Andaaz-E-Ishq (A Heart Touching love story)


ना जाने ऐसी क्या हुई खता हमसेमिली हैं जो ये सज़ा हमें 

कभी सोचा ना था हो जायेंगे यूँ खफा बीच राहों में कदम हमारें

 

“देख इन बारिश की बूदों को ज़मीं पे गिरता हुआआता हैं ख्याल ज़ेहन में मेरेभीग तुझ संग उठाऊँ लुत्फ़ इस मौसम का” 

“वाह-वाह क्या बात हैं आरिफ मियां आप तो शायर हो गये” 

“बेगमयूँ तो हम शायर नहींपर ना जाने क्यों होते ही दीदार आपके शायरी खुद-ब-खुद आ जाती हैं ज़ेहन में” 

“वैसे आरिफ मियां आपका ये तारीफ करने का अंदाज़ वाकई में हैं गज़ब काआपके इसी अंदाज़ ने तो हमें आपका कायल बना दिया था।” 

“सही कहा ज़ोया बेगमहमारे तारीफ करने के हुनर ने आपको हमारा कायल बना दिया और आपकी खूबसूरती ने हमें आपका कायल बना दियाचलिए इसी बात पर कहीं बाहर घूमने चलते हैं।” 

“बाहरवो भी इस मौसम में?” 

“हाँबेगम इस मौसम मेंअरे भई बारिश में भीगते हुए घूमने का मज़ा ही कुछ ओर हैं।” 

“लेकिन आरिफ मियां” 

“बस ज़ोया बेगम अब ये लेकिन-वेकिन बोलना छोडिये और चलने के लिए तैयार हो जाईए।” 

“ठीक हैंहो जाती हूँ तैयार लेकिन अब ये तो बताईए कि मैं पहनूँ क्या?” 

“कुछ भी पहन लीजिये बेगमआप तो हर लिबास में गज़ब ढात्ती हैं।” 

“तो ठीक हैं मैं अभी तैयार होकर आती हूँलेकिन आप भी तो तैयार हो जाईए।” 

“अरे बेगम क्यों मज़ाक करती हैंअगर आप तैयार हो जायेंगी तो हमारी ओर देखेगा कौन” 

“अरिफ मियां कोई आपकी ओर देखे या ना देखे हम तो हैं आपकी ओर देखने के लिएऔर हमारे होते हुए कोई ओर आपको देखे ये हो नहीं सकता” 

“तारीफ के लिए शुक्रिया बेगमअब जल्द से जल्द तैयार हो जाईएसबसे पहले किसी उम्दा से होटल में खाना खाने चलेंगेभूख की वजह से हमारा तो हाल-बेहाल हो रहा हैं।” 

“लेकिन खाने में आप खायेंगे क्या” 

“ओह ये तो हमने सोचा ही नहींऐसा करते हैं ज़ोया बेगम आज आपकी पसंद का कुछ खाते हैं।” 

“अरे नहीं आरिफ मियां ऐसा गज़ब मत ढानाकहीं ऐसा ना हो मेरी पसंद का खाना खाने की वजह से आप भूखे ही रह जायेशायद आप भूल रहें हैं आपकी ये बेगम डाईट पर हैं।” 

“ओहों बेगम आप भी नाआपने तो हमारा मिज़ाज़ ही खराब कर दिया।” 

“अरेअरे मियाँ उदास क्यों होते हैंफिक्र ना कीजिये आज हम आपकी पसंद का खाना खाएंगेजो आप खाएंगे वही हम खाएंगे।” 

“लेकिन आपकी डाईट का क्या? 

“कुछ नहींअगर एक दिन डाईट नहीं करेंगे तो क्या फर्क पड जायेगालेकिन हाँ अगर आप हमसे नाराज़ हो गये तो हम मर जायेंगे।” 

“नहीं बेगम ऐसा मत बोलियेअगर आपको कुछ हो गया तो हम भी नहीं जी पायेंगे।” 

“अरेअरे ये क्या बारिश तो बंद हो गयीहमारे अरमानों को धो गयीकाश ये कुछ देर और हो जाती तो इसका क्या चला जाताकम से कम मेरे मियाँ के लबों की ये मुस्कान तो कुछ देर और बरकरार रह जाती।” 

“इस तरह से मायूस ना हो ज़ोया बेगम आपके शौहर के लबों की मुस्कान इन बारिश की बूंदों की वजह से नहीं वो तो आपकी वजह से हैं।” 

“आरिफ मियाँ अब यूँ ना तारीफ कीजिये शर्म आ जाती हैं।” 

“और आपकी ये शर्म से झुकी-झुकी सी पलकें हमें घायल कर जाती हैं।” 

“आरिफ मियाँ अगर आप घायल हो गये तो हमारा क्या होगाकिसके साथ हम बैठकर इस खूबसूरत जहाँ के बारें में गुफ्तगू करेंगे।” 

“गुफ्तगू करने का आलम तो कुछ ऐसा हैं यहाँ बेगमवक़्त गुज़रता जा रहा हैं लेकिन हमारी गुफ्तगू करने का सिलसिला थम ही नहीं रहाशायद ये थम भी जाये अगर गुफ्तगू करते हुए हमारा मन भर जाये।” 

“ना ना आरिफ मियाँ ऐसा ना बोलिये खुदा ना करे ये सिलसिला कभी थमेहमारी तो बस यही एक ख्वाहिश हैं कि कभी आप बोलते रहें, और हम आपको सुनते रहेतो कभी हम बोलते रहे, और आप हमें सुनते रहे, और ये सिलसिला यूँ ही चलता रहे।” 

“सही कह रही हो बेगम इसी गुफ्तगू का तो सहारा हैं वरना इस जहाँ में ना कोई तुम्हारा ना कोई हमारा हैं।”

“ऐसा ना बोलिये भाईजान हम मर गये हैं क्याहम हैं ना आप दोनों के अपने” इतने में ही वहाँ आरिफ की आपा हिना आ जाती हैं

“अरे आपा आप यहाँ कब आईहमे तो आपके आने का इल्म तक नहीं हुआ।” 

“अरे ज़ोया तुम भी कमाल करती हो हमारे आने का इल्म तुम्हे हो भी तो कैसेतुम तो अपने मियाँ के संग मोहब्बत कि दुनिया में तफ़रीह करने में मशगूल जो हो।” 

“आईए ना आपा तशरीफ रखिए।” 

“अरे नहीभाईजान मैं तो यहाँ आप दोनों को लेने आई हूँखाने का वक़्त हो रहा हैंघर के सभी लोग आप दोनों का इंतज़ार कर रहें हैंआईए चलिए खाना खाने चलते हैं।” ऐसे कहते हुए हिना एक हाथ से आरिफ की तो दूसरे हाथ से जोया की व्हील-चेयर खिसकाती हुई डाईनिंग टेबल की ओर ले जाने लगी।

 

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