Ishq Mein Gunaah (A Murder Mystery)
इश्क़ कोई गुनाह नहीं, पर गुनाह हैं इश्क़ में गुनाह करना
किसी की जान लेने से मिलता नहीं प्यार अपना
"जिस वक्त कत्ल हुआ
तुम कहाँ थे?"
"साहब जी, मै रसोईघर में शाम के खाने की तैयारी कर रहा था, कुछ पूछने के लिए मेमसाब के कमरे में आया तो देखा कि मेमसाब जमीन पर गिरी
हुई हैं, और उनके पेट में चाकू लगा हुआ हैं" घर के
नौकर रामदीन ने घबराते हुए कहा।
"तुमने किसी को
आते-जाते नहीं देखा?"
"नहीं"
"घर
में और कौन था तुम्हारे अलावा?"
"जी माली, बाहर पौधों में पानी डाल रहा था।"
"कौन
है यहाँ माली?"
"मैं साहब जी"
"क्या
तुमने किसी को आते-जाते नहीं देखा?"
"नहीं"
"घर
में एक आदमी घुसकर घर की मालकिन का कत्ल कर देता हैं, और उस वक्त वहाँ मौजूद दोनों नौकरों में से किसी को कुछ पता ही नहीं चलता, बेवकूफ समझा हैं तुम दोनों ने मुझे, शिंदे गिरफ्तार कर लो दोनों को"
"लेकिन
साहब हमारा कसूर क्या हैं?"
"पुलिस को तुम दोनों
पर शक है।"
"हम
दोनों तों इस घर के बहुत ही वफादार नौकर हैं, पिछले दस सालों से यहाँ काम
कर रहे हैं।" दोनों ही नौकरों ने खुद का बचाव करने की कोशिश की,
"जो कुछ भी कहना हैं थाने जाकर कहना, भास्कर, लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजो।"
"जी
साहब"
पुलिस
स्टेशन पहुँचते ही, "कुछ बताया इन
दोनों ने?"
"नहीं साहब"
"तुम
दोनों शराफ़त से अपना गुनाह कबूल कर लो, नहीं तो मेरे पास ओर भी तरीके हैं तुम्हारी ज़ुबान
खुलवाने के"
"साहब
हमने जब कुछ किया ही नहीं तो क्या कबूल कर लें।"
"मुझे
तो लगता हैं साहब क़त्ल या तो इन दोनों ने किया हैं या फिर क़ातिल इनसे मिला हुआ हैं।"
शिंदे के कहते ही,
"ऐसा कुछ भी नहीं हैं, आप लोगो को बहुत बड़ी गलतफहमी हो रही हैं।" रामदीन ने कहा,
"चुप रहो जितना पूछा जाए उतना ही जवाब दो।"
"जी"
"और तुम माली, घर के बग़ीचे में काम कर रहे थे, तुमने किसी को आते-जाते नहीं देखा?"
"नहीं देखा साहब मैं सच कह
रहा हूँ, बल्कि जब अतुल साहब आए तब भी मुझे पता नहीं
चला, वो तो जब वो वापिस जाने लगे तब मैने उन्हें जाते
हुए पीछे से देखा।"
"अतुल
साहब…..! यह कौन हैं?" इंस्पेक्टर साहब के पूछते ही,
"मीरा मेमसाहब के
पति" माली ने जवाब दिया,
"ओह, किस वक़्त आए थे तुम्हारे ये अतुल साहब?"
"जिस वक़्त रामदीन
चिल्लाया उसके 10 या 15 मिनट पहले ही मैने उन्हें बाहर निकलते हुए देखा"
"और
जब तुम्हारे अतुल साहब बाहर जा रहे थे तब मीरा मेमसाब उन्हें छोड़ने बाहर तक आयी थी?"
"जी
नहीं"
"तो
यह बात हैं, कहाँ हैं इस वक़्त
तुम्हारे साहब?"
"पता नहीं, शायद दुकान वापिस चले गए हो।"
"दुकान….!"
"हाँ अतुल साहब की
इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान की दुकान हैं।"
”तुम्हारे अतुल साहब को तो इस वक़्त यहाँ होना चाहिए था, क्या उन्हें इत्तला नहीं की।"
"फ़ोन किया था
साहब लेकिन फ़ोन बंद आ रहा हैं।" माली के बताते ही,
"शिंदे जहाँ कही भी मिले वहाँ से लेकर आओ इनके अतुल साहब को, वैसे तुम्हारे साहब और मेमसाहब का रिश्ता कैसा था?"
"ज्यादा
अच्छा नही था साहब, दोनों में कुछ
ज्यादा ही झगड़े होते थे।" रामदीन ने कहा।
कुछ देर
बाद-
"इंस्पेक्टर
साहब, क्या हुआ मेरी
पत्नी को? मुझे तो आपके हवलदार ने बताया तो पता
चला" अतुल ने पुलिस स्टेशन में पहुँचते ही हडबडाहट में पूछा
"यह
बात तो मुझे आपसे पूछनी चाहिए मि. अतुल , भोला बनना बंद कीजिए और सीधे-सीधे से बताइए कि
आपने अपनी पत्नी का क़त्ल क्यों किया ?" इंस्पेक्टर
साहब के कहते ही,
ये, ये क्या कह रहे हैं आप? मैं और अपनी पत्नी का क़त्ल, इंस्पेक्टर साहब
आपको कोई गलतफहमी हुई हैं, बल्कि मैं तो दुकान पर था।"
"लेकिन
तुम्हारे माली ने तो हमे बताया कि तुम क़त्ल से 10-15 मिनट पहले घर पर ही थे।"
"हाँ
मैं घर पर आया था, दुकान के कुछ
कागज़ात लेने, इसका मतलब यह तो नहीं कि मैने अपनी पत्नी
का क़त्ल कर दिया, इंस्पेक्टर साहब कुछ तो इंसानियत
दिखाइए, एक तो मेरी पत्नी का क़त्ल हुआ हैं, ऊपर से आप मेरे ऊपर ही इल्ज़ाम लगा रहे हैं।"
"देखिए
अतुल साहब, आप बात को समझने की
कोशिश कीजिए।"
“समझने की कोशिश आप कीजिए, पत्नी गयी हैं मेरी कोई मज़ाक नहीं हो रहा हैं।" अतुल रोने लगा।
अतुल की
हालत देख इंस्पेक्टर साहब ने उसे वापिस भेज दिया, लेकिन अब पुलिस का शक अतुल पर पहले से अधिक हो गया था, क्यों कि उसने हरकतें ही कुछ ऐसी कर दी थी।
मीरा के
अंतिम संस्कार की तैयारियाँ चल रही थी,
"क्या ज़माना आ गया इंसान खुद के घर में भी सुरक्षित नहीं हैं।" वहाँ बैठे एक व्यक्ति ने कहा, "मुझे तो लगता हैं इसके पति ने ही मारा होगा, सुना हैं किसी दूसरी लड़की के साथ चक्कर हैं उसका" अन्य व्यक्ति के बोलते ही, "धीरे बोलो कोई सुन न ले नहीं तो लेने के देने पड़ जायेंगे, सुना हैं सिविल ड्रेस में पुलिस भी यहीं घूम रही हैं।" वहाँ बैठे सभी लोग आपस में जो भी बात कर रहे थे उसका केवल यही नतीजा निकल रहा था कि कही ना कही सभी को अतुल पर ही शक हैं।
"शिंदे
नज़र रखना इस आदमी पर, लोगो की बातों से
तो ऐसा लग रहा हैं कि गड़बड़ इस अतुल ने ही की होगी
"जी
साहब"
"शिंदे, यहाँ लोग अतुल के किसी दूसरी
लड़की से सम्बन्ध के बारे में बात कर रहे हैं पता करो कौन हैं वो"
मीरा के
क़त्ल के केस की छानबीन करने के लिए पुलिस पूरे जी जान से लग गयी, और उसके बाद कुछ ऐसी बातें
सामने आयी जिनके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था, अतुल
एवं मीरा की शादी पाँच साल पहले हुई थी, लेकिन उस वक़्त
अतुल किसी गौरी नाम की लड़की से
प्यार करता था, और यह शादी उसने घरवालों के दबाव में
आकर की थी, दूसरी ओर अपने पति से अच्छे सम्बन्ध नहीं
होने की वजह से मीरा खुश नहीं थी, इसी बात को लेकर दोनों ही पति-पत्नी में आए दिन झगड़े होते रहते थे, दूसरी ओर गौरी के परिवारवालों ने भी उसकी
शादी किसी राजेश नाम के लड़के से कर दी थी, लेकिन यह
दोनों आज भी एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, और गौरी
लगातार अतुल पर मीरा को तलाक देने के लिए दवाब ड़ाल रही
थी, और अतुल भी जल्द से जल्द मीरा से पीछा छुड़ाना चाहता
था और उसे तलाक देने की पूरी तैयारी भी कर ली थी, लेकिन
मीरा तलाक के लिए तैयार नहीं थी, वो चाहती थी कि अतुल
गौरी का साथ छोड़ दे, और उसके साथ सुखी जीवन बिताए, अतुल ने मीरा को हर तरह से समझाने की कोशिश की लेकिन वो मानने को तैयार ही
नहीं थी, दूसरी ओर गौरी के पति राजेश भी सारी हक़ीक़त से
वाकिफ़ थे, और वो भी ग़ौरी को तलाक़ नहीं देना चाहते थे, अतुल इस वक़्त ज़िन्दगी के दौराहे पर खड़ा हुआ था एक तरफ तो मीरा गौरी का साथ
छोड़ने के लिए बोल रही थी तो दूसरी ओर गौरी मीरा का साथ छोड़ने के लिए कह रही थी, इसी वजह से आजकल अतुल कुछ ज्यादा ही गुस्सा करने लगा था, और उसका सारा गुस्सा मीरा पर ही निकलता क्यों कि वो मीरा से पीछा छुड़ाना
चाहता था ना कि गौरी से, दूसरी ओर गौरी के घर में भी
हालात कुछ ऐसे ही थे।
"शिंदे अबतक जो कुछ
भी अतुल के बारे में पता चला हैं उससे तो यही साबित होता हैं कि क़त्ल उसी ने किया
होगा, लेकिन हमारे पास कोई सबूत नहीं हैं।"
"आपने
सही कहा साहब हर क़ातिल क़त्ल करने के बाद कुछ ना कुछ सबूत छोड़ ही जाता हैं, लेकिन यह क़ातिल तो बहुत ही
शातिर हैं, देखिए ना चाकू पर से भी अपनी उँगलियों के
निशान पोंछ दिए थे उसने, इतना आसान नहीं होगा इस कातिल
को पकड़ना।"
"मुझे
लगता हैं हमें एक बार फिर से गौरी से पूछताछ करनी चाहिए, कुछ ना कुछ सुराग
तो हाथ लग ही सकता हैं, गाड़ी निकालो हमें इसी वक़्त गौरी
के घर जाना चाहिए।"
"जी....
जी साहब" और उसी समय इंस्पेक्टर साहब, हवलदार शिंदे, और तीन-चार पुलिसकर्मी गौरी के घर की ओर रवाना हो गए।
"शिंदे, तुम सब पूरे घर की तलाशी लो"
"तलाशी? लेकिन सर्च वारंट कहाँ हैं?" गौरी के पति राजेश के पूछते ही इंस्पेक्टर ने तुरन्त अपनी जेब से सर्च वारंट निकालकर दिखा दिया,
"ये रहा सर्च वारंट, अब तो कोई आपत्ति नहीं हैं आपको, घर की तलाशी
लेने में?"
"जी नहीं, लेकिन मेरी समझ में नहीं आ रहा हैं कि मीरा के क़त्ल का हमसे क्या
लेना-देना" "ओह क्या बात कह रहे हैं आप राजेश साहब, वाकई में हक़ीक़त से अन्जान हैं या हमारे सामने नाटक कर रहे हैं।"
"देखिए
इंस्पेक्टर साहब मैं जानता हूँ कि मेरी पत्नी शादी से पहले अतुल को पसन्द करती थी, लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं हैं, हम अपनी मैरिड-लाइफ में खुश हैं।"
"यह
जानकार अच्छा लगा कि आप दोनों खुश हैं, लेकिन क्या करे हमे भी अपनी ड्यूटी करनी हैं।"
और इंस्पेक्टर साहब और हवलदार शिंदे घर की तलाशी लेने में लग गए, लेकिन कुछ भी ऐसा बरामद नहीं हुआ जिससे कि गौरी पर शक किया जा सके,
"आपकी पत्नी गौरी
नहीं दिखाई दे रही"
"वो किसी काम से बाहर गयी हैं।"
"ठीक हैं तो हम उनका इंतज़ार कर लेते हैं, वैसे कितनी देर में वापिस
आयेंगी वो?"
"जी वो तो शहर से बाहर गयी हैं।"
"क्या शहर से बाहर?, आपने उन्हें हमसे पूछे बिना
जाने क्यों दिया"
"जी
उसकी मम्मी की तबियत ठीक नहीं थी सो उनसे मिलने गयी हैं, आ जाएगी एक-दो दिन में"
"आप
इसी वक़्त उनको फ़ोन करके वापिस आने के लिए कहिए।" इंस्पेक्टर साहब का शक गौरी
के ऊपर अब बढ़ने लगा था,
"साहब यह गुत्थी तो
उलझती ही जा रही हैं।"
"देखो
शिंदे, यह बात तो पक्की
हैं की क़त्ल अतुल या गौरी में से किसी ने किया हैं, क्यों
कि सिर्फ क़त्ल हुआ हैं घर से कोई भी सामान गायब नहीं हैं, यानि क़त्ल लूट के इरादे से तो नहीं हुआ, आपसी
रंजिश थी कोई, और हम राजेश पर भी शक नहीं कर सकते मीरा
के जाने से उसका तो नुकसान ही हैं।"
"मैंने
गौरी को फ़ोन कर दिया हैं वो शाम तक वापिस आ जाएगी।" राजेश ने कहा,
"ठीक हैं, अभी तो हम चलते हैं, जैसे ही आपकी पत्नी वापिस
आए उन्हें लेकर पुलिस-स्टेशन आ जाना, कुछ पूछताछ करनी
हैं।" ऐसा कहते ही इंस्पेक्टर साहब और हवलदार
शिंदे वहाँ से बाहर निकल गए, "शिंदे इस आदमी पर भी नज़र रखो मुझे इस पर भी शक हैं।
"लेकिन साहब"
"जैसा कहा हैं वैसा करो"
"जी साहब"
अभी मीरा के क़त्ल की गुत्थी सुलझी भी नहीं थी कि राजेश की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गयी,
"मैंने तो सुना था कि राजेश एक
बहुत ही अच्छा ड्राइवर हैं फिर ये सब कैसे…..!" इंस्पेक्टर साहब ने आश्चर्य से पूछा,
"सर जी, सड़क दुर्घटना सामने वाले की गलती से भी तो हो सकती हैं|"
"हाँ सो तो हैं फिर भी उसकी गाडी चेक करने के
लिए भेजो।"
"अब साहब के दिमाग में क्या चल रहा हैं।" शिंदे अपनेआप में ही बड़बड़या, राजेश की गाड़ी चेक करने के भेजी गयी तो रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली बात सामने आयी, राजेश जो गाड़ी चला रहा था उसके ब्रेकफेल थे, पुलिस की जाँच और फिंगरप्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक यह काम गौरी का था और जल्द ही उसने पुलिस के सामने अपना गुनाह क़बूल भी कर लिया।
"गौरी जी फिर तो आपको यह
भी पता होगा कि मीरा का क़त्ल किसने किया था।"
"अतुल ने, मीरा को और राजेश को मारने की
हम दोनों ने प्लानिंग की थी, अतुल ने तो अपने काम को
अंजाम प्लानिंग के मुताबिक ही दिया, लेकिन मीरा के केस
की जाँच-पड़ताल आप लोगो ने इस ढंग की, कि मैं अपने काम
को अंजाम नहीं दे पाई, दूसरी ओर आप लोगो को मेरे ऊपर भी शक था।" गौरी
ने एक ही साँस में सब कह दिया,
"तो फिर अब कैसे?" इंस्पेक्टर साहब के पूछते ही,
"राजेश को मेरी और अतुल की
प्लानिंग के बारे में पता चल गया था, और उसने सारी
सच्चाई आपको बताने की बात कही थी, जिसे सुनकर मैं ड़र गई"
"सर, यह देखिए मैं अतुल को भी ले आया हूँ" अतुल को लगभग धक्का मारते हुए शिंदे ने कहा,
"शिंदे, यह
तुमने अच्छा किया, अब पूरी ज़िन्दगी साथ रह सकते हैं ये दोनों जेल में"
इंस्पेक्टर साहब ने अपना डंडा अतुल के पैर पर मारते हुए जैसे ही कहा वो तडफडाने लगा।
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