April Fool (Story On April Fool Day)


 

एक दो तीन चार 

आएगा मज़ा खूब इस बार 

पाँच छसात आठ 

क्या पढ़ेगा मुरारी पाठ 

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अप्रैल का दिन दुनिया-भर में मूर्ख-दिवस के रूप में मनाया जाता हैहर कोई अपने आस-पास के लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश करता हैंदूसरी ओर बेवकूफ बनने से बचने के लिए हरेक व्यक्ति किसी भी बात या किसी भी सूचना को गंभीरता से नहीं लेता। मूर्ख दिवस की शुरुआत फ्रांस में 1582 में उस वक्त हुईजब पोप चार्ल्स 9 ने पुराने कैलेंडर की जगह नया रोमन कैलेंडर शुरू किया. बताया जाता है कि इस दौरान कुछ लोग पुरानी तारीख पर ही नया साल मनाते रहे और उन्हें ही अप्रैल फूल कहा गया. साथ ही उनका मजाक भी मनाया गया। 

फ्रांसइटलीबेल्ज‍ियम में कागज की मछली बनाकर लोगों के पीछे चिपका दी जाती है और मजाक बनाया जाता है. वहीं स्पेनिश बोलने वाले देशों में 28 दिसंबर को अप्रैल फूल मनाया जाता हैजिसे डे ऑफ होली इनोसेंट्स कहा जाता है. ईरानी फारसी नववर्ष के 13वें दिन एक-दूसरे पर कटाक्ष  करते हैंयह 1 या 2 अप्रैल का दिन होता है. डेनमार्क में 1 मई को यह मनाया जाता है और इसे मज-कट कहते हैं.  कुछ देशों जैसे न्यूजीलैंडब्रिटेनऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में इस तरह के मजाक केवल दोपहर तक ही किये जाते हैं और अगर कोई दोपहर के बाद किसी तरह की कोशिश करता है तो उसे "अप्रैल फूल" कहा जाता हैऐसा इसलिए  किया जाता है क्योंकि ब्रिटेन के अखबार जो अप्रैल फूल पर मुख्य पृष्ठ निकालते हैं वे ऐसा सिर्फ पहले एडिशन के लिए ही करते हैंइसके अलावा अमेरिकाफ्रांसआयरलैंडइटलीदक्षिण कोरियारूसनीदरलैंडजर्मनीब्राजीलकनाडा और जापान में मज़ाक का सिलसिला दिन भर चलता रहता है।


     अप्रैल फूल से सम्बंधित एक छोटी-सी कहानी यहाँ प्रस्तुत की जा रही हैं:-

            

 गाँव में रहने वाले मुरारी की बेवकूफी के चर्चे उसके स्वयं के ही नहीं बल्कि आस-पास के गाँवों में भी फैले हुए थेकोई भी उसको आसानी से बुद्धू बना सकता थामुरारी खेती का काम करता थावैसे तो उसका कोई नहीं थालेकिन वो पूरे गाँव को अपना परिवार ही मानता थाएक दिन उसी के गाँव में रहने वाले कुछ लड़को ने उसका अप्रैल फूल बनाने की योजना बनाई, "असंभवमुरारी इतना भी बेवकूफ नहीं हो सकता कि तुम सब मिलकर उससे इतना बड़ा झूठ बोलो और वो मान जाए।"

"हाथ कंगन को आरसी क्यापढ़े लिखे को फ़ारसी क्याशर्त लगा लो हम उसे आसानी से अप्रैल फूल बना लेंगे।"

 "देखते हैं" उन लड़को में से एक यह जानते हुए कि मुरारी किस हद तक बेवकूफ हैं इस बात का यक़ीन ही नहीं कर पा रहा था कि अप्रैल फूल बनाने की जो योजना बनाई गयी हैं उसमे सफलता मिलेगी। 

"मुरारीतुमने कुछ सुना अगले महीने यानि की पहली अप्रैल को गाँव के सरपंच के बेटे की शादी हैं।" मुरारी का एक दोस्त बोला,

"हाँसुना हैंऔर मैंने तो यह भी सुना हैं कि लड़की शहर की हैं और बारात गाँव से शहर जाएगी।" मुरारी के कहते ही,

"बिल्कुल सही सुना तुमनेहम सब भी चलेंगेअरे भई सरपंच जी ने पूरे गाँव को आमंत्रित किया हैं।"

"हाँवो सब तो सही हैं पर टाई कहाँ से लाएंगे?" इतने में ही वहाँ खड़ा मुरारी का दूसरा दोस्त बीच में ही बोल पड़ा,

"टाईकैसी टाई मैं कुछ समझा नहीं….!" मुरारी आश्चर्य से अपने सभी दोस्तों की ओर देखने लगा।

"मुरारी क्या वाक़ई में तुम्हे टाई के बारे में कुछ नहीं पता?"

"नहीं"

"ओह कोई बात नहीं चलो हम बता देते हैंदरअसलयह तो तुम्हे पता ही हैं कि शादी शहर में हैंवहाँ अधिकतर शहरी लोग ही आएंगेतो लड़की के पिता चाहते हैं कि जो भी व्यक्ति बारात में आये वो टाई पहनकर आए।" इतना सुनते ही मुरारी तपाक से बोल पड़ा,

"लेकिन टाई के साथ पेंट और कोट का सूट भी तो बनवाना पड़ेगाऔर उसमे खर्चा कितना हो जायेगा कुछ पता भी हैं तुम्हे?"

"अरे नहीं सूट बनवाने की कोई ज़रुरत नहीं हैंसरपंच जी ने कहा हैं कि कपड़े कुछ भी पहनो लेकिन टाई आवश्यक हैं।"

इतने में ही मुरारी चिल्ला पड़ा, "मतलब"

"मतलब यह कि मुरारीतुम कुछ भी पहनो कुर्ता-पायजामापेंट शर्टधोती-कुर्ताया फिर चड्डी-बनियान कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा मुख्य तो टाई पहनना हैं।"

"क्या तुम सच बोल रहे हो?"

"अगर विश्वास नहीं तो ख़ुद सरपंच जी से जाकर पूछ लो।" सब भली-भाँति जानते थे कि मुरारी के अन्दर सरपंच जी के पास जाने की हिम्मत ही नहीं हैं।

"नहींनहीं ऐसी कोई बात नहीं हैं मुझे तुम सब पर पूरा विश्वास हैं।" मुरारी के कहते ही,

"हाँ तो ठीक हैंअब मिलते हैं शादी में तब तक के लिए अलविदा दोस्तों" इतना कहते ही मुरारी के दोस्त वहाँ से उठकर चल दिए।  

अप्रैल का दिन थासरपंच जी के बेटे की बारात शहर जानी थीसभी गाँव वाले बहुत ही उत्साहित थेऔर सरपंच जी के घर के बाहर खड़े होकर बारात निकलने का इंतज़ार कर रहे थेजिससे कि बारात के साथ रवाना हो सकेलेकिन मुरारी अभी तक खेत से नहीं लौटा थाकुछ ही देर में बारात एक बस द्वारा शहर के लिए रवाना हो गयीसभी गाँव वाले उस बस में थे लेकिन मुरारी नहीं जा सका क्यों कि वो वक़्त पर खेत से वापिस लौट ही नहीं पायायह देख उसके दोस्तों को भी बहुत दुःख हुआ क्यों कि उनकी योजना पर पूरी तरह से पानी फिर चुका था। दूसरी ओर जैसे ही मुरारी खेत से वापिस लौटा, "लगता हैं बारात रवाना हो चुकी हैंमुझे कुछ ज्यादा ही देर हो गयी हैं शायदकोई बात नहीं अब चला जाता हूँगाँव से शहर की ओर तो हर घंटे रोडवेज की बस जाती ही रहती हैं।" मुरारी खुद से ही बड़बड़याऔर जाने के लिए तैयार होने लगा। 

"पागल हैं क्याकहाँ घुसा जा रहा हैं...!" गेट पर खड़े दरबान ने चिल्लाकर कहा,

"यहाँ हमारे गाँव के सरपंच जी के बेटे की बारात आयी हैंमुझे उसी में जाना हैं।"

"चल हट पागल कही काभला शादी में भी कोई चड्डी-बनियान पहनकर आता हैं।"

"लेकिन मेरी टाई तो देखो शर्त के मुताबिक मैंने टाई लगाई हैं।" मुरारी की बात सुन दरबान ज़ोर-जोर से हँसने लगाऔर उसके हँसने की आवाज़ सुन मुरारी के दोस्त गेट की तरफ आ गए।  

"अरे मुरारी तुझे इतनी देर कैसे हो गयीवो सब छोड़ यारये मुझे अन्दर ही नहीं आने दे रहा।"

"अरे भाई ये जनाब हमारे साथ हैं इन्हे अन्दर आने दो"

मुरारी  के एक दोस्त के कहते ही दरबान बोल पड़ा, "लेकिन इन्होने तो" 

"क्या इन्होने तो" इतना कहते ही उसी दोस्त ने दरबान के हाथ पर चुपचाप कुछ पैसे रखे और साथ ही चुप रहने का इशारा भी किया।

"चल दोस्त आजा अब तुझे कोई नहीं रोकेगा।" और मुरारी तनकर गर्व के साथ अन्दर जाने लगाजैसे कि टाई लगाकर उसने बहुत बड़ा तीर मार लिया होलेकिन टाई लगाकर आने की उत्सुकता में उसने यह तो देखा ही नहीं कि उसके किसी भी दोस्त ने टाई नहीं पहनी हैंबल्कि वो सब तो साधारण से पेंट-शर्ट में ही आए हैं।

"देखो दोस्तों तुम ये बिल्कुल भी सही नहीं कर रहे होमुरारी जैसे भोले-भाले इंसान का इस तरह से मज़ाक बनवाना मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा।"

"अगर तुझे अच्छा नहीं लग रहा तो चला जा यहाँ सेअरे इतना तो हमने भी नहीं सोचा थाहमारी योजना के मुताबिक तो मुरारी की फ़ज़ीहती केवल गाँव में बारात निकलने से पहले गाँव वालों के सामने ही होनी थीलेकिन यहाँ तो उस बेवकूफ़ का मज़ाक शहर वालों के भी सामने बनेगाऔर तू चाहता हैं कि हम इसके मज़े भी ना लेतो तू चला जा यहाँ से हम तो मज़े लेकर रहेंगे।" वहाँ खड़े मुरारी के एक दोस्त के ऐसा कहते ही बाकी सब ठहाका लगाकर हँस पड़े। 

"अरे यह कहाँ अन्दर चले आ रहे होदरबान बाहर निकालो इस भिखारी को" लड़कीवालों के यहाँ से किसी ने चिल्लाकर कहा,

"अरे जनाब देखिए मैं बाराती हूँशर्त के मुताबिक टाई भी लगाकर आया हूँ।"

"मुरारी ने अपनी टाई हाथ से पकड़कर दिखाते हुए कहा,

"यह क्या बक रहा हैंचल निकल यहाँ से"

"अरे यह तो मुरारी हैं लेकिन ये ऐसे क्यों आया।" वहाँ पर मुरारी के गाँव से आए हुए एक सज्जन ने कहाइतने में ही मुरारी के सभी दोस्त वहाँ आ गए,

"देखो दोस्तों यह जनाब मुझे अन्दर ही नहीं जाने दे रहे हैंअब तुम लोग ही समझाओंलगता हैं इन्हे शर्त के बारे में कुछ पता नहीं।" मुरारी के बोलते ही वहाँ खड़े उसके सभी दोस्त ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे,

"क्या हुआ तुम लोग हँस क्यों रहे हो?"  मुरारी आश्चर्य से पूछने लगा

 "अरेबेवकूफ़ आज पहली अप्रैल हैंऔर हम सब ने मिलकर तेरा अप्रैल फूल बनाया हैंदेख हम में से किसी ने टाई लगाई हैं क्या?" मुरारी का अप्रैल फूल बनाया तो हमको मज़ा आया" गाना गाते हुए मुरारी के सभी दोस्त मुरारी के चारो ओर घुमते हुए नाचने लगे। 

 

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