Anmol Hai Dosti (Story On Friendship)



चलना बेफ़िक्र ज़िन्दगी की राहों में ऐ मेरे दोस्त,

थाम लूंगा मुश्किल राहों में तेरा हाथ ऐ मेरे दोस्त

 

"आरती, मैं आज कम्पनी से लौटते वक़्त वरुण से मिलता हुआ आऊँगा।" अमित ने आरती से जैसे ही कहा,

"क्यों क्या हुआ सब ठीक तो हैं?" आरती ने सवालिया नज़रों से देखते हुए अमित से पूछा। "हाँ-हाँ सब ठीक हैं, वो तो कई दिनों से वरुण से बात नहीं हो पायी तो सोचा एक बार मिलकर आ जाता हूँ।" अमित ने आरती को आश्वस्त किया करते हुए कहा,

 "अच्छा ठीक हैं मिल आना, लेकिन ऐसे ही खाली हाथ मत चले जाना, बच्चों के लिए फल और मिठाई ज़रूर लेकर जाना बच्चे खुश हो जाएँगे।" आरती के कहते ही,

"हाँ यह ठीक हैं, अच्छा हुआ तुमने बता दिया नहीं तो मैं खाली हाथ ही चला जाता" अमित ने आरती की आँखों में प्यार से देखते हुए कहा,

"मार लिया ताना, अब निकलो यहाँ से, मुझे भी घर के काम खत्म करके स्कूल के लिए निकलना हैं।" (आरती पास के ही एक स्कूल में टीचर हैं) आरती ने नाराज़ होने का नाटक करते हुए कहा, और अमित के कम्पनी के लिए निकलते ही आरती अपने काम पर लग गई।

शाम के वक़्त वरुण के घर की घंटी बजती हैं, "निशा देखना दरवाज़े पर कौन है।" वरुण ने निशा को आवाज़ लगाकर कहा,

"हाँ देखती हूँ" ऐसा कह जैसे ही निशा दरवाज़ा खोलती हैं सामने अमित खड़ा होता है, "अरे, अमित भैया आप ! "

"हाँ भाभी, मैं क्या करता, जब आपका पति मेरा फ़ोन ही नहीं उठायेगा तो मुझे यही मिलने आना पड़ेगा ना, अब बताइये कहाँ हैं वरुण, देखता हूँ आज मुझसे कैसे बचता हैं।" अमित ने निशा के हाथ में फल व मिठाई देते हुए कहा,

"निशा कौन आया हैं?" वरुण ने आवाज़ लगाकर जैसे ही निशा से पूछा,

"भाभी से क्या पूछता हैं, बाहर आ, मैं बताता हूँ कौन आया हैं।" अमित की आवाज़ सुनते ही, "अरे भाई तू, आ बैठ और बता कैसा हैं।" वरुण ने अमित से पूछा,

"मैं तो ठीक हूँ लेकिन मुझे लगता हैं तू कुछ ठीक नहीं हैं, इसीलिए तो चेहरा बुझा-बुझा सा लग रहा हैं, तेरी तबियत तो ठीक हैं ना और तू मेरा फ़ोन भी नहीं उठा रहा था सब ठीक तो हैं ना" अमित के माथे पर चिंता की लकीरे थी,

"ऐसा कुछ नहीं हैं, तू बेकार ही इतनी चिंता कर रहा हैं, वो तो आजकल कम्पनी में काम ज्यादा होने की वजह से थकान हो जाती हैं और इसीलिए मैं तेरा फ़ोन नहीं उठा पाया" वरुण ने अपने चहरे पर मुस्कुराहट लाते हुए कहा,

"तू सच बोल रहा हैं ना" अमित ने पूछा, और उसी वक़्त निशा चाय और नाश्ता लेकर आ गयी……"आप बताइए भाभी, यह तो कुछ नहीं बोलेगा" अमित ने निशा से पूछा,

"अगर तू मेरा जवाब सुनने से पहले ही मेरी बीवी से पूछ लेगा तो मैं क्या करूँगा, विश्वास कर अमित यहाँ सब ठीक हैं, अच्छा निशा एक बार तुम भी बोल दो सब ठीक हैं नहीं तो इसे लगेगा मैं झूठ बोल रहा हूँ।" वरुण ने निशा की ओर देखते हुए कहा,

"ताना क्यों मार रहा हैं, वो तो मुझे तेरी चिंता हो रही थी इसलिए कह दिया" अमित ने थोड़ा नाराज़ होते हुए कहा।

"अब इतना गुस्सा मत कर, चाय-नाश्ता कर और बता घर में सब कैसे हैं और भाभी को साथ क्यों नहीं लाया" वरुण ने अमित से पूछा और तीनों ही इधर-उधर की बातें करने लगे, वक़्त कैसे गुज़र गया पता ही नहीं चला।

"9 बज गए !  पता नहीं चला, अब मैं चलता हूँ आरती इंतज़ार कर रही होगी।" अमित ने सोफे से उठते हुए कहा,

"अच्छा ठीक हैं लेकिन अगली बार जब भी आये भाभी को ज़रूर साथ लाना" वरुण ने कहा और दोनों दोस्त गले मिले,

"ज़रूर लाऊँगा" ऐसा कह अमित अपने घर के लिए रवाना हो गया।

 "निशा मुझे लगता हैं अब हम ज्यादा दिनों तक अमित से सच नहीं छुपा पायेंगे, मुझे तो लगता हैं उसे आज ही शक हो गया होगा" अमित के जाते ही वरुण ने निशा से कहा।  

"आपको ऐसा क्यों लग रहा हैं, हो सकता हैं अमित भैया को हमारी परेशानी का एहसास ही ना हुआ हो" निशा ने अपनी बात कही,

"नहीं निशा मैं उसे अच्छी तरह से जानता हूँ, बल्कि हम दोनों दोस्त बिन कहे ही एक-दूसरे के मन की बात समझ जाया करते थे, इसीलिए कह रहा हूँ अमित को ज़रूर हमारी परेशानी का शक हुआ हैं।"

दूसरी ओर अमित के घर, "आरती पता नहीं क्यों ऐसा लग रहा हैं जैसे कि वरुण को कोई तकलीफ हैं और वो मुझसे छुपाने की कोशिश कर रहा हैं" अमित ने आरती से कहा,

"आपको ऐसा क्यों लग रहा हैं, उन्होंने कुछ कहा क्या" आरती ने पूछा,

"कुछ नहीं कहा इसी बात का तो दुःख हैं।" अमित के स्वर में चिंता थी,

"आप भी बेकार ही चिंता करते हैं, हो सकता हैं आपको वहम हुआ हो" आरती ने कहा,

"नहीं यह मेरा वहम नहीं हैं, और मैं पता लगाकर ही रहूँगा की बात क्या हैं" अमित के ऐसा कहते ही

"अच्छा बाबा पता लगा लेना लेकिन अब सो जाइए रात बहुत हो गयी हैं सुबह काम पर भी जाना हैं।" आरती ने कहा और दोनों सो गए।

"निशा सामान बाँधना शुरू कर दो, हम यह शहर छोड़ कर जा रहे हैं।" वरुण के कहते ही, "क्या !  अचानक से ये आपको क्या सूझी, और बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा?" निशा ने वरुण की ओर सवालिया नज़रों से देखते हुए पूछा,

"उसकी चिंता मत करो हम लोग दिल्ली जाएँगे, वहाँ बच्चों का एडमिशन नए स्कूल में करवा लेंगे और मैं भी कोई नयी नौकरी ढूँढ लूँगा, लेकिन बस इस शहर में नहीं रहना चाहता।" वरुण ने उदास होते हुए कहा,

"आप फ़िक्र मत करिए सब ठीक हो जायेगा, मैं आपके साथ हूँ।" ऐसा कह निशा ने वरुण का हाथ अपने हाथ में ले लिया।

दूसरी ओर अमित के दिमाग में बस यही चल रहा था कि आखिरकार वरुण को परेशानी क्या हो सकती हैं, उसका किसी काम में मन ही नहीं लग रहा था, "आरती क्यों न आज शाम को हम दोनों वरुण के घर मिलने चले, मैं पता भी लगा लूँगा कि उसे क्या तकलीफ हैं।" अमित ने आरती को कम्पनी से फ़ोन करके कहा,

"मैं समझ सकती हूँ आपकी हालत लेकिन आप कल ही तो वहाँ गए थे दो-तीन दिन रुक जाइये फिर चलेंगे, बार-बार जायेंगे तो निशा को बुरा लग सकता हैं" आरती के ऐसा कहते ही,

"शायद तुम सही कह रही हो, ऐसा करते हैं इतवार को चलते हैं, अच्छा ठीक है मैं अभी फ़ोन रखता हूँ।" ऐसा कह दोनों ने ही फ़ोन रख दिया और आरती भी अपने काम निबटाने में लग गयी।

इतवार के दिन, "अरे! यह क्या यहाँ तो ताला लगा हुआ हैं, वरुण कहाँ गया होगा?" अमित के चहेरे पर आश्चर्य के भाव थे,

"ओहो, आप भी ना, आज छुट्टी है, हो सकता हैं परिवार के साथ कहीं घूमने निकल गए हो।" आरती ने कहा,

"भाई साहब किससे मिलना हैं?" इतने में ही पीछे से एक आवाज़ आई,

"यहाँ मेरा दोस्त रहता हैं, उससे मिलने आए हैं, हो सकता हैं अपने परिवार के साथ कहीं घूमने निकल गया हो।" अमित ने अजनबी आदमी से कहा,

"आप वरुण की बात कर रहे हैं? " उस आदमी ने पूछा,

"जी" अमित के कहते ही,

"जी वो तो कल ही मेरठ छोड़ कर कहीं ओर चले गए।" उस आदमी ने बताया,

"क्या!  लेकिन कहाँ गया है, उसने आपसे कुछ कहा?" अमित ने पूछा,

"नहीं, कुछ नहीं बताया बस इतना ही कहा कि किसी दूसरे शहर में रहने जा रहे हैं, दरअसल जिस कम्पनी में वरुण काम करते थे उस कम्पनी को काफी घाटा हुआ हैं, पता चला हैं कि उस कम्पनी के मालिक ने अपने बहुत सारे कर्मचारियों को काम से भी निकाल दिया हैं, हो सकता हैं वरुण के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ हो।" ऐसा कह वो आदमी चला गया, एवं अमित और आरती ने एक दूसरे की ओर देखा लेकिन बिना कुछ बात किए अपने घर के लिए निकल गए।

कार में , "मेरे तो समझ में ही नहीं आ रहा आख़िरकार वरुण गया कहाँ होगा, अगर उसका पड़ोसी सच भी कह रहा हैं तो उसने इतनी बड़ी बात मुझसे क्यों छुपाई।" अमित ने कहा , "ज़रूर उन्होंने सोचा होगा कि आप चिंतित हो जायेंगे, इसीलिए नहीं बताया होगा" आरती ने अमित को समझाते हुए कहा, लेकिन अमित ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया और कार में अंत तक चुप्पी छायी रही, और अमित के चेहरे पर गहरे चिन्ता के भाव दिख रहे थे। कुछ ही देर में अमित और आरती घर वापिस लौट आये।   

अमित वरुण के मोबाइल पर फ़ोन करता हैं, ट्रिन-ट्रिन "निशा देखना किसका फ़ोन हैं मेरे मोबाइल पर, मैं कुछ काम कर रहा हूँ।" वरुण ने निशा को आवाज़ लगाकर कहा,

"अमित भैया का फ़ोन हैं" निशा ने कहा,

"काट दो और फिर स्विच-ऑफ करके रख दो" वरुण ने कहा, लेकिन निशा ने वरुण की बात नहीं मानी और फ़ोन उठा लिया,

"हैलो, भैया मैं निशा बोल रही हूँ, कैसे हैं आप?" निशा ने अमित से पूछा,

"भाभी मैं ठीक हूँ लेकिन आप लोग कहाँ हैं? हम आपके घर गए थे तो आपके पड़ोसी से पता चला की आपने यह शहर छोड़ दिया हैं।" अमित ने निशा से पूछा,

"हाँ भैया, हम दिल्ली आ गए हैं।" निशा ने कहा,

"लेकिन ऐसा क्या हो गया भाभी, आपका पड़ोसी कम्पनी में घाटे की बात बता रहा था, क्या वो सच हैं?" अमित ने पूछा,

"हाँ भैया, यह सच हैं, वरुण आपको परेशान नहीं करना चाहते इसलिए आपको कुछ नहीं बताया, दरअसल वरुण जिस कम्पनी में काम करते थे उस कम्पनी को बहुत बड़ा घाटा हो गया, इसलिए उसने आधे से ज्यादा कर्मचारियों को काम से निकाल दिया हैं, लेकिन भैया आप वरुण को मत बताना कि मैनें आपको कुछ बताया हैं, नहीं तो वो मुझसे नाराज़ हो जाएगा।" निशा ने अमित से आग्रह किया,

"आप चिंता मत करिए भाभी, आप तो बस अपना वहाँ का पता मुझे भेज दीजिए मैं वहाँ आ रहा हूँ, बस आप तो वरुण को कुछ मत बताना।" अमित ने कहा,

"जी भैया, मैं कुछ नहीं बताऊँगी" निशा ने अमित को आश्वासन दिया और दोनों ने ही फ़ोन रख दिया।

"आरती मुझे अभी दिल्ली के लिए निकलना होगा, मेरी अभी निशा भाभी से बात हुई, वरुण और उसका परिवार दिल्ली चला गया हैं। तुम्हें याद हैं वरुण के पड़ोसी ने बताया था कि कम्पनी में घाटे की वजह से कर्मचारियों को काम से निकाल दिया गया हैं, यह सब सच है निशा भाभी भी यही कह रही थी। वरुण हमें परेशान नहीं करना चाहता था इसलिए कुछ नहीं बताया, लेकिन अब मुझे सब कुछ पता चल गया है और अब मैं उसे इस तरह मुसीबत में नहीं छोड़ सकता, मुझे उससे बात करने के लिए जाना ही होगा।" अमित ने आरती से कहा, "आप सही कह रहे है, मैं भी साथ चलती हूँ" आरती ने अपनी इच्छा व्यक्त की,

"लेकिन बच्चे अकेले रह जायेंगे" अमित ने चिंतित स्वर में कहा,

"आप बिल्कुल भी चिन्ता मत करिए, मैं बाई से कह दूँगी हमारे आने तक बच्चों का ख़्याल रखेगी, आप तो चलने की तैयारी कीजिये" आरती ने अमित से मुस्कुराते हुए कहा, और दोनों कुछ ही देर में दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

"अरे भई घर में कोई हैं क्या हमारे स्वागत के लिए या हमें उल्टे पाँव ही वापिस जाना होगा" अमित ने मज़ाकिया स्वर में वरुण के यहाँ जाकर आवाज़ लगाई,

"आइये भैया, मैं आपका ही इंतज़ार कर रही थी, आप दोनों बैठिये, मैं वरुण को बुलाकर लाती हूँ" निशा ने मुस्कुराते हुए कहा,

"निशा, तुम तो मुझे अपनी बहन मानती हो ना फिर भी मुझे कुछ नहीं बताया, इतना पराया कर दिया।" आरती ने नाराज़गी जताते हुए कहा,

"मुझे माफ़ कर दीजिये भाभी लेकिन मैं मज़बूर थी, वरुण ने बताने के लिए मना किया था लेकिन अब परेशानी है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही इसलिए अमित भैया को सब कुछ बताना पड़ा।" निशा ने आरती की नाराज़गी दूर करने की कोशिश की,

"आप चिन्ता मत करिये अब मैं आ गया हूँ ना, सब ठीक कर दूँगा, आप तो बस वरुण को बुलाकर लाइए, मुझे उससे बात करनी हैं" अमित ने निशा से कहा,

"जी भैया" कह कर निशा अन्दर चली गई……"वरुण देखो कौन आया हैं, अमित भैया और आरती भाभी तुमसे मिलने आए हैं।" निशा ने मुस्कुराते हुए वरुण से कहा,

"मैनें तुम्हें मना किया था ना अमित को कुछ भी बताने के लिए, फिर भी तुमने मेरी बात नहीं मानी" वरुण ने क्रोधित होते हुए कहा,

"हाँ मैनें बताया सब-कुछ लेकिन उन्हें शक तो पहले ही हो गया था और अगर उन्हें शक ना होता तो भी मैं सब कुछ बताती क्योंकि मैं तुम्हें ऐसे घुट-घुट कर जीते हुए नहीं देख सकती, अच्छा अब नाराज़गी छोड़ो और जल्दी से बाहर आ जाओ।"

वरुण को अपनी ओर आता देख अमित उठकर तुरन्त उसके गले लग जाता हैं, "यार, तूने तो मुझे पराया कर दिया, तुझसे यह उम्मीद नहीं थी।" अमित ने शिकायत करते हुए कहा,

"मुझे माफ़ कर दे मेरे भाई मैं तुझे परेशान नहीं करना चाहता था" वरुण ने शर्मिन्दा होते हुए कहा,

"और तेरी परेशानी का क्या?"अमित ने वरुण की ओर सवालिया नज़रों से देखा, लेकिन वरुण उसके सवाल का कोई जवाब नहीं दे पाया।

"बस अब सारी बातें बाद में करेंगे, पहले सब नाश्ता करते हैं।" निशा और आरती गरमा-गरम चाय और समोसे लाती हुई कहती हैं, चारों नाश्ता करने बैठ जाते हैं लेकिन कमरे में चुप्पी छाई हुई है।

"क्या बात हैं कोई कुछ बोल क्यों नहीं रहा हैं, क्या हमारा आना इतना बुरा लगा, वरुण क्या बात हैं भाई तू अपने मन की बात मुझसे साझा नहीं करना चाहता" अमित ने कहा और उसके ऐसा कहते ही वरुण की आँखों से आँसू बहने लगे जिसे देख अमित ने उसे संभाला।

"मुझे माफ़ कर दे भाई, तुझसे यह सब बातें छुपाने के लिए" वरुण के ऐसा कहते ही अमित ने उसे अपने गले से लगा लिया,

"कोई बात नहीं, अब विस्तार से सारी बात बता, हम मिलकर समस्या का समाधान निकालेंगे" अमित ने वरुण को ढाँढस देते हुए कहा,

"बात तो केवल इतनी सी हैं कि मेरे बॉस की कम्पनी में बहुत बड़ा घाटा हुआ हैं, और उसने अपने अधिकतर कर्मचारियों को काम से निकाल दिया, और इसी वजह से आज मैं भी बेरोजगार हूँ। क्या करूँ कुछ समझ नहीं आ रहा नौकरी मिलना भी तो आसान नहीं है।" वरुण ने अपनी परेशानी बताई।

"हाँ यह सच हैं कि आजकल नौकरी बहुत मुश्किल से मिलती हैं लेकिन क्यों ना तू मेरी कम्पनी में काम करे मेरे साथ" अमित ने मुस्कुराते हुए कहा,

"वो सब तो ठीक हैं लेकिन क्या तेरा बॉस मुझे काम देगा?" वरुण ने अमित से सवाल किया, "मैं बॉस से बात करूँगा, मुझे पूरी उम्मीद हैं कि वो मेरी बात सुनेंगे और समझेंगे भी" अमित ने आश्वासन देते हुए कहा,

"अगर भैया ऐसा हो गया तो हम आपका एहसान ज़िन्दगी भर नहीं भूलेंगे" निशा अमित के आगे हाथ जोड़े खड़ी थी,

"पहले तो आप दोनों यह फ़ैसला कर लीजिए कि आप मुझे अपना मानते हैं या पराया" अमित के ऐसा कहते ही,

"आप ऐसा क्यों कह रहे हैं भैया हमसे कोई गलती हुई हैं क्या" निशा ने पूछा,

"एक तरफ तो आप मुझे भैया कहती है, दूसरी ओर हाथ जोड़कर खड़ी हैं, ऊपर से एहसानों की बात करती हैं फिर पूछती हैं कोई गलती हुई हैं क्या" अमित ने मुस्कुराते हुए कहा,

"माफ़ कर दीजिए भैया गलती हो गयी" निशा ने कहा,

"हाँ तो अब मैं अपने बॉस को फ़ोन करता हूँ और सभी बातों से अवगत करवाता हूँ, देखते हैं वो क्या जवाब देते हैं, अगर वो मना कर देते हैं तो हम कुछ और सोचेंगे।" अमित ने अपनी बात कही,

"आप अपने बॉस से बात ही ऐसे करना कि वो मना ही ना कर पाए" आरती ने कहा।

अमित अपने बॉस को फ़ोन करता हैं, "घंटी जा रही हैं, लगता हैं बॉस व्यस्त है थोड़ी देर में दुबारा करता हूँ।" अमित ने फ़ोन काटते हुए कहा,

"वरुण सब-कुछ ठीक हो जाएगा, तू चिन्ता मत कर" अमित ने वरुण का कंधा धीरे से दबाते हुए कहा,

ट्रिन-ट्रिन "बॉस का फ़ोन हैं, हैलो बॉस मैं अमित बोल रहा हूँ" अमित ने अपना परिचय देते हुए कहा।

"हाँ अमित बोलो, कैसे फ़ोन किया" बॉस ने पूछा,

"बॉस वो दरअसल बात ये थी कि मेरा एक दोस्त हैं उसे काम की बहुत ज़रुरत हैं, क्या अपनी कम्पनी में जगह खाली होगी क्या, सर वो पहले वाली कम्पनी में सेल्स डिपार्टमेंट में काम करता था, कम्पनी में घाटा हो जाने की वजह से वहाँ के बॉस ने बहुत से कर्मचारियों को काम से निकाल दिया, इसके चलते मेरे दोस्त को भी नौकरी से हाथ धोना पड़ा वरना वो अपना काम बहुत ही मन लगा कर करता हैं और सर उसकी गारंटी मैं लेता हूँ" अमित ने वरुण की सिफारिश करते हुए कहा,

"अमित-अमित शांत हो जाओ मैं समझ गया तुम्हारा दोस्त बहुत अच्छा हैं लेकिन मैं मज़बूर हूँ कम्पनी में कोई भी जगह खाली नहीं हैं, नहीं तो मैं तुम्हें कभी मना नहीं करता।" बॉस ने अमित को स्थिति से अवगत करवाया, बॉस की बात सुन अमित उदास हो गया।

"सर अगर कुछ भी हो सके तो अच्छा होगा" अमित ने उदास होते हुए कहा,

"ठीक हैं, अभी तो कोई काम नहीं हैं लेकिन मैं तुमसे वादा करता हूँ जैसे ही कोई जगह खाली होगी मैं काम तुम्हारे दोस्त को ही दूँगा" बॉस ने अमित को आश्वासन देते हुए कहा,

"ठीक हैं सर आपने वादा किया है अगर एक भी जगह खाली होगी तो आप मेरे दोस्त को ही काम पर रखेंगे, भूलना नहीं "अमित ने कहा,

"मेरी शामत आयी हैं जो भूल जाऊँगा, वैसे भी तुम भूलने दोगे जब तो भूलूँगा" और दोनों ही ओर से हँसी के ठहाके गूँजने लगे,

"अच्छा सर मैं फ़ोन रखता हूँ" ऐसा कह अमित ने फ़ोन रख दिया, अमित और उसके बॉस के बीच जो भी बात हुई उससे वरुण को यह तो पता लग ही गया था कि कोई अच्छी ख़बर नहीं हैं।

"तू चिंता मत कर अमित, मैं कोशिश करता रहूँगा कहीं ना कहीं तो काम मिल ही जाएगा" वरुण ने अमित से कहा,

"हाँ दोस्त तू सही कह रहा हैं कोशिश तू भी कर और मैं भी करता हूँ कभी ना कभी तो सफलता मिल ही जाएगी, वैसे दोस्त तेरे लिए अगर मुझे अपनी जान भी देनी पड़े तो मैं पीछे नहीं हटूँगा" अमित के ऐसा कहते ही वरुण ने उसे अपने गले से लगा लिया,

"पागल हैं क्या, आज तो बोल दिया, आगे से मत बोलना नहीं तो मैं कभी बात नहीं करूँगा" वरुण ने अमित को लताड़ा,

"माफ़ कर दे यार" दोनों हँसने लगे……"आरती चलो वापिस भी चलना हैं, बच्चे घर में अकेले हैं।" अमित ने आरती को आवाज़ लगाते हुए कहा,

"भैया बच्चों को भी साथ ले आते तो इतनी रात को वापिस नहीं जाना पड़ता।" निशा ने कहा, "कोई बात नहीं भाभी मैं गाड़ी धीरे-धीरे चलाऊँगा और पहुँचकर आपको फ़ोन करता हूँ, आप तो बस मेरे दोस्त का ख्याल रखना, उसे उदास मत होने देना" अमित ने कहा,

"जी भैया " निशा ने कहा, और अमित आरती के साथ मेरठ के लिए रवाना हो गया।

रात के करीब तीन बजे थे, वरुण के मोबाइल की घंटी बजती है, ट्रिन-ट्रिन, "इस वक़्त किसका फ़ोन है।" वरुण ने झुंझलाते हुए कहा,

"अमित भैया का होगा, मेरठ पहुँच गए होंगे उठा लीजिये" निशा ने नींद में ही बोला

"हैलो" वरुण ने कहा,

"आप वरुण बोल रहे हैं" दूसरी ओर से आवाज़ आयी,

"जी बोल रहा हूँ, आप कौन" वरुण ने पूछा,

"जी मैं दिल्ली-मेरठ हाईवे से बोल रहा हूँ यहाँ पर एक गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गयी हैं उसमें एक औरत और एक आदमी थे, जब हमने उनका फ़ोन चेक किया तो सबसे ज्यादा फ़ोन आपको ही किए हुए थे इसलिए मुझे भी आपसे ही बात करना उचित लगा" दूसरी ओर से आवाज़ आयी।

"मैं कुछ समझा नहीं आप क्या कहना चाहते है" वरुण के शब्दों में असमंजस के भाव थे।

"देखिये यहाँ पर एक एक्सीडेंट हो गया हैं, गाड़ी में बैठे व्यक्ति के पहचान-पत्र से पता चला है कि उनका नाम अमित हैं और उनके साथ एक महिला भी है, हमने यहाँ पुलिस को भी सूचित कर दिया है आप भी तुरन्त आ जाये।" दूसरी ओर से अजनबी व्यक्ति ने कहा, और फ़ोन रख दिया।

"हैलो-हैलो" इस ओर से वरुण लगभग चिल्लाने लगा,

"क्या हुआ वरुण किसका फ़ोन हैं और तुम इतना परेशान क्यों लग रहे हो?" निशा ने पूछा, "हमे अभी निकलना होगा, अमित का एक्सीडेंट हो गया हैं" वरुण ने घबराते हुए कहा,

"अरे लेकिन तुम पहले अमित भैया को फ़ोन करो, ज़माना बहुत ख़राब हैं हमें ऐसे ही किसी की बात पर विश्वास नहीं करना चाहिए" निशा ने वरुण को समझाते हुए कहा,

"तुम ठीक कह रही हो" ऐसा कह वरुण अमित को फ़ोन लगाता है लेकिन दूसरी ओर से पुलिस इंस्पेक्टर फ़ोन उठाते हैं और वरुण को बताते हैं कि अमित और आरती की दुर्घटना में मौत हो गयी हैं, यह ख़बर सुन वरुण गिर पड़ता हैं, निशा उसे बड़ी मुश्किल से संभालती हैं और जैसे-तैसे करके वरुण को ले पुलिस स्टेशन की ओर रवाना हो जाती हैं, वहाँ सारी कागज़ी कार्यवाही पूरी कर दोनों के ही मृत शरीर को अंतिम-संस्कार के लिए ले जाया जाता हैं लेकिन इन सब में वरुण के मुँह से एक भी शब्द नहीं निकलता, वो तो जैसे बुत ही बन गया था, सारी की सारी कार्यवाही निशा ने ही पूरी की, जब अमित का बेटा अंतिम-संस्कार कर रहा था तब भी वरुण की आँखों से एक भी आंसू नहीं निकला।

आज अमित और आरती की पहली बरसी है, बहुत कुछ बदल गया हैं, अब वरुण और निशा के दो नहीं चार बच्चे हैं - दो उनके अपने, और दो अमित और आरती के, वरुण अमित की ही जगह उसकी कम्पनी में काम करने लग गया, सब कुछ सही चल रहा हैं , लेकिन हर ओर उदासी फैली हुई हैं, सब कुछ हैं फिर भी हर ओर खाली-खाली सा लगता हैं, ना तो वरुण की आँखों से कभी आँसू बहे और ना ही वो कभी मुस्कुराया, मानो सब कुछ शून्य हो गया हो।

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