Cancer Se Jung (Story On A Cancer Patient )
जो
नहीं मानते हार जीवन में आने वाली मुश्किलों से
झुकाता
है सिर अपना खुदा उनकी हिम्मत के आगे
"मुकुल, तुम आज रिया को स्कूल छोड़ दो, मुझे ऑफिस जाने में देर हो रही है।" अनिता ने लगभग चिल्लाते हुए कहा।
"चिल्ला
क्यों रही हो, सुनाई देता हैं मुझे, बहरा
नहीं हूँ, और वैसे भी ये कौनसी नई बात हैं, रोज़ तुम्हें ऑफिस
के लिए देर होती है और फिर में ही रिया को स्कूल छोड़ता हूँ" मुकुल ने अख़बार
एक तरफ पटकते हुए कहा।
"अरे
बाबा नाराज़ क्यों हो रहे हो, तुमने आज ऑफिस
से छुट्टी ली है तो इतना तो कर ही सकते हो" अनिता ने लगभग आग्रह करते हुए कहा।
"इतना
तो मैं रोज़ ही करता हूँ, सोचा था आज घर पर
आराम करूँगा" मुकुल ने गुस्से में कहा "अच्छा ठीक है तुम नाराज़ मत हो,
मैं ही रिया को छोड़ दूँगी, तुम अपनी छुट्टी का लुत्फ़ उठाओ और हाँ
खाना बना रखा है गरम करके खा लेना" अनिता ने मुकुल को मनाते हुए कहा।
"तुम
रहने दो मैं छोड़ दूँगा तुम्हें देर हो रही होगी" मुकुल के कहते ही,
"ठीक हैं आज तुम छोड़ दो, फिर कल से मैं ले जाया करूँगी,
वादा, अब थोड़ा मुस्कुरा भी दो" यह कह
अनिता मुकुल की तरफ देखे बगैर ही तुरन्त ऑफिस के लिए निकल गयी।
"रिया,
चलो बेटा स्कूल के लिए देर हो रही है" मुकुल ने आवाज़ लगाई।
"आती
हूँ पापा बस पाँच मिनट और" रिया के कहते ही,
"तुम अब छोटी बच्ची नहीं हो रिया, चौदह साल की हो रही
हो, अपनी ज़िम्मेदारी समझाना सीखो थोड़ा जल्दी उठकर तैयार हो
जाया करो" मुकुल आज बहुत गुस्से में था।
"सॉरी-सॉरी
पापा,
चलिए, मैं तैयार हूँ" कहते हुए रिया अपना
बैग उठाकर घर से बाहर की ओर निकल गयी, और मुकुल रिया को
स्कूल छोड़कर घर वापिस आया और टीवी चला कर बैठ गया ।
ट्रिन-ट्रिन- फोन की घंटी बजते ही मुकुल झल्ला
गया,
"क्या मुसीबत है, शान्ति से बैठकर एक
फिल्म भी नहीं देखने देते, हैलो! किससे बात करनी है?" मुकुल
ने पूछा।
"आप
मुकुल बोल रहे है?" दूसरी और किसी
अपरिचित की आवाज थी
"हाँ
लेकिन मैंने आपको पहचाना नहीं"
"जी मैं
करण बोल रहा हूँ, अनिता जी के ऑफिस
से"
"कहिए क्या काम है?"
"मुकुल जी आज आपकी पत्नी अनिता अचानक चक्कर आने की वजह से ऑफिस के बाथरूम
में गिर गई"
"क्या, अब वो कैसी है? " मुकुल
ने घबराकर पूछा।
"जी वो
हमारे स्टाफ के एक सदस्य अनिता जी को पास के सरकारी अस्पताल में लेकर गए हैं,
आप भी तुरन्त वहीं पहुँच जाइए।"
"हाँ-हाँ
बस मैं अभी पहुँचता हूँ " मुकुल ने गाड़ी निकाली और तुरन्त अस्पताल की ओर
रवाना हो गया। पूरे रास्ते उसके दिल में अजीब-अजीब से ख्याल आ रहे थे,
जैसे-तैसे कर के वो अस्पताल
पहुँचा।
रिसेप्शन पर,
"माफ कीजिएगा, अभी कुछ वक्त पहले यहाँ एक
महिला को लाया गया था जिनका नाम अनिता हैं, आप बता सकती हैं वो
कहा हैं?"
"जी आप ?"
"मैं उनका पति हूँ।" मुकुल के चेहरे पर घबराहट के भाव थे।
"जी वो
डॉक्टर के कमरे में है, आप वहाँ जा सकते हैं।"
"आपका
बहुत-बहुत धन्यवाद" ऐसा कहकर मुकुल डॉक्टर के कमरे की ओर चला गया।
"क्या
मैं अन्दर आ सकता हूँ?" मुकुल ने पूछा।
"आप कौन
?"
"जी ये
मेरे पति है, मुकुल" अनिता ने तुरन्त जवाब
दिया।
"ओह,
आइये बैठिए"
"डॉक्टर साहब क्या हुआ है अनिता को, कोई घबराने वाली
बात तो नहीं है ना?"
"देखिए
मुकुल जी मैंने कुछ टेस्ट करे हैं , उनकी
रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है , अभी आप इनको
घर लेकर जा सकते है।"
कुछ दिनों बाद,
"मुकुल तुम्हें याद है ना, आज मेरी टेस्ट की रिपोर्ट
लानी हैं" अनिता के कहते ही,
"हाँ याद हैं बाबा, तुम बेकार में ही चिन्ता कर रही
हो कुछ नहीं हुआ हैं तुम्हें, अरे भई, अगर
कुछ खाओगी पिओगी नहीं तो चक्कर तो आएगा ही ना और रही टेस्ट की बात वो तो डाक्टर
अपने मरीजों को खुश करने के लिए लिख देते हैं, नहीं तो मरीज
कहते हैं, ये लो जी डॉक्टर साहब तो बिल्कुल अच्छा इलाज नहीं
करते" मुकुल ने यह सब कह तो दिया लेकिन उसके चेहरे पर घबराहट थी।
"चिन्ता
मैं नहीं तुम कर रहे हो, मैं जानती हूँ मुझे
कुछ नहीं हुआ है , अभी तो जिन्दगी में बहुत कुछ करना हैं,
रिया की परवरिश, उसकी पढ़ाई, शादी, वैसे भी मैं इतनी आसानी से तुम्हारा पीछा
छोड़ने वाली नही हूँ" अनिता ने मुस्कुराकर कहा।
"सही कह
रही हो,
भगवान करे रिपोर्ट बिल्कुल नार्मल आए" मुकुल के चेहरे पर भी
मुस्कान आ गयी......"रिया कहाँ हैं?" मुकुल ने
पूछा,
"वो सो रही है आज उसके स्कूल की छुट्टी़ है" अनिता बोली।
"अच्छा
ठीक है,
मैं निकलता हूँ ऑफिस से वापिस आते वक्त तुम्हारी रिपोर्ट ले
आऊँगा" ऐसा कह मुकुल घर से निकल गया।
शाम का वक़्त
था,
अनिता रात के खाने की तैयारी कर रही थी, दरवाज़े
की घंटी बजी, "आती हूँ" ऐसा कह अनिता ने दरवाज़ा
खोला……"अरे मुकुल तुम आ गए, आज
बड़ी देर कर दी आने में, थक गए होंगे, चाय
बना दूँ?" अनिता के पूछने पर मुकुल ने कोई जवाब नहीं
दिया...... "क्या हुआ सब ठीक तो है, तुम आज मेरी
रिपोर्ट लाने वाले थे क्या हुआ?" अनिता ने पूछा।
"वो मैं भूल गया, कल ले आँउगा, मेरे
सिर में दर्द हो रहा है मैं सोने जा रहा हूँ" मुकुल ने नजरें चुराते हुए कहा।
"लेकिन
खाना तो खा लो" अनिता के स्वर में आग्रह था।
"नहीं
भूख नहीं है" ऐसा कह मुकुल अपने कमरे में चला गया।
कुछ देर बाद,
"क्या हुआ, इतना परेशान क्यों हो,
ऑफिस में कुछ हुआ है क्या?" अनिता ने
पूछा।
"नहीं
ऐसी कोई बात नही है" मुकुल ने दूसरी ओर करवट बदलते हुए कहा। अनिता समझ चुकी
थी कुछ ना कुछ बात ज़रूर हुई है।
"चलो अभी सोने देती हूँ, सुबह पूछूँगी क्या हुआ
है" अनिता बड़बड़ाते हुए सो गयी।
सुबह का वक्त
था,
मुकुल नहा रहा था और अनिता मुकुल का ऑफिस ले जाने का सामान इकट्ठा
कर रही थी, "रात को तो कुछ नही बताया लेकिन अब जरूर पूछूँगी" अनिता ने
बड़बड़ाते हुए कहा, इतने में ही मुकुल के फोन की घंटी बजी, "ये
किसका नम्बर है? चलो मैं ही बात कर लेती हूँ" अनिता फोन
उठाकर कुछ बोलती उससे पहले ही दूसरी ओर से आवाज आयी,
"मुकुल तुम आज ही अनिता को कीमोथैरपी के लिए लेकर आ जाना, हम अब ज्यादा देर नहीं कर सकते" और फोन कट जाता है, अनिता धड़ाम से
पास रखी कुर्सी पर लगभग गिर सी गई, इतने में मुकुल बाथरूम से
बाहर आ जाता है।
"क्या
हुआ,
ऐसे क्यों बैठी हो, किसका फ़ोन था?"
मुकुल ने घबराकर पूछा।
"पता
नहीं,
लेकिन कह रहे थे अनिता को आज ही कीमोथैरेपी के लिए ले आना, मुकुल सच-सच बताना मुझे क्या हुआ हैं?" अनिता
के पूछने पर मुकुल उससे नजरे चुराने लगा,
"मुकुल तुम्हें मेरी कसम, बताओ क्या हुआ है
मुझे"
"ब्लड कैंसर" मुकुल के कहते ही कमरे में सन्नाटा छा गया और दोनों के
ही आँखों से आँसू बह रहे थे।
"लेकिन
मुकुल ऐसा कैसे हो सकता हैं, ज़रूर डॉक्टर को
कोई गलतफहमी हुई है, मैं बिल्कुल ठीक हूँ" अनिता ने
रोते हुए कहा।
"हाँ
मैं जानता हूँ, तुम ठीक कह रही हो ज़रूर डॉक्टर से ही कुछ गलती हुई है तुम चिंता मत
करो हम किसी दूसरे बड़े डॉक्टर के पास जायेंगे, सब
ठीक ही होगा" मुकुल ने कह तो दिया पर चिंता के भाव दोनों के ही चेहरे पर साफ़
दिख रहे थे।
किसी दूसरे
अस्पताल में मुकुल और अनिता डॉक्टर अवस्थी के केबिन के बाहर बैठे अपनी बारी का
इंतज़ार कर रहे थे। दोनों ही चिंतित थे, इतने
में केबिन से आवाज़ आई, ''अनिता'', आवाज़
सुनते ही दोनो तुरन्त डॉक्टर के कमरे में चले गए। "बैठिये, कहिये क्या तक़लीफ़ है" डॉक्टर के पूछते ही मुकुल ने अनिता की सारी
रिपोर्ट्स सामने टेबल पर रख दी, काफ़ी समय तक कमरे में
सन्नाटा बना रहा।
मुकुल चुप्पी
तोड़ते हुए, "आप कुछ बोल क्यों नहीं रहे
हैं डाक्टर साहब" मुकुल ने पूछा।
"देखिये
मुकुल जी,
मुझे लगता हैं आपको दुबारा अपनी पत्नी के सारे टेस्ट करवाने चाहिए,
उसके बाद ही मैं किसी नतीजे पर पहुँच पाऊँगा" डाक्टर ने अपनी
राय दी।
"ठीक है
टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद आपसे मिलते हैं" ऐसा कह मुकुल और अनिता अस्पताल
से बाहर आ गए।
गाड़ी में,
"मुकुल, मुझे बहुत घबराहट हो रही है"
अनिता ने कहा।
"तुम
चिन्ता मत करो, सब ठीक ही होगा, मुझे पूरा विश्वास है कि तुम्हें कुछ नहीं हुआ है" मुकुल ने कह तो
दिया लेकिन घबराहट उसे भी हो रही थी।
दो दिन बाद
अनिता की रिपोर्ट आने वाली थी, ये दो दिन कैसे
बीते ये मुकुल और अनिता से बेहतर कोई नही समझ सकता था।
डॉक्टर
अवस्थी के केबिन में, "माफ़ कीजिये
मुकुल जी आपकी पत्नी की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है और मुझे लगता है अब हमे जल्द से
जल्द इलाज़ शुरू कर देना चाहिए" डॉक्टर ने अपनी राय दी।
"लेकिन
डॉक्टर साहब ऐसा कैसे हो सकता हैं" ऐसा बोलते ही अनिता के आँखों से आँसू छलक
गए।
"देखिए
अनिता जी दो बार टेस्ट करवाए हैं और दोनों ही बार रिपोर्ट एक जैसी आयी है,
मेरा तो यही मशवरा है आप कल से ही कीमोथैरेपी के लिए आ जाये" डॉक्टर
के अपनी बात खत्म करते ही मुकुल उठ कर खड़ा हो गया,
"जी डॉक्टर साहब अभी हम चलते हैं, मैं कल अनिता को
लेकर आ जाऊँगा" ऐसा कह मुकुल और अनिता केबिन से बाहर आ गए ।
घर का
वातावरण बहुत ही गमगीन हो चुका था, "मम्मी-पापा, क्या हुआ है, आप
दोनों इतने उदास क्यों हो, कुछ हुआ है क्या?" रिया की आवाज़ सुन अनिता चौंक गयी,
"नहीं ऐसी कोई बात नही है" अनिता के शब्द लड़खड़ा रहे थे, रिया को कुछ अज़ीब सा लगा लेकिन उसने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और वो
बाहर खेलने चली गई। रिया ने पहली बार घर का ऐसा वातावरण देखा था, उसे जानने की उत्सुकता थी कि आखिरकार हुआ क्या है इसलिए उसका मन खेलने में
नहीं लगा और जल्दी ही घर वापिस आ गयी।
"पापा बताओ ना क्या हुआ है आप और मम्मी इतना परेशान क्यों हो" रिया ज़िद
करने लगी। "कुछ नही हुआ है तुम जाकर अपना काम करो" मुकुल के स्वर में
चिड़चिड़ाहट थी, और उसका चिड़चिड़ापन देख रिया वहाँ से चुपचाप अपने कमरे में चली गयी।
"मुकुल,
मुझे लगता है हमे रिया को सब कुछ बता देना चाहिए, वो अब इतनी छोटी
भी नहीं है" अनिता की बात सुनकर मुकुल कुछ सोच में पड़ गया, फिर बोला,
"ठीक है तुम कहती हो तो बता देते हैं, रिया ज़रा बाहर
आना तुमसे कुछ बात करनी है" मुकुल ने आवाज़ लगायी। रिया तुरन्त मुकुल के पास
आकर बैठ गयी।
"कहिये पापा क्या बात है?" रिया ने पूछा और फिर
मुकुल ने रिया को सारी सच्चाई बता दी। रिया कुछ बाते समझ पाई और कुछ नहीं, लेकिन उसको इतना समझ में आ गया कि उसकी मम्मी बहुत बीमार है और अब उसको
उनका ख्याल रखना है। रिया को ब्लड कैंसर के बारे में जानने की उत्सुकता होने लगी
लेकिन समझ नहीं आ रहा था की किससे पूछे, इसी दौरान उसको
मुकुल की कही हुई एक बात याद आयी।
"रिया अब तुम कम्प्यूटर चलाना सीख गयी हो इसमें सारे सवालों के जवाब मिल
जाते हैं अगर कुछ समझ ना आये तो उसका जवाब गूगल में ढूँढ सकती हो।" फिर क्या
था, रिया ने तुरन्त कम्प्यूटर चलाया और ब्लड कैंसर के बारे
में जानकारी निकालनी शुरू कर दी, कहने को तो रिया चौदह साल
की थी लेकिन लग ऐसा रहा था कि वो अपनी उम्र से बहुत बड़ी हो गयी है।
अगले दिन, "रिया मैं तुम्हारी मम्मी को लेकर अस्पताल जा रहा हूँ, तुम घर का ख्याल रखना" मुकुल ने आवाज़ लगाई।
"जी
पापा,
आप मेरी चिंता ना करे मैं सब संभाल लूँगी" दोनों के जाते ही
रिया फिर कम्प्यूटर चला कर बैठ गयी, बहुत देर तक छानबीन करने
के बाद रिया को समझ आया कि उसको डॉक्टर से मिलना होगा लेकिन मैं तो अभी छोटी हूँ,
क्या डॉक्टर साहब मेरी बात सुनेगे, कोई बात
नहीं मैं कोशिश ज़रूर करुँगी, रिया बड़बड़ाने लगी। इतने में
दरवाज़े की घंटी बज़ी, रिया ने जैसे ही दरवाज़ा खोला मुकुल
अनिता को पकड़कर अन्दर ला रहा था......"क्या हुआ
पापा" रिया ने पूछा।
"कुछ
नहीं,
आज तुम्हारी मम्मी की पहली कीमोथैरपी हुई है ना इसलिए तबियत ख़राब है,
तुम चिंता मत करो सब ठीक हो जायेगा" ऐसा कहकर मुकुल अनिता को
कमरे में ले गया, लेकिन रिया का मन ही मन डॉक्टर से मिलने का
फ़ैसला पक्का हो चुका था।
अगले दिन
अस्पताल के रिसेप्शन पर, "आंटी, मुझे डाक्टर अवस्थी से मिलना हैं" रिया ने कहा।
"बेटा आप किसके साथ आए हो,
आपके पापा-मम्मी कहाँ हैं" रिसेप्शन पर खड़ी हुई लड़की ने रिया
से मुस्कुरा कर पूछा।
"मेरे
साथ कोई नहीं है लेकिन मुझे डॉक्टर साहब से कुछ जरूरी बात करनी है।" रिया ने
जवाब दिया।
"बेटा
वो बच्चो के डॉक्टर नही है" रिसेप्शन पर खड़ी हुई लडकी के कहते ही,
"हाँ मैं जानती हूँ, प्लीज आप मिलने दीजिए" रिसेप्शनिस्ट ने डॉक्टर के
केबिन में कुछ बात की और फिर रिया को अन्दर जाने के लिए कह दिया।
"आपका
नाम क्या है बेटा और आप मुझसे क्यों मिलना चाहती हो" डॉक्टर अवस्थी के चेहरे
पर मुस्कान थी।
"अंकल
मेरा नाम रिया है, आप के पास मेरी मम्मी
इलाज करवाने आती है, उनका नाम अनिता है उन्हें ब्लड कैंसर हुआ है" रिया ने
अपना परिचय दिया।
"ओह तो
तुम मुकुल और अनिता की बेटी हो, बोलो बेटा क्या
बात करनी है"
"अंकल
मैं चाहती हूँ मम्मी को बोन-मेरो डोनेट करुँ।"
"लेकिन आपको यह सब कैसे पता, आप तो अभी बहुत छोटे हो" डॉक्टर अवस्थी नेआश्चर्यचकित
होकर पूछा
"इंटरनेट
से पता किया था" रिया ने जवाब दिया।
"रिया
बेटा आप अभी इन सब बातों के लिए बहुत छोटे हो, हमने आपके पापा से इस बारे में बात
की है,
जैसे ही हमे डोनर मिलेगा हम आपकी मम्मी का इलाज़ शुरू कर देंगे,
अभी आप घर जाओ आपके पापा-मम्मी चिंता कर रहे होंगे" डॉक्टर की
बात सुनकर रिया ने पूछा,
"मेरी मम्मी ठीक तो हो जाएँगी ना"
"हाँ बेटा आपकी मम्मी बिल्कुल ठीक हो जाएगी, वैसे भी जिसकी आपके जैसी बेटी
हो उसे तो ठीक होना ही पड़ेगा" डॉक्टर की बात सुन रिया को थोड़ी तसल्ली हुई और
वो डॉक्टर अवस्थी का धन्यवाद कर केबिन से बाहर आ गयी। लेकिन डॉक्टर अवस्थी सोचने
पर मज़बूर हो गए क्या वाकई में आजकल के बच्चे इतने होशियार होते हैं, रिया के जाते ही डॉक्टर अवस्थी के फ़ोन की घंटी बजती है....."हैलो मैं डॉक्टर अवस्थी बोल रहा हूँ"
दूसरी ओर से,
"आपने जिस मरीज़ के बारे में बात की थी उसके लिए बोन-मेरो डोनर
मिल गया हैं"
''ओहो
यह तो बहुत ही अच्छी खबर हैं, तुम उसको लेकर तुरन्त अस्पताल
आ जाओ मैं भी मुकुल से बात कर लेता हूँ" डॉक्टर अवस्थी के चेहरे पर मुस्कान
थी।
कुछ देर बाद,
डॉक्टर अवस्थी के केबिन में डॉक्टर अवस्थी, मुकुल
व अनिता बैठे हुए हैं, "मुकुल क्या आप जानते हैं आज यहाँ आपकी बेटी आई थी,
कह रही थी वो अपनी मम्मी को बोन-मेरो डोनेट करना चाहती है" डॉक्टर
ने मुकुल को रिया के बारे में बताया।
"नहीं
डॉक्टर साहब वो तो अभी बहुत छोटी है, यहाँ कैसे आ सकती है" मुकुल के स्वर में
आश्चर्य था।
"मुकुल
जी यक़ीन करिये वो आपकी बेटी ही थी और वो अनिता जी को लेकर चिंतित भी थी बहुत
किस्मतवालों को ऐसी औलाद मिलती है" डॉक्टर की बात सुन मुकुल और अनिता को यकीन
ही नहीं हो रहा था......अनिता की ओर देखते हुए, "अनिता जी अब आपको अपनी बेटी के लिए जल्द से जल्द ठीक होना पड़ेगा, अब तो आपका डोनर भी मिल गया, आपकी किस्मत अच्छी है,
नहीं तो लोगों की पूरी ज़िन्दगी खत्म हो जाती है लेकिन उनको डोनर
नहीं मिलते, लगता है हमे दोनों के ही सारे टेस्ट कर जल्दी ही
ऑपरेशन कर देना चाहिए अब इस काम में देरी नहीं होनी चाहिए, आप
कल ही अस्पताल में भर्ती हो जाइए" डॉक्टर साहब ने अनिता की तरफ देखते हुए कहा।
मुकुल और अनिता घर पहुँचते हैं,
"रिया इधर आना बेटा, आपसे एक ज़रूरी बात
करनी है" मुकुल ने आवाज़ लगायी।
"आती
हूँ पापा,
कहिये क्या बात करनी है आपको, और आप अभी मम्मी को लेकर डॉक्टर अंकल
के पास गए थे ना, क्या हुआ वहाँ पर" रिया जैसे सब कुछ जानना चाहती थी।
"मैं
आपके सारे सवालों का जवाब दूँगा, पहले आप बताओ आप
आज डॉक्टर अवस्थी से मिलने गए थे" मुकुल ने रिया से पूछा।
"हाँ,
माफ कर दीजिये पापा, मैं आपसे पूछे बगैर चली
गयी, लेकिन मुझे मम्मी की बहुत चिंता हो रही है" रिया
ने डरते हुए कहा।
"रिया
हम तुमसे नाराज़ नहीं है, बल्कि बहुत खुश है कि भगवान ने हमें इतनी अच्छी बेटी दी
है,
हमें डॉक्टर अवस्थी ने सबकुछ बता दिया है और हमें तुम पर बहुत गर्व
है।" ये स्वर अनिता के थे, रिया ने जब अनिता की ओर देखा तो दोनों की ही आँखे
भर आयी।
"अरे,
अरे खुशी के मौके पर ये आँसू, ये तो नाइंसाफी
है" मुकुल ने मजाक किया।
"खुशी
का मौका ! मैं समझी नहीं पापा आप क्या कहना चाहते है" रिया ने पूछा।
"बेटा
वो अभी हमें डॉक्टर अवस्थी ने मिलने के लिए बुलाया था जानती हो क्यों?"
मुकुल के स्वर में खुशी थी।
"बताइये
ना पापा क्या बात है" रिया की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी।
"रिया
तुम्हारी मम्मी के लिए डोनर मिल गया है और कल ही तुम्हारी मम्मी को अस्पताल में
भर्ती होना होगा"
"अरे
वाह ! अब मेरी मम्मी बिल्कुल ठीक हो जाएगी, भगवान
जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद" ऐसा कह रिया अनिता के गले लग गई।
अस्पताल में
डॉक्टर अवस्थी के केबिन में, "नर्स तुम
अनिता जी को वार्ड में लेकर जाओ, हम आज से ही इनके टेस्ट
करने शुरू कर देंगे" डॉक्टर अवस्थी ने नर्स को आदेश दिया।
"डॉक्टर
साहब ऑपरेशन कब होगा ?" मुकुल ने पूछा।
"मुकुल
जी,
अभी तो अनिता व डोनर दोनों के सभी टेस्ट किए जाएगें उनकी रिपोर्ट
आएगी , उसके बाद ही ऑपरेशन किया जायेगा, अंदाज़े से अगले हफ्ते" डॉक्टर अवस्थी ने कहा।
"ओह!"
"सब्र करो मुकुल, सबकुछ अच्छा ही होगा" डॉक्टर
ने मुकुल को तसल्ली देते हुए कहा। और धीरे-धीरे करके एक हफ्ता भी गुजर गया और वो
दिन भी आ गया जब अनिता का ऑपरेशन होना था।
"मुकुल, रिया नहीं आई?" स्ट्रेचर
पर लेटी हुई अनिता ने पूछा।
"मम्मी
मैं यहाँ हूँ, ऐसा हो सकता है क्या आपका इतना
बड़ा दिन और मैं ही आपके साथ ना हूँ" रिया ने मुस्कुराकर कहाँ। इसी दौरान
अनिता को ऑपरेशन थियेटर ले जाया जा रहा था, मुकुल और रिया ने
अनिता को मुस्कुराकर ऑपरेशन के लिए भेजा।
"मुकुल,
ऊपरवाले पर विश्वास कीजिए, आपकी पत्नी बिल्कुल
ठीक हो जाएगी" पीछे से डॉक्टर अवस्थी की आवाज आयी।
"डॉक्टर
साहब हमारे लिए तो आप ही भगवान है।" मुकुल की बात सुन डॉक्टर अवस्थी ने धीरे
से मुकुल का हाथ अपने हाथ में लेकर ऐसे दबा दिया जैसे सबकुछ ठीक होने का विश्वास
दिला रहे हो और तुरन्त ऑपरेशन थियेटर के अन्दर चले गए।
ऑपरेशन कई
घंटो तक चला लेकिन इन घंटो में गुजरने वाला एक-एक पल सदियों के बराबर लग रहा था,
इतने में ही ऑपरेशन थिएटर का दरवाज़ा खुला और डॉक्टर अवस्थी बाहर आए।
उनके बाहर आते ही, "डॉक्टर साहब अनिता कैसी है?" मुकुल
ने लगभग रुआंसे होते हुए पूछा।
"बहुत
अच्छी ऑपरेशन सफल रहा" ऐसा सुनते ही मुकुल डॉक्टर अवस्थी के पैरों में गिर
उनका धन्यवाद करने लगा लेकिन उन्होंने उसे उठाकर गले से लगा लिया,
दूसरी और अनिता को ऑपरेशन थिएटर से बाहर लाया जा रहा था और रिया
स्ट्रेचर के पीछे -पीछे मम्मी-मम्मी कहती हुई जा रही थी।
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