देकर उसे विदा कर दिया। अब खुद घर के सारे काम कर रहीं हूँ, बिना किसी शर्म या हिचक के क्योंकि खुद के घर का काम करने में कैसी शर्म, हमारी माँ, दादी, नानियाँ भी तो करती थी, और हमसे ज्यादा स्वस्थ भी रहती थी, इसलिए उनके नक्शेकदम पर चलना गलत नहीं है, बल्कि हर नजरिए से बेहतर ही है। खुद की सेहत के नजरिए से, पैसों की बर्बादी की नजरिए से, हाइजीन के नजरिए से, और खुद के घर का काम करने में किसी पर निर्भरता भी नहीं रहती। शायद और भी फायदे होते हैं जो कि मुझे अभी याद नहीं आ रहे, लेकिन जो कुछ भी हो अब मुझे घर के काम के लिए कुछ वक्त जरूर निकालना पड़ता है, और फिलहाल तो packing भी स्टार्ट हो चुकी है, अरे भई अमित का ट्रांसफ़र मुंबई जो हो गया है, लेकिन अब मैं ज्यादा खुश हूँ, और घर चमकता रहता है सो अलग, सच कहूँ तो हमारा अपने ही घरों के काम के लिए किसी ओर पर निर्भर रहने का सिस्टम ही गलत है।
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