Kaisi Hain Ye Dosti


वो लफ़्ज़ ही नहीं बने जो दोस्ती को कर सकें बयां

दूरियाँ ही नहीं कर सकी तो ख़ुदा क्या करेगा जुदा

 

यह कहानी उन दो सहेलियों की हैंजिन्हे हालातों ने एक दूसरे से चाहे कितना भी दूर रखा हो लेकिन भावनात्मक तौर पर वो दोनों कभी भी एक दूसरे से अलग नहीं हुईअंजलि और मनीषाजी हाँ यहीं हैं वो दो सहेलियाँदोनों ही तीसरी कक्षा में पढ़ती थी जब इनकी पहली मुलाकात हुईशुरुआत में तो दोनों के बीच बहुत ही झगड़े होते थेकई बार तो इनके झगड़ों के बीच स्कूल के प्रिंसिपल तक को पड़ना पड़ाफिर ना जाने कैसे धीरेधीरे दोनों की यह दुश्मनी दोस्ती में बदलती चली गयीयह सब हुआ कैसे इसका जवाब तो आजतक किसी के पास नहीं हैंऔर यह दोनों कुछ बताती नहींख़ैर कोई बात नहींअब हम जानते हैं इन दोनों के जीवन से जुड़ी वो बातें जो इनकी दोस्तीको ख़ास बनाती हैं।

चौथी कक्षा में "अंजलि ध्यान कहाँ हैं तुम्हारा?, बताओ मैंने अभी तक क्या पढ़ाया ?"

"जी सर वो... वो मैं"

"चलो इसी वक़्त मेरी क्लास से बाहर निकलो

"सॉरी सरआगे से ऐसा नहीं होगा"

"सुना नहीं तुमने मैंने क्या कहा"

"सर वो आगे से ध्यान रखेगी प्लीज इस बार माफ़ कर दीजिए।अचानक से मनीषा के बोलते ही,

"तुमसे किसी ने कुछ पूछा"

"नहीं" "तो फिर बैठ जाओ अपनी जगहऔर तुम अंजलि इसी वक़्त बाहर निकलोऔर क्लास का वक़्त बर्बाद मत करो।अंजलि को इस तरह से बेइज़्ज़त कर क्लास से निकालना मनीषा को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगाअब उसका भी मन पढ़ाई में नहीं लग रहा थावो कुछ ऐसा करना चाहती थी जिससे की टीचर उसे भी क्लास से बाहर निकाल देऔर कुछ सोचते हुए उसने अपने बैग से टिफ़िन निकाला औरखाना खाने लगी,

"मनीषा क्या हो रहा हैं ये?"

"सर भूख लग रही थी सो खाना खा रहे हैं।

"तुम्हे दिखाई नहीं दे रहा कि मैं पढ़ा रहा हूँ"

"लेकिन सर

"निकलो बाहर इसी वक़्त मेरी क्लास से ना खुद पढ़ते हो ना ही दूसरो को पढ़ने देते होमनीषा मन ही मन मुस्कुराती हुई क्लास से बाहर निकल गई,

"तुझे क्यों बाहर निकाला सर ने?" अंजलि के पूछते ही,

"निकाला नहीं बल्कि मैं निकल गयीतू जो बाहर खड़ी थी और तेरे बिना मैं अन्दर कैसे रहतीऐसा कहते ही मनीषा ने अंजलि को गले लगा लिया।

यह बात भी चौथी कक्षा की ही हैंएक दिन अंजलि को पता चला कि मनीषा को तेज़ बुखार हुआ हैंवो बिना किसी से भी घर पर बताए मनीषा के यहाँ चली गयीऔर उसके पास बैठजब तक ठंडे पानी की पट्टियाँ चढ़ाती रही जब तक कि बुखार नहीं उतर गयाउसकी इस हरकत पर उसकी माँ रागिनी ने बहुत डाँटा भी लेकिन अंजलि को तो जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा थावो तो बस यही चाहती थी कि मनीषा जल्दी से ठीक होकर स्कूल आने लग जाए।

सबसे बड़ा झटका दोनों की दोस्ती को जब लगा तब मनीषा के पापा का तबादला कानपुर से दिल्ली हो गयाउस वक़्त वो दोनों छठीं कक्षा में पढ़ती थीमनीषा उनके साथ नहीं जाना चाहती थीचाहती तो अंजलि भी नहीं थी कि मनीषा यहाँ से जाएदोनों एक साथ रहे अब ये संभव नहीं थामनीषा के पापामम्मी ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन उसका तो रोरोकर बुरा हाल थाऔर इसी वजह से वो बीमार भी पड़ गईलेकिन उसको लेकर जाना भी ज़रुरी था।  

मनीषा के जाने के बाद अंजलि जैसे टूट सी गयी थीउसका किसी भी काम में मन ही नहीं लगता थालेकिन रहना तो था ही ना इसलिए दोनों ही सहेलियों ने हालातों से समझौता कर लियाशुरुशुरु में तो दोनों तक़रीबन रोज़ाना ही फ़ोन पर बात करतीफिर धीरेधीरे यह सिलसिला कम होता चला गया,क्यों कि जैसेजैसे क्लास बढ़ रही थी पढ़ाई का बोझ भी बढ़ रहा था,  दोनों के ही घरवालों को अब ऐसा लगने लगा था कि वो एक दूसरे को भूल रही हैंऔर यही उन सबकी सबसे बड़ी गलतफहमी थी।

एक दिन जब मनीषा को पता चला कि अंजलि एजुकेशनटूरकेलिए दिल्ली  रही हैं तो उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं थाउसने अंजलि के आने की तैयारियाँ कई दिन पहले से ही करनी शुरु कर दीदूसरी ओर अंजलि ने भी मनीषा के लिए उपहार खरीदने में कोई कसर नहीं छोड़ीअब बस इंतज़ार था तो अंजलि के दिल्ली पहुँचने कालेकिन किस्मत को तो कुछ ओर ही मंज़ूर थाइसलिए जिस बस से अंजलि और उसके स्कूल के बाकी बच्चे  रहेथे उसका रास्ते में एक्सीडेंट हो गयाबहुत से बच्चे घायल हुए थेकई बच्चो को तो बचाया हीनहीं जा सकाजिनमे अंजलि भी शामिल थीएक्सीडेंट की खबरजब अंजलि के परिवारवालो को पता चली तो वो तुरन्त ही दिल्ली के लिए रवाना हो गएइधर दिल्ली में मनीषा इन सभी बातों से बेख़बर बहुत ही बेसब्री से अंजलि का इंतज़ार कर रही थीइतने में ही उसने अपनी मम्मी शालिनी को किसी से फ़ोन पर बात करते हुए सुन लिया जिससे उसने यह अंदाज़ा तो लगा ही लिया कि अंजलि को लेकर कोई बुरी खबर हैं।

"क्या हुआ मम्मीआप फ़ोन पर किससे बात कर रही थीकुछ अंजलि के बारे में हैं क्या?" 

"नहींनहीं ऐसी कोई बात नहीं हैंजाओ तुम अपनी पढ़ाई करो।शालिनी के हावभाव देखकर मनीषा को कुछ घबराहट होने लगी।  

"मम्मी बताओ ना क्या हुआ हैं?"

"अंजलि का एक्सीडेंट"

"एक्सीडेंट….कैसी हैं वोठीक तो हैं ना अबमम्मी मुझे उससे मिलने जाना हैंआप चुप क्यों हैं कुछ बोलती क्यों नहीं"

"वो अंजलि....मेरा मतलब हैं कि अंजलि"

"क्या हुआ मम्मी अंजलि को

"मनीषा बेटा हिम्मत से काम लोहोनी को कौन टाल सकता हैं।

"आप कहना क्या चाहती हैं।"

"अंजलि अब इस दुनिया में नहीं रही।यह सुनते ही मनीषा खुद को संभाल नहीं पायी और वहीं धड़ाम से गिर पड़ी,

"मनीषामनीषा बेटा उठोअरे कोई हैं गीतागीताशालिनी पागलों की तरह से अपनी बाई को आवाज़ लगाने लगी।  

"क्या हुआ भाभीअरे मनीषा क्या हुआ हैं इसेगीता के पूछते ही

“बेहोश हो गयी हैंतुम जल्दी से डॉक्टर को फ़ोन करो।“

कुछ देर बाद डॉक्टर के आते ही,"डॉक्टर साहब देखिए ना क्या हुआ हैं मेरी बेटी कोअपनी सहेली के एक्सीडेंट में मरने की खबर सुन अचानक से बेहोश हो गयी।"

"इसको अपनी वो सहेली बहुत अज़ीज़ थी क्या?"

"हाँ डॉक्टर साहब"

"इसीलिए उसके पास चली गयीमाफ़ कीजिएगा,आपकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं रही।“  


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