Chai Ki Tapri (Story On A Family)
“हमारे जन्म से लेकर हमारी मृत्यु तक के सफ़र के दौरान हर कदम पर ज़िंदगी हमें कभी कुछ तो कभी कुछ सिखाती ही रहती है। जिसके लिए माध्यम कोई भी हो सकता है, कभी कोई हमारा अपना, तो कभी कोई पराया, या फिर वक्त जो कि अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी, बस जरूरत है तो उस सिखाए गए पाठ को समझने की, और जरूरी नहीं कि हम ज़िंदगी द्वारा सिखाए गए हर पाठ को समझे और सीखे खासकर उस वक्त जब हमें कोई बात बेहद ही सरल तरीके से समझाई जाती है, लेकिन अगर कोई बात हमें किसी हादसे के बाद या कोई कोई घटना घटित होने के बाद सीखने को मिले तो यकीनन हम उसे कभी नहीं भूलते, ऐसा सोचना मेरे हिसाब से गलत है, क्योंकि मेरा तजुर्बा ये कहता है कि कुछ इंसान ऐसे भी होते हैं जो बुरा वक्त गुजरते ही उससे मिली सीख को तुरंत भूल जाते हैं या फिर कुछ समय बाद, लेकिन ऐसा हर इंसान नहीं होता......आया कुछ समझ में शालिनी बिटिया या फिर सबकुछ सिर के ऊपर से निकल गया।“ शिव प्रसाद जी ने अपनी बहु को जीवन का सार समझाते हुए पूछा।
“पापा जी...आप क्या मुझे बेवकूफ समझते हो, अरे मुझे सबकुछ समझ में आ गया,
आप Life lesson के बारे में बात कर रहें हैं।“ पापा जी यानि कि शालिनी
के ससुर जी, जो ससुर से कहीं ज्यादा उसके पिता हैं, खासकर उसके पति विक्रांत के
जाने के बाद से, विक्रांत पिछले ही साल एक कार दुर्घटना में इस दुनिया को अलविदा
कह गया था । उनके जाने के बाद से घर पर सिर्फ ये दोनों ही तो रह गए थे, शालिनी की सासू
माँ तो विक्रांत के बचपन में ही गुजर गयी थी, बस तब से ही शिव प्रसाद जी ही उसकी
माँ भी थे और पिता भी।
“क्या हुआ क्या सोचने लगी” एकाएक किसी सोच में डूब गयी शालिनी से शिव
प्रसाद जी ने पूछा ।
“नहीं, कुछ भी तो नहीं” शालिनी अचानक से निकल आई आँसू की छोटी-सी बूँद को
अपने अँगूठे से पोंछते हुए कहने लगी।
“तो फिर जा मेरे लिए चाय बना ला।“ शिव प्रसाद ने उसे आँसू पोंछते हुए देख
उसका ध्यान बँटाने के इरादे से कहा।
“चाय ! वो तो अभी कुछ देर पहले ही पी थी।“
“तो क्या दोबारा नहीं पी सकता।“
“नहीं, कम से कम मैं तो नहीं बनाऊँगी।“ शालिनी गर्दन झटकते हुए वहाँ से उठ
गयी।
“हाँ तो मैं बना लूँगा, तुझे क्या लगता है मैं नहीं बना सकता, बल्कि तुझसे
बेहतर ही बनाऊँगा। शिव प्रसाद जी के कहते ही,
“तो फिर मुझसे क्यों बनाने के लिए कहते हैं।“
“वो तो इसलिए कि तुझे मेरी सेवा का मौका मिले।“
“हाँ ठीक है आप रुकिए मैं ही बना लाती हूँ।“ इतना कह शालिनी चाय बनाने रसोई
की ओर चली गयी। बड़ा ही अजीब रिश्ता है शिव प्रसाद जी और शालिनी के बीच, कभी
बाप-बेटी, कभी ससुर-बहु, तो कभी दोस्त का, हाँ कभी-कभी तो शिव प्रसाद जी को शालिनी
में अपनी माँ नजर आने लगती हैं, खासकर उस वक्त जब वो उनकी गलतियों पर उन्हे डाँट
देती है।
“अरे चाय का क्या हुआ।“ अभी चाय बनी भी नहीं थी कि शिव प्रसाद जी की आवाज आ
गयी।
“अगर आपको इतनी ही जल्दी है तो खुद ही बना लीजिए।“ शालिनी ने तुनककर जवाब
दिया।
“हाँ तो मैं ही बनाने आ रहा था, तू ही बीच में आई।“
“और सेवा की बात करके किसने Emotional किया था।“ शालिनी
ने आँखे तरेरते हुए पूछा।
“अच्छा छोड़ ये सब बातें, तूने फ़ोटोज़ देखी जो मैंने भेजी थी।“
“पापा जी...मुझे नहीं देखनी वो फ़ोटोज़” शालिनी बिना वक्त गवाएं अपने कमरे
में जाने लगी।
“अपने पिता की इतनी भी बात नहीं मानेगी, अरे बेटा कर ले शादी, जिससे की मैं
भी ऊपर जाकर विक्रांत को कह सकूँ कि तू खुश हैं, किसी के साथ तेरा जीवन फिर से
शुरू हो चुका है।
“पापा जी खुश तो मैं अभी भी हूँ, बल्कि यहाँ से गयी तो दुखी हो जाऊँगी, और
जितना प्यार आप मुझसे करते है कोई करेगा क्या?”
“हो सकता है कोई मुझसे भी ज्यादा प्यार करने वाला मिल जाए । “
“असंभव” शालिनी ने कहा और चाय छानकर अपने कमरे की ओर जाने लगी।
“बेटा”
“पापा बस अब आगे इस बारे में कोई और बात नहीं।“ इतना कहते ही शालिनी आगे बढ़
गयी।
विक्रांत और शालिनी का प्रेम-विवाह हुआ था, जिसके लिए इन दोनों को ही
ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी, क्योंकि दोनों के ही परिवार वाले आसानी से माँग गए
थे। शादी के बाद शालिनी अपने ससुराल आ गयी, सब कुछ अच्छा चल रहा था, लगता ही नहीं
था कि शिव प्रसाद जी उसके ससुर है या वो अपने ससुराल में है, बल्कि उसे तो हर वक्त
यही लगता था कि वो अपने मायके में ही है, और इसी वजह से उसकी मम्मी भी कभी-कभी
नाराज हो जाती थी कि वो उनसे ना ही मिलने जाती है और ना ही कभी फोन करती है, लेकिन
दूसरी तरफ उन्हे खुशी भी होती थी कि उनकी बेटी अपने ससुराल में खुश है।
लेकिन ये खुशियाँ लंबे समय तक नहीं चल सकी और शादी के दो साल बाद ही
विक्रांत की कार दुर्घटना में मौत हो गयी, उसके जाते ही शिव प्रसाद जी और शालिनी
की दुनिया ही उजड़ गयी। और तब से ही शिव प्रसाद जी अपने दुख को भूलने का एक असफल
प्रयास करते हुए शालिनी को खुश रखने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। भूलने का असफल
प्रयास इसलिए क्योंकि जब भी शालिनी उनके साथ नहीं होती थी तो वो अपने आँसू नहीं
रोक पाते थे। और कई बार तो फूट-फूटकर रो पड़ते थे। लेकिन अब पिछले कुछ महीनों से वो
शालिनी के लिए एक अच्छा घर व एक अच्छा वर तलाश रहे थे, जिससे की उसकी ज़िंदगी फिर
से शुरू हो सके लेकिन वो है की मानने को तैयार ही नहीं है, और सही भी तो है, कैसे
भूला दे वो अपने प्यार, कैसे यूँ ही किसी ओर की हो जाए। लेकिन शिव प्रसाद जी भी
कहाँ मानने वाले थे, वो तो हर संभव कोशिश कर रहे थे, शालिनी को मनाने की।
“शालिनी देख तो बेटा ये किसी लड़के का व्हाट्सअप पर biodata आया है।“ कुछ दिनों बाद एक दिन शिव प्रसाद जी ने फिर से शालिनी का मन
टटोलने की कोशिश की।
“Ignore कर दीजिए पापा जी” उसने भी बड़ी ही बेरुखी से जवाब दिया।
“बेटा, ऐसा कब तक चलेगा, तू क्यों नहीं अपना फिर से घर बसा लेती, जिससे की
मैं भी सुकून की मौत मर सकूँ।“
“पापा। मेरी शादी हो चुकी है एक बार, दुबारा नहीं करनी है, और अगर मैं भी
चली गयी तो आपकी देखभाल कौन करेगा, और सबसे बड़ी बात तो ये है कि मैं विक्रांत की
जगह किसी की भी कल्पना नहीं कर सकती।“ शालिनी ने शिव प्रसाद को अपने विचारों से
अवगत करवाते हुए कहा।
“वो तो ठीक है बेटा लेकिन......”
“लेकिन क्या पापा?”
“बेटा ज़िंदगी बहुत बड़ी है, अकेले कैसे गुजारेगी उसे अगर एक सहारा होता तो
ठीक था।“ शिवप्रसाद जी के कहते ही,
“पापा, आप गलत नहीं है, अगर मैं आपकी जगह होती तो यही सोचती, लेकिन आप ही
बताइए, कैसे किसी ओर को वो जगह दे दूँ जो विक्रांत की है, कैसे भूल जाऊँ उसे, यहाँ
रहती हूँ तो ऐसा लगता है की मेरा विक्रांत मेरे साथ है, खुद को महफूज महसूस करती
हूँ, अगर यहाँ से चली गयी तो मैं मर जाऊँगी।“ शालिनी के इतना कहते ही दोनों की ही
आँखें एकाएक नम हो गयी।
“ठीक है, अगर तू वापिस से घर बसाने में खुश नहीं है तो हम इस Topic पर दुबारा बात नहीं करेंगे, लेकिन मुझसे वादा कर जब भी तू मानसिक रूप से
दूसरी शादी के लिए तैयार हो तो मुझे जरूर बताएगी।“
“जरूर बताऊँगी पापा, वैसे ऐसा कभी होगा नहीं।“ शालिनी के कहते ही,
“अच्छा अब फटाफट मेरे लिए एक मसालेदार चाय बना ला।“
‘फिर से चाय, मुझे तो लगता है हमें अपने घर के बाहर एक चाय की टपरी खुलवा
लेनी चाहिए, जिससे की आप पूरा दिन उस पर बैठे रहो, जिससे की चाय वाला भी खुश और आप
भी खुश।“ शालिनी के इतना कहते ही शिवप्रसाद जी ठहाका लगा कर हँस पड़े और माहौल
खुशनुमा हो गया।
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