Ishq Mukammal (Story On Valentine's Day)

                             Valentine's Day special 
   
  

                                          Valentine's Day special 

  

इश्क़ करने की सज़ा कुछ इस तरह से मिली

लबों की मुस्कान आँसुओं में तब्दील हो गयी

उम्मीद ही नहीं थी कभी जिसकी हमको

वो मोहब्बत आज हमारी मुकम्मल हो गयी

 

"नंदिनी जी इनसे मिलिएये हैं विशाल जीमेरे पति के ही साथ उनके ऑफिस में काम करते हैंऔर विशाल जीये हैं नंदिनी जीयूँ समझ लीजिए हमारे ऑफिस की जान हैं ये" शिखा ने नंदिनी और विशाल का आपस में परिचय करवाते हुए कहा। लेकिन यूँ अचानक से विशाल को सामने देख नंदिनी को समझ ही नहीं आया कि क्या करे। 

"आप दोनों ही आज की इस वैलेंटाइन पार्टी में अकेले हैंतो मैंने सोचा क्यों ना आप दोनों का एक डांस कपल बना दिया जाए।" और शिखा हँसती हुई नंदिनी और विशाल को छोड़कर वहाँ से चली गई। नंदिनी और शिखा एक ही ऑफिस में काम करते हैंएक दिन पहले तेरह तारीख की शाम को ही शिखा ने ऑफिस में घोषणा कीकि वो अपने घर पर एक छोटी सी वैलेंटाइन पार्टी रख रही हैंऔर उसमे सभी का आना ज़रूरी हैंनंदिनी ने तो मना भी कियालेकिन शिखा कहाँ मानने वाली थी,

"देखो शिखा यह वैलेंटाइन पार्टी में मेरा आना ठीक नहीं रहेगायह तुम नौजवानों का त्यौहार हैंमेरे जैसे बड़ी उम्र के लोग आकर क्या करेंगे।"

"क्यों बड़ी उम्र के लोग प्यार नहीं करते?"

"ऐसी बात नहीं हैंतुम तो जानती हो की मैं वहाँ बिल्कुल अकेली हो जाऊँगीऔर तुम नौजवानों के बीच में मुझे अजीब भी लगेगा।"

"इस बात की चिंता आप मत कीजिएदेख लेना कोई ना कोई साथी आपको ज़रूर मिलेगा पार्टी में" शिखा की ज़िद के आगे नंदिनी की एक ना चली और उसे पार्टी में आना ही पड़ालेकिन पार्टी में विशाल की एक झलक ने नंदिनी को उसका अतीत याद दिला दिया। 

लगभग पच्चीस साल पुरानी बात हैंजब नंदिनी की उम्र बीस बरस होगीऔर वो अपने शहर के एक कॉलेज से बी.ए. की पढ़ाई कर रही थीवैसे तो कॉलेज में लड़के और लड़कियाँ दोनों ही पढ़ते थेलेकिन नंदिनी को लड़को से बात करने या उनसे दोस्ती करने में संकोच होता थाइसलिए उसकी दोस्त सिर्फ लड़कियाँ ही थीलेकिन पिछले कुछ दिनों से नंदिनी को ना जाने कुछ ऐसा महसूस हो रहा था कि किसी की नज़रे उसका पीछा कर रहीं हैंअपने मन का वहम समझ उसने इस बात को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश कीलेकिन एक दिन जब वो कॉलेज की कैंटीन में बैठी हुई थीतभी एक लड़का उसके सामने आकर बैठ गया,

"हैलोमेरा नाम विशाल हैं।"

"हैलोलेकिन मैं आपको नहीं जानती"

"पता हैंइसीलिए तो दोस्ती करने आया हूँ।"

"जीमैं कुछ समझी नहीं....!"

"वैसे समझने के लिए कुछ हैं भी नहींमुझे तो बस आपसे दोस्ती करनी हैंक्या आप मेरी दोस्त बनेंगी?" विशाल का ये बिंदास व्यवहार नंदिनी की समझ से परे था।

"मैं लड़को से दोस्ती नहीं करती।" ऐसा कहते हुए नंदिनी वहाँ से उठकर चली गईलेकिन विशाल भी कहाँ हार मानने वाला थाउसे नंदिनी से प्यार जो हो चुका था।   

अगले दिन फिर से विशाल नंदिनी के सामने आ खड़ा हुआ, "आखिर आप चाहते क्या हैं मुझसे?"

"नंदिनी मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ।" नंदिनी बिना कोई जवाब दिए वहाँ से चली गईविशाल भी समझता था की नंदिनी जैसी लड़की से दोस्ती करना या प्यार करना आसान नहीं हैंशायद नंदिनी के इसी शर्मीले स्वभाव की वजह से विशाल को उससे प्यार हो गया थालेकिन इस प्यार को पाना विशाल के लिए आसान नहीं थाफिर भी उसने अपनी कोशिशे जारी रखीविशाल की कोशिशों ने कभी भी लड़कों से बात ना करने वाली नंदिनी को उससे दोस्ती करने पर मज़बूर कर ही दियाअब तो इन दोनों का ज्यादातर वक़्त साथ ही गुज़रताअगर अपने-अपने घरों में होते तो फ़ोन पर लगे रहतेवैसे विशाल नंदिनी से एक साल बड़ा थाइसलिए अकसर पढ़ाई में भी मदद कर दिया करताइस बहाने से भी दोनों का कुछ वक़्त साथ गुज़र जाया करताविशाल अब नंदिनी से अपने प्यार का इज़हार करना चाहता थालेकिन डर था तो बस इस बात का कि कही प्यार का इज़हार करने से वो नंदिनी जैसा दोस्त हमेशा के लिया खो ना देदूसरी ओर नंदिनी के मन में भी कुछ ऐसी ही कश्मकश थीक्यों कि वो भी तो विशाल से प्यार करने लगी थीलेकिन किसी को तो पहल करनी ही थी ना।              

"नंदिनीक्या आज कॉलेज के बाद कॉफ़ी पीने चलोगी?"

"ठीक हैं चलूँगी" विशाल को उम्मीद ही नहीं थी की नंदिनी इतनी आसानी से मान जाएगीऔर वो मानती भी क्यों नहींवो भी तो अब ज्यादा से ज्यादा वक़्त विशाल के साथ गुज़ारना चाहती थी।  

शाम को कॉफ़ी हाउस में, "नंदिनी मुझे तुमसे कुछ कहना हैं।"

"हाँ बोलो"

"पहले वादा करो की अगर तुम्हे मेरी बात बुरी लगे तो भी तुम मुझसे दोस्ती नहीं तोड़ोगी।" 

"ठीक हैं वादापर तुम मुझसे कहना क्या चाहते हो?"

"आई.लव.यू. नंदिनीमैं तुमसे प्यार करता हूँ।" विशाल एक ही साँस में सब बोल गया। 

"आई.लव. यू. टू. विशाल" विशाल को अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ,

"क्या कहा तुमनेमैंने कुछ सुना नहींज़रा फिर से कहना"

"आई.लव.यू.विशाल मैं भी तुमसे प्यार करती हूँबस बोलने की हिम्मत नहीं थीड़र था कि कहीं तुम्हारे जैसा अच्छा दोस्त खो ना दूँ।"

"मेरा भी कुछ यहीं हाल था।" विशाल ने शर्माते हुए कहालेकिन वहाँ कॉफ़ी हाउस में नंदिनी का आई. लव. यू. कहना विशाल ने ही नहीं बल्कि किसी ओर ने भी सुन लिया थाऔर वो थे नंदिनी के चाचा जो की उसी समय कॉफ़ी हाउस में अपने किसी दोस्त के साथ आए थेउस वक़्त तो नंदिनी के चाचा ने वक़्त की नज़ाकत देखते हुए कुछ नहीं कहाऔर नंदिनी को तो उनकी मौज़ूदगी का अहसास तक नहीं थालेकिन नंदिनी के घर जाने के बाद जो कुछ भी हुआ उसको शब्दों में बयां ही नहीं किया जा सकता।        

"क्या यही संस्कार दिए हैं आपने अपनी बेटी को जो बाहर चार लोगो के सामने इश्क़ लड़ा रहीं हैंअरे ज़रा ये तो सोचिए हमारे बच्चो पर क्या असर पड़ेगा।" नंदिनी जब कॉफ़ी हाउस से घर पहुँची तो उसके चाचा उसके पापा पर बुरी तरह से चिल्ला रहे थे।  

"क्या हुआ चाचा आप इतने गुस्से में क्यों हैं?" वहाँ की स्थिति से अनजान नंदिनी के पूछते ही

"लो आ गयी आपकी लाड़लीअब खुद ही पूछ लो इसकी करतूतों को"

"नंदिनी बेटा सच-सच बतानाक्या तू आज शाम कॉफ़ी हाउस में किसी लड़के के साथ थी।" अपनी माँ के द्वारा पूछे गए अचानक इस सवाल से नंदिनी घबरा गयी।

"जीजी माँ" नंदिनी के हाँ बोलते ही उसकी माँ ने बिना सोचे-समझे ही उसके गाल पर एक ज़ोरदार तमाचा जड़ दियाफिर क्या था नंदिनी की खुद की माँ को उसके ख़िलाफ़ होते देखघर के बाकी लोग उस पर और हावी हो गएक्या दादाक्या दादीक्या चाचाक्या चाची किसी ने भी नहीं बख्शा था नंदिनी कोऔर नंदिनी ही क्यों उसके माँ-बाप को भी ना जाने क्या-क्या सुनना पड़ाइस दौरान नंदिनी चिल्ला-चिल्ला कर कहती रही कि बस एक बार विशाल से मिल लोवो बुरा लड़का नहीं हैंलेकिन उसकी बात सुनने को कोई तैयार ही नहीं थाअब तो नंदिनी का विशाल से फ़ोन पर बात करनाउससे मिलना सबकुछ बंद करवा दिया गया थायहाँ तक की उसकी कॉलेज की पढ़ाई तक छुड़वा दी गयी थीनंदिनी ने तो कभी सोचा भी नहीं होगा कि उसे प्यार करने की इतनी बड़ी सजा मिलेगी।         

दूसरी ओर नंदिनी को अब कॉलेज नहीं जाते हुए दो हफ़्ते से ज़्यादा गुज़र चुके थेऔर इतने वक़्त तक नंदिनी की गैरमौज़ूदगी से विशाल का परेशान होना वाज़िब थाउसने नंदिनी से मिलने की हर संभव कोशिश कीलेकिन हर कोशिश में वो नाकाम ही रहावो नंदिनी के घर भी गया लेकिन वहाँ से उसके चाचा द्वारा दुत्कार कर बाहर निकाल दिया गयाजिस बात की भनक नंदिनी को लगी ही नहींअब तो उसको नंदिनी की जो भी जानकारी मिलती वो उसकी सहेलियों के द्वारा ही मिलतीऔर इन सब बातों से विशाल समझ चुका था कि उसका प्यार अधूरा रह गया हैंवो पूरी तरह से टूट चुका था। दूसरी ओर नंदिनी के घर पर उसका और उसके मम्मी-पापा का इतना तिरस्कार हो चुका था कि उसके पापा ने अब यह शहर छोड़ने का ही फ़ैसला कर लिया थानंदिनी भी अब खुद को माफ़ नहीं कर पा रहीं थीक्यों कि आज जो उसके मम्मी-पापा की हालत हैं उसके लिए कही ना कही वो ही तो ज़िम्मेदार हैंऔर उसे इस बात का दुःख भी बहुत थाकि उसके अपने मम्मी-पापा उसका प्यार नहीं समझ पाए या शायद समाज से इतना ड़र गए की अपनी बेटी की भावनाओं को ही नहीं समझ पाए और समाज के खातिर उसके प्यार की बलि चढ़ा दी          

नंदिनी और उसके मम्मी-पापा अब दूसरे शहर में जाकर रहने लगे थेवहीं नंदिनी ने अपनी आगे की पढ़ाई ज़ारी रखीफर्क सिर्फ इतना था कि अब वो केवल लड़कियों वाले कॉलेज में पढ़ रही थीग्रेजुएशन करने के बाद नंदिनी ने उसी शहर की एक कंपनी में नौकरी कर लीनंदिनी की ज़िंदगी में अब बहुत कुछ बदल चुका थावो अब मुस्कुराना भूल चुकी थीहमेशा उदास सी ही रहती थीऔर उसकी यह हालत उसके मम्मी-पापा से छुपी नहीं थीचाहते हुए भी समाज के ड़र से वो अपनी बेटी को उसके प्यार से नहीं मिलवा सकते थेऔर इसी वजह से वो अन्दर से टूट चुके थेअपनी बेटी की उदासी ने उन दोनों को बीमार कर दियाऔर इसी वजह से नंदिनी के पापा ज्यादा दिन तक ज़िन्दगी का साथ नहीं निभा पाए और जल्द ही इस दुनिया से रुखसत हो गएनंदिनी के पापा के जाने के बाद उसकी मम्मी ने भी बिस्तर पकड़ लियालेकिन उन्हें नंदिनी की शादी की चिंता भी सता रही थीऔर इस बात का ज़िक्र उन्होंने नंदिनी से कई बार किया भीलेकिन उसने तो जैसे कभी शादी ना करने की कसम ही खा रखी थीइसी दौरान एक दिन नंदिनी की मम्मी की तबियत कुछ ज्यादा ही ख़राब हो गयीजब अस्पताल लेकर जाया गया तो डॉक्टरों ने जवाब दे दियावो भी अब नंदिनी को छोड़कर जा चुकी थीनंदिनी अब इस दुनिया में पूरी तरह से अकेली हो चुकी थीऔर कही ना कही वो अपने मम्मी-पापा की मौत का ज़िम्मेदार खुद को ही मानती थी।        

"नंदिनीनंदिनी कहाँ खो गई।" विशाल की आवाज़ सुन नंदिनी चौंककर वर्तमान में आ गई।  

"नहीं कही नहींतुम बताओ कैसे हो?"

"ठीक हूँतुम तो अचानक से गायब ही हो गयी थीवैसे मुझे तुम्हारी सहेलियों से सब पता चलाक्या तुमने एक बार भी मुझसे मिलने की कोशिश नहीं की?"

"नहींक्योंकि हालात इस बात की इज़ाज़त नहीं दे रहें थेऔर तुमने भी कौनसा मुझसे मिलने की कोशिश कीकम से कम एक बार तो आकर देख लेते की तुम्हारी नंदिनी कैसी हैं।"

“अगर मैं कहूँ कि मैंने कोशिश की थी तो क्या तुम विश्वास करोगी” और इसी तरह से कुछ देर तक गिले-शिकवों का दौर चलता रहा। 

लेकिन कुछ देर बाद बातों का रुख मोड़ते हुए नंदिनी ने ही कहा, "अकेले आए होवैलेंटाइन पार्टी हैंअपनी पत्नी को भी साथ ले आते।"

"तुम भी तो अकेली आई होतुम अपने पति को साथ क्यों नहीं लाई?"

"मैंने शादी नहीं की"

"क्यों?"

"बस यूँ ही"

"तो फिर तुमने ऐसा क्यों सोच लिया कि मैंने शादी कर ली होगी।"

"मतलब मैं कुछ समझी नहीं....!"

"नंदिनी मैंने तुमसे प्यार किया थासिर्फ तुमसेकिसी ओर को तो मैं अपनी ज़िन्दगी में लाने के बारे में सोच भी नहीं सकता।"

"इसका मतलब" नंदिनी की बात को बीच में ही काटते हुए विशाल ने कहा,

"इसका मतलब तुम्हारा ये पागल आशिक़ आज भी तुमसे उतना ही प्यार करता हैं जितना की पच्चीस साल पहले करता थाफर्क सिर्फ इतना हैं कि तुम अब बूढ़ी लगने लगी हो।"

"वैसे बूढ़े तो तुम भी हो गए हो।"

"हाँलेकिन हमारा प्यार अभी भी जवान हैंऔर सच्चा भीइसलिए तो देखो ना हमे मिलना था सो पच्चीस साल बाद ही सही हम मिले हैंनंदिनी हैप्पी वैलेंटाइन डेक्या शादी करोगी मुझसे ?" विशाल द्वारा अचानक से पूछे गए सवाल के लिए नंदिनी कतई तैयार नहीं थीफिर भी उसने मुस्कुराकर कहा,

"हाँ करुँगीक्योंकि अब मैं तुम्हे खोना नहीं चाहतीअगर तुम इस बूढ़ी से शादी करने के लिए तैयार हो तोऔर तुम्हे भी हैप्पी वैलेंटाइन डे" नंदिनी के ऐसा कहते ही विशाल ने उसे प्यार से गले लगा लिया और अपने मिलने की पूरी तरह से उम्मीद खो चुके दो प्रेमी आज वैलेंटाइन डे पर एक हो गए।     

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