Bal-Vivah (Story On Child-Marriage)
“कुसुम भाभी, तुम अभी तक तैयार नही हुई, शीतल के घर नही जाना है क्या?” कुसुम के पड़ोस में रहने वाली विभा ने अचानक से आकर पूछा।
“अरे तू
! तू यहाँ क्या कर रही है, तुझे तो इस
वक्त शीतल के यहाँ होना चाहिए था, वो तेरा इंतजार कर रही होगी, वो तेरी खास दोस्त
है, और आज उसकी बेटी की शादी है।“ कुसुम के कहते ही,
“हाँ भाभी
वहीं जा रही हूँ, सोचा आप को भी साथ लेती चलूँ।“
“मैं थोड़ी
देर में आऊँगी, कुंदन आया है, उसका खाना बनाकर निकलूँगी।“
“कुंदन आया
है ! अरे वाह तुम्हारे घर में तो रौनक हो गयी, अच्छा मैं चलती हूँ काम खत्म होते
ही आ जाना।” इतना कह विभा शीतल के घर की ओर चली गयी, और उसके जाते ही,
“माँ, क्या
है आज शीतल काकी के घर” कुंदन ने पूछा।
“शादी है आज
उसकी बेटी की” कुसुम ने जैसे ही उत्साहित होते हुए कहा।
“किसकी, रूपा
की !”
“हाँ रे, तू
चलेगा” कुसुम के पूछते ही,
“क्या उम्र
है उसकी?”
“उम्र का
क्या है, लड़की सयानी हो गयी, लड़का अच्छा मिल गया तो तय कर दी शादी, अच्छा बोल हलवा
खाएगा पकोड़ों की साथ” कुसुम ने गैस पर पकोड़ों के लिए कढ़ाई चढाते हुए पूछा।
“माँ मैंने
पूछा उम्र क्या है रूपा की”
“लगभग 13-14
की होगी उससे ज्यादा तो नही हो सकती” कुसुम के कहते ही
“माँ बच्ची
है वो अभी” कुंदन ने आवेश में आकर कहा।
“बच्ची !
मेरी भी इसी उम्र में शादी हो गयी थी, और सोलह की थी तो तू मेरी गोद में था।“
“तो क्या ये
अच्छी बात थी, माँ पहले आपके साथ गलत हुआ और अब रूपा के साथ हो रहा है, जहाँ तक
मैं समझता हूँ इस गाँव सभी की शादी वक्त से पहले ही हुई है और आगे हो भी रही है,
माँ लड़कियों की शादी 18 से पहले और लड़के की 21 से पहले कानूनी अपराध है।“
“जानती हूँ,
लेकिन 18 साल तक लड़की को घर में बिठाकर रखेंगे तो उसकी चौकसी भी करनी पड़ेगी, अरे
एक बार ब्याह होकर अपने ससुराल चली जाए तो माँ-बाप जिम्मेदारियों से मुक्त हो।“
कुसुम ने जैसे ही अपने विचार प्रकट किए कुंदन जोर से चिल्लाते हुए कहा।
“गजब हो तुम
सब भी चौकसी क्यों करनी पड़ेगी, अरे उसे पढ़ाओ-लिखाओ काबिल इंसान बनाओ, आप सुनती नही
है समाचारों में कि फलां लड़की ने फलां क्षेत्र में पुरस्कार जीता है, या कोई अच्छे
नंबर ला स्कूल में अव्वल आई है, या फिर कोई डॉक्टर बन गयी तो कोई आई. ए. एस.”
फालतू की
बातें हैं सब, लड़कियाँ कुछ भी कर ले अंत में पकानी तो रसोई ही है।“ कुसुम ने
गरमागरम पकोड़े प्लेट में डालते हुए कहा।
“कुछ नही हो
सकता माँ इस गाँव का, और इसका ही क्या, ना जाने हमारे देश में कितने ही गाँव ऐसे
होंगे जो दकियानूसी विचारों के होंगे, लेकिन मैं हिम्मत नही हारूँगा, कुछ भी हो
जाए रूपा की शादी रुकवाकर ही रहूँगा।“ इतना कह कुंदन पकोड़े छोड़ घर से बाहर निकल
गया।
“अरे पकोड़े
तो खा ले, और बेवजह क्यों शीतल की खुशी में विघन डालना चाहता है।”
“विघन डालना
जरूरी है माँ” कुंदन ने पीछे मुड़कर कहा, और कुसुम कुछ देर तक यूँ ही बड़बड़ाती रही,
लेकिन कुंदन उसकी कही सभी बातों को नजरंदाज कर आगे बढ़ता चला गया।
शीतल के घर
पर, “ये क्या कह रहे हो कुंदन बेटा, हमें तो लगा था तुम हमारी खुशियों में शामिल
होने आए हो लेकिन तुम तो...कही तुम मज़ाक तो नही कर रहे।” रूपा के पापा दर्शन लाल
के कहते ही,
“नही काका
में मज़ाक नही कर रहा हूँ, आप ये शादी रुकवा दीजिए, रूपा शादी के हिसाब से बहुत
छोटी है अभी”
“शादी रुकवा
दूँ ! ऐसा कैसे हो सकता है, बेटा अगर हमारी खुशी में शामिल होना चाहो तो ठीक है,
नही तो वो रहा दरवाजा” दर्शन लाल ने दरवाजे की ओर इशारा करते हुए कहा।
“काका अगर आप
मेरी बात समझाने से समझ जाए तो ठीक है नही तो मुझे पुलिस बुलवानी पड़ेगी।“ कुंदन के
कहते ही,
“पुलिस, ये
पुलिस बुलवाने की बात कौन कर रहा है।“ इतने में ही गाँव के सरपंच कमलनाथ ने कमरे
में प्रवेश किया।
“मैं कर रहा
हूँ सरपंच साहब, अगर ये शादी नही रोकी गयी तो मैं पुलिस में इत्तला कर दूँगा।“
“बच्चे, अभी
तुम छोटे हो बड़ों की बातों में मत पड़ो, ये शादी ब्याह जैसे काम कब करने चाहिए हम
बड़ों पर छोड़ दो, अगर कल को लड़की के साथ कुछ ऊँच-नीच हो गयी तो क्या करेंगे, इसलिए
बेटी तो जितनी जल्दी हो सके अपने घर चली जाए तो अच्छा है।“ कमलनाथ के कहते ही,
“सरपंच साहब,
सबसे पहले तो बेटियों को पराया सोचना बंद करो, उन्हे पढ़ाओ-लिखाओ, एक काबिल इंसान
बनाओ, और शादी की उम्र होने पर शादी भी करो लेकिन वक्त से पहले नही।“ कुंदन के
कहते ही,
“कुंदन बेटा,
हमारे यहाँ आज खुशी का मौका है, हम किसी भी प्रकार का दंगा-फसाद नही करना चाहेंगे,
इसलिए अच्छा यही होगा कि तुम या तो यहाँ से चले जाओ या फिर शादी का खाना खाकर
जाना।“ दर्शन लाल ने समझाते हुए कहा
“काका, कुछ
भी हो जाए शादी तो मैं रुकवा कर रहूँगा।“
“धमकी देता
है, अरे ओ छौरों उठाकर बाहर फैंक दो इसे” इतने में ही दर्शन लाल ने चिल्लाकर कहा।
“इसकी जरूरत
नही पड़ेगी, मैं जा रहा हूँ।“ कुंदन के कहते ही,
“निकल गयी
हेकड़ी इतनी सी देर में” इतने में ही कमलनाथ ने कहा।
“नही, मैं
पुलिस में इत्तला करने जा रहा हूँ।“ इतना कह कुंदन बाहर जाने लगा।
“सरपंच साहब
ये लड़का क्या कह रहा है, पुलिस, वो कही पुलिस को ना बुला लाए।“ दर्शन लाल ने
चिंतित होते हुए कहा।
“अरे ऐसा कुछ
नही होगा सब गीदड़ भभकियाँ है, शहर से पढ़कर आया
है, शहरी हवा का असर है ये भाई, कुछ नही कर पाएगा, हिम्मत ही नही है इसमे पुलिस के
पास जाने की, और तू चिंता ना कर कल इसके बाप को पंचायत में बुलाकर धमका दूँगा,
उसके बाद हिम्मत नही होगी कुछ बोलने की......चल अब मेहमानों के पास चले।“ कमलनाथ
ने दर्शन लाल से कहा और फिर दोनों शादी में शामिल होने आए मेहमानों की ओर चल दिए।
कुछ देर बाद,
“क्या हो रहा
है यहाँ” एकाएक ही एक बेहद ही दमदार आवाज शादी के मंडप में गूँजी, वहाँ बैठे सभी
लोगों ने आवाज की ओर मुड़कर देखा तो पुलिस खड़ी थी।
“पुलिस !”
किसी ने आश्चर्य से पूछा।
“हाँ पुलिस,
हमने सुना है यहाँ एक बाल-विवाह हो रहा है।“
“नही मालिक
ऐसा कुछ नही है, आपको जरूर कोई गलतफहमी हुई है।“ इतने में ही सरपंच कमलनाथ पुलिस
इन्स्पेक्टर के सामने आकर खड़ा हो गया।
“इसका मतलब
हमारे पुलिस स्टेशन में जो रिपोर्ट लिखवाई गयी है वो गलत है।“
“बिल्कुल
साहब, वैसे ये रिपोर्ट लिखवाई किसने”
“उससे
तुम्हें क्या, वैसे यहाँ हो क्या रहा है।“
“कुछ नही
साहब दर्शन लाल की शादी की सालगिरह है, वो ही मना रहे हैं।“ पीछे से एक आवाज आई,
जिसकी तरफ देख कमलनाथ मुस्कुरा दिया।
“कहाँ है
दर्शन लाल?” इन्स्पेक्टर साहब के पूछते ही,
“ये रहा
मालिक, ये लोग सही कह रहे हैं, आज मेरी शादी की सालगिरह है, उसी का उत्सव चल रहा
है।“
“हम्म, लेकिन
हमारे पास तो खबर है कि......”
“पता नही
साहब कौन नासमझ गलत अफवाह फैला रहा है।“
“काका, क्या
वाकई में ये गलत अफवाह है।“ इतने में ही इन्स्पेक्टर साहब के पीछे से कुंदन की
आवाज आई।
“अरे कुंदन
बेटा तुम कब आए शहर से, और माँ-बापू कहा है, क्या वो उत्सव में शरीक नही होंगे।“
दर्शन लाल ने बड़ी ही मासूमियत से पूछा।
“होंगे ना
काका, जब आपकी शादी की सालगिरह होगी तो जरूर शामिल होंगे, वो तो आज भी आ जाते
लेकिन इस गैर-कानूनी काम में मैंने शामिल नही होने दिया।“
“गैर-कानूनी
! मैं कुछ समझा नही बचवा”
“जब पुलिस के
डंडे पड़ेंगे तो सब समझ जायेंगे।“ कुंदन के कहते ही,
“कुंदन
ये कैसी बहकी-बहकी बातें कर रहे हो, कुछ समझ नही आ रहा। “
“काका पहले
रूपा को बुलाइए।“
“रूपा ! अरे
बेटा उस बच्ची को यहाँ मर्दों के बीच में क्यों बुलवा रहे हो।“ कमलनाथ के कहते ही,
“रूपा, रूपा
बाहर आओ” कुंदन, दर्शन लाल को नजरंदाज करते हुए रूपा को आवाज लगाने लगा।
“अरे बेटा
क्यों लड़की को बाहर बुला रहे हो, कुछ तो हमारे खानदान की मर्यादा का ख्याल करो।“
दर्शन लाल की आँखों में अब क्रोध साफ नजर आ रहा था जिसे उसने दबाने की कोशिश की।
“इन्स्पेक्टर
साहब पता नही इस लड़के की हसमे क्या दुश्मनी है, पता नही इसको लग रहा है कि हम रूपा
की शादी कर रहे हैं।“ दर्शन लाल के कहते ही,
“काका, मैंने
तो कहा ही नही कि आप यहाँ रूपा की शादी कर रहे हैं , मैंने तो इन्स्पेक्टर साहब से
कहा था कि गाँव के दर्शनलाल के यहाँ किसी नाबालिग की शादी हो रही है, बल्कि रूपा
का नाम तो आपने ही लिया, और रही उसे बुलवाने की बात, वो तो मैं यूँ ही आवाज लगा
रहा था।“ कुंदन के कहते ही,
“दर्शन लाल,
तो इसका मतलब यहाँ रूपा की शादी हो रही है।“
“नही साहब,
ऐसा कुछ नही है।“
“दर्शन लाल,
बुलाओ रूपा को बाहर” इन्स्पेक्टर साहब के कहते ही,
“साहब वो
बच्ची है, क्यों उसे सबके सामने बुलवाया जाए।“
“बुलाओ, नही
तो मेरे साथ थाने चलो, तुम जानते हो बाल-विवाह कानूनी अपराध है।“
“साहब जी
लेकिन, अच्छा मैं बुलाकर लाता हूँ।“ इतना कह दर्शन लाल जैसे ही घर के अंदर जाने के
लिए मुड़ा।
“ठहरो, यही
से आवाज लगाओ।“
“जी साहब
जी...रूपा, रूपा बाहर आओ, शीतल जरा रूपा को
बाहर भेजना।“ दर्शन लाल ने माथे पे उबर आई पसीने की बूँदों को पोंछते हुए आवाज
लगाई।
“दर्शन लाल,
क्या बात है तुम्हारे माथे पर ये पसीना कैसा, मौसम भी गर्मी का नही है।“
इन्स्पेक्टर साहब के पूछते ही,
“कुछ नही
जनाब काम की थकावट है।“ इतना कह उसने जैसे ही गुस्से से कुंदन की ओर देखा वो
मुस्कुराने लगा।
कुछ ही देर
में, “बापू, मैं आ गयी।“ इतने में ही रूपा की आवाज आई।
“तुम रूपा हो
?” इन्स्पेक्टर साहब के पूछते ही,
“जी”
“जरा बता
सकती हो यहाँ पर उत्सव क्यों मनाया जा रहा है।“
“आज मेरे
माँ-बापू की शादी की सालगिरह है, उसी उपलक्ष में ये उत्सव मनाया जा रहा है।“ रूपा
के कहते ही दर्शन लाल और बाकी के गाँव वालों के चेहरे खिल गए लेकिन कुंदन के
आश्चर्य का कोई अंत नही था।
“कही ऐसा तो
नही यहाँ तुम्हारी शादी हो रही हो और तुमसे झूठ बोलने के लिए कह दिया गया हो।“
“नही पुलिस
अंकल, ऐसा कुछ नही है, और मेरी शादी क्यों होगी अभी, मैं तो अभी बहुत छोटी हूँ,
बापू कहते है वो मुझे पढ़ा-लिखा कर बड़ा अफसर बनायेगे।“ रूपा की बड़ी-बड़ी बातें सुन पुलिस
को छोड़ दर्शन लाल और बाकी लोगों को यकीन हो गया कि रूपा को अंदर से खूब सीखा-पढ़ाकर
भेजा गया है।
“सुन लिया ना
साहब आपने, अब ये बच्ची भी झूठ बोलेगी क्या?” सरपंच कमलनाथ के कहते ही,
“हम्म, जनाब
कुंदन...आपने तो कहा था कि...” इन्स्पेक्टर साहब ने कुंदन की मुखातिब होते हुए
जैसे ही कहा,
“सर, यहाँ
जरूर कोई बहुत बड़ी साजिश रची जा रही है, आप पता लगाने की कोशिश कीजिए।“
“जनाब आप
हमारा वक्त बर्बाद कर रहे हैं, आगे से खबर पक्की हो तो ही थाने में रपट लिखवाए।“
इतना कह इन्स्पेक्टर साहब और उनके साथ आई टीम वापिस चली गयी।
“कुंदन,
बेटा, आज जो हुआ सो हुआ, लेकिन आगे से हमसे पंगा मत लेना, और कल अपने बाप को लेकर
पंचायत में जरूर पहुँच जाना।“ इतना कह सरपंच साहब दर्शन लाल के घर के अंदर की ओर
चले गए, और बाकी के गाँव वाले उनके पीछे-पीछे चल पड़े।
आज फिर इस
गाँव में एक नाबालिग की बलि चढ़ाई जा रही है, उससे उसका बचपन छीना जा रहा है, लेकिन
कोई इस अन्याय को रोकने वाला नही है, जो था अब उसके साथ कोई नही है।
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