Umar Nahi Koi Bandhan (Story On Love)



Valentine  Day Special

 

 

इश्क़ करने वालों को मिलने से रोक ना सका कोई

मिले हो वो इस दुनिया में या मिले हो ख़ुदा के पास

 

 "यह तो हद ही हो गयी, एक तो देर रात घर लौटो और सुबह होने से पहले ही दिमाग ख़राब कर देने वाला शोर-शराबा शुरु हो जाता हैं, आँचल, आँचल उठो"

"क्या हुआ अरुण, तुम क्यों इतना परेशान हो रहे हो?"

"तुम इसी वक़्त अपनी बेटी पलक के पास जाओ और उससे कहो कि यह शोर-शराबा बंद करे।"

"आप तो जानते ही हैं कि पलक इस वक़्त अपने डांस की प्रैक्टिस करती हैं।"

"हाँ जानता हूँ लेकिन मुझे तुम्हारी बेटी का वक़्त बेवक़्त इस तरह से नाचना बिल्कुल भी पसंद नहीं हैं, अब तुम उसे यह शोर बंद करने के लिए कहने जा रही हो या मैं जाऊँ"

"आप शांत हो जाओ मैं जाकर उसे समझाती हूँ।"

आँचल के समझाते ही, पलक तुरंत ही अरुण से माफी माँगने आ गई।

"माफ़ करना पापा आज फिर से मेरे डांस की वजह से आपकी नींद ख़राब हो गयी।"

"चलो अब जाकर सो जाओ, जो भी बात करनी हैं सुबह करेंगे।' अरुण ने कहा और दूसरी ओर मुँह मोड़कर सो गया।

 

अगले दिन सुबह नाश्ते की टेबल पर,

"हम्म, वैसे तुम्हारे कॉलेज की पढ़ाई कैसी चल रही हैं?"

"बहुत अच्छी, पापा मुझे आपसे एक बात करनी थी।"

"परांठे, गरमागरम परांठे, गोभी के परांठे, अब कोई भी कुछ नहीं कहेगा बल्कि मेरे बनाए हुए परांठे खाएँगे" आँचल ने पलक की ओर चुप रहने का इशारा करते हुए कहा, तीनों ने मिलकर पराठों का लुत्फ़ उठाया और कुछ ही देर बाद अरुण ऑफिस के लिए रवाना हो गया, लेकिन उसके जाते ही,

"मम्मा आपने मुझे पापा से बात करने से क्यों रोका?"

"क्योंकि मैं घर में शान्ति चाहती हूँ, पलक तुम अच्छी तरह से जानती हो तुम्हारे पापा को तुम्हारा डांस करना बिल्कुल भी पसंद नहीं है, ऐसे में तुम उनसे डांस एकेडमी ज्वाइन करने की बात करना चाहती हो, मुझे थोड़ा समय दो मैं ही तुम्हारे पापा से बात करती हूँ।" नाराज़गी जताते हुए पलक बिना कुछ कहे ही वहाँ से उठकर चली गई।

 

रात के वक़्त, "अरुण मुझे आपसे कुछ बात करनी हैं।"

"हाँ बोलो"

"आप तो जानते ही हैं कि पलक को डांस करना कितना पसंद हैं, वो और भी सीखना चाहती हैं, इसके लिए वो डांस एकेडमी ज्वाइन करना चाहती हैं, अगर आपकी इज़ाज़त हो तो?" कुछ देर के लिए तो कमरे में चुप्पी छायी रही, लेकिन थोड़ी देर बाद अरुण ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा,

"अभी सो जाओ कल बात करते हैं।" आँचल भली-भांति जानती थी कि अरुण का और डांस का छत्तीस का आँकड़ा हैं और बेटी डांस की दीवानी हैं, दोनों के ही बीच में आँचल पिस जाती थी।

 

अगले दिन सुबह नाश्ते की टेबल पर, "तुम्हारी मम्मा कह रही थी कि तुम्हे डांस एकेडमी ज्वाइन करनी हैं।"

"जी पापा" पलक ने प्लेट में नाश्ता लगाते हुए कहा,

"ठीक हैं, लेकिन मेरी कुछ शर्ते हैं।"

"शर्ते, कैसी शर्ते ?"

"मेरी पहली शर्त डांस टीचर तुम्हे घर आकर सिखाएगा, दूसरी शर्त जिस वक़्त मैं घर पर रहूँ तुम डांस की प्रैक्टिस नहीं करोगी और तुम्हारे लिए डांस टीचर मैं लेकर आऊँगा।"

कुछ देर सोचते हुए, "ठीक हैं पापा, जैसा आप चाहेंगे वैसा ही होगा।"

 

लगभग एक हफ्ते बाद शाम को ऑफिस से लौटते ही अरुण ने आवाज़ लगाई, "पलक, पलक इनसे मिलो यह हैं तुम्हारे डांस टीचर मानव यह तुम्हे कल से शाम 4 से 6 बजे के बीच डांस सिखाने के लिए आया करेंगे, उम्मीद करता हूँ तुम्हे कोई ऐतराज़ नहीं होगा।"

"नहीं पापा बल्कि मैं तो बहुत खुश हूँ।" पलक ने अपने सामने खड़े हुए एक चालिस वर्षीय अधेड़ युवक को एकटक निहारते हुए कहा, अगले ही दिन से पलक की डांस क्लासेज शुरु हो गयी, अब पलक पहले से भी ज्यादा खुश रहने लगी थी, घर में सुबह-सुबह शोर-शराबा ना होने की वजह से अरुण भी खुश था, जब घर में सभी खुश थे तो आंचल की खुशी तो स्वाभाविक थी ।

 

पलक को मानव से डांस सिखते हुए छः महीने से भी ज्यादा हो गया था, सबकुछ अच्छा ही चल रहा था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से आंचल को पलक का व्यवहार कुछ बदला-बदला सा लगने लगा, लेकिन उसने इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, परन्तु एक दिन शाम को पलक ने कुछ ऐसा कह दिया जिसे सुनकर अरुण एवं आंचल दोनो को ही यकीन नहीं हुआ, "मम्मा, पापा मैं मानव से प्यार करती हूँ और उससे शादी करना चाहती हूँ।"

"शादी, मानव से !"

"जी पापा"

"क्या करती हो तुम पूरा दिन घर में? तुम्हारी नाक के नीचे तुम्हारी बेटी ये गुल खिला रही हैं और तुम्हें पता भी नहीं चला" अरुण ने आंचल से गुस्से में कहते ही,

"पापा इसमें मम्मा की कोई गलती नहीं हैं, आप उनसे कुछ मत बोलो"

"चुप रहो तुम, शर्म आनी चाहिए तुम्हें, तुमने हमारे विश्वास का गलत फायदा उठाया है और तुम्हें अपने से बीस साल बड़े इन्सान से प्यार कैसे हो सकता हैं?"

"पापा ये तो प्यार है सोच कर नहीं किया जाता बस हो जाता हैं।"

"चुप हो जाओ तुम, कुछ तो शर्म करो अपने पापा से बहस कर रही हो।" आँचल के कहते ही, "नहीं आंचल तुम इससे कुछ मत कहो, गलती मेरी ही हैं कि मैं इसकी सारी इच्छाएँ पूरी करता हूँ।"

"पापा आप मेरी बात तो सुनिए"

"अपने कमरे में जाओ"

"अरुण एक बार उसकी बात तो सुन लो" आँचल ने अरुण से आग्रह किया, लेकिन

"तुम अपनी मम्मी को फ़ोन करके बताओ की हम पलक को कुछ दिनों के लिए उसके ननिहाल भेज रहे हैं।"

"लेकिन वहाँ क्यों ?"

"क्योंकि अब यही बेहतर हैं कि तुम्हारी बेटी को इस माहौल से दूर रखा जाए।"

 

लेकिन उसी वक्त, "सर, क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ?"दरवाज़े पर खड़े हुए मानव ने पूछा,

"तुम यहाँ क्या कर रहे हो? निकल जाओ इसी वक़्त मेरे घर से"

"सर, मैं पलक से बहुत प्यार करता हूँ, आप यक़ीन कीजिए मैं उसे बहुत ख़ुश रखूँगा।"

"तुम्हे शर्म नहीं आती अपने से आधी उम्र की लड़की को प्यार के जाल में फ़साते हुए।"

"पापा, आपको कोई हक़ नहीं हैं मानव से इस तरह बात करने का"

"मुझे तुमसे पूछने की कोई ज़रुरत नहीं हैं कि मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं, अन्दर जाकर अपना सामान बाँधो, मैने फ़ैसला किया हैं कि आगे की पढ़ाई तुम अपने ननिहाल में करोगी" बेबस हो पलक अन्दर जा अपनी माँ आँचल से गुहार लगाने लगी कि वो दोनों मानव को स्वीकार कर ले और उसे ननिहाल न भेजें लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ और उसे दूसरे शहर अपने ननिहाल जाना पड़ा, दूसरी ओर मानव को भी बेइज़्ज़त कर घर से निकाले जाने के बाद उसका कोई अता-पता ही नहीं था, अरुण को लगा सबकुछ शान्त हो चुका हैं लेकिन वो ग़लत था।

 

"हैलो, हैलो मम्मी कैसे हो?"

"मैं तो ठीक हूँ लेकिन तेरी पलक से कोई बात हुई, सुबह बाजार गई थी अभी तक नहीं लौटी शाम होने को आयी हैं।" आँचल की मम्मी ने चिंतित होते हुए कहा,

"नहीं, लेकिन आप चिंता मत कीजिए मैं अरुण से कहती हूँ वो पता कर लेंगे।" आँचल व अरुण ने पलक के सभी दोस्तों को फ़ोन किया लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला, रात काफी हो चुकी थी चिंता होना स्वाभाविक था, इसीलिए अरुण ने पुलिस में रिपोर्ट लिखवाना ही उचित समझा, लेकिन इससे पहले कि अरुण कुछ करता स्वयं पुलिस का ही फ़ोन अरुण के पास आ गया, "हैलो, मि. अरुण"

"जी मैं बोल रहा हूँ।"

"पलक आप ही की बेटी हैं?"

"जी, लेकिन आप कौन?"

"मैं पुलिस इंस्पेक्टर बोल रहा हूँ, आप तुरन्त पुलिस स्टेशन आ जाइये" अरुण व आँचल घबराते हुए पुलिस स्टेशन पहुँचे लेकिन वहाँ पहुँचकर जो पता चला उसे सुन दोनों की ही आँखों के आगे अँधेरा छा गया, पलक ने पास ही के एक होटल में ज़हर खा कर अपनी जान दे दी थी लेकिन इतना बड़ा कदम उठाने वाली वो अकेली नहीं थी बल्कि, मानव ने भी उसी के साथ ज़हर खा कर आत्महत्या कर ली थी, होटल के कमरे से मिली चिट्ठी में लिखे इन शब्दों ने उनके प्यार की गहराई को बयां कर दिया था, "मुमकिन हैं ज़माना हमे साथ जीने न दे, लेकिन हमारी मौत पे किसी का हक़ नहीं"  चिठ्ठी में लिखे इन शब्दों ने यह तो बयां कर ही दिया था कि सच्चा प्यार करने वालो को कोई भी मिलने से नहीं रोक सकता, लेकिन यह बात जब तक अरुण व आँचल को समझ आती बहुत देर हो चुकी थी और अब पछताने के अलावा कुछ नहीं बचा था।

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