Chiraag Weds Kayraa (Story On Love)


ना जाने कब हुआ अह्सास इश्क़ का हमें

ना जाने कब छूट गया पीछे बचपन हमारा


आज सुबह से ही नवीन जी के घर पर मेहमानों की चहल-पहल हो रही हैंघर को बेहद ही खूबसूरती से सजाया जा रहा हैंघर के आँगन में हलवाई की भट्टी जल रही हैंजिसमे तरह-तरह मिठाईयाँ बनाई जा रही हैंऔर ये सब हो भी क्यों नाआज नवीन जी के बेटे चिराग की शादी जो हैंवो भी उन्ही के किराएदार की बेटी कायरा के साथइसीलिए तो घर में इतनी धूम-धाम हैंएक ही घर में दो-दो शादियाँ जो हैंलड़का भी उसी घर का और लड़की भी उसी घर कीयक़ीनन दुनिया की अनोखी शादी होगी येवैसे इस शादी के पीछे भी एक मज़ेदार किस्सा हैं।

लगभग बीस साल पुरानी बात हैंनवीन जी अपनी पत्नी अनुराधा के साथ अपने घर के बगीचे में बैठे सुबह की चाय पी रहे थेकि वहाँ एक दंपती अपनी पाँच साल की बच्ची के साथ किराए  के घर की तलाश में आया, "नमस्ते"

"जी नमस्तेलेकिन मैंने आपको पहचाना नहीं"

"जी मैं विपिनयहाँ रहने के लिए किराए के मकान की तलाश में आया हूँ।"

"ओहतो आपको श्याम जी ने भेजा हैं।"

"जी"

"आइए आप मेरे साथमैं आपको घर दिखा देता हूँनवीन जी विपिन एवं उसके परिवार को लेकर पहली मंज़िल पर घर दिखाने ले गए। "देख लीजिए आपये घर का वो हिस्सा हैं जो हमें किराए पर देना है” पहले तो विपिन एवं उसकी पत्नी माधुरी ने घर कुछ देर तक काफी बारीकी से देखा फिर,

"किराया कितना हैं इसका?"

"जी पाँच हज़ार" किराया सुन विपिन और माधुरी ने इशारों ही इशारों में एक दूसरे से कुछ कहा फिर,

 "हमें आपका घर पसन्द हैंकब आ जाए यहाँ रहने?" विपिन के पूछते ही,

"जब आप चाहे"

 "ठीक हैं तो हम कल ही आ जाते हैं" उस दिन तो बाकी की सारी बातें तय कर विपिन एवं उसका परिवार वापिस चला गयालेकिन अगले दिन सुबह-सुबह ही उनका सामान से लदा हुआ ट्रक नवीन जी के घर के बाहर खड़ा था।

विपिन एवं माधुरी को आए एक महीनें से ज्यादा गुज़र चुका थाएवं वो अपनी छोटी-सी बच्ची कायरा के साथ अब उस घर में अच्छे से एडजस्ट हो चुके थेएवं उनको मकान मालिक के रूप में बड़ा भाई और मालकिन के रूप में भाभी मिल चुकी थीगुज़रते वक़्त के साथ दोनों ही परिवारों में इतनी एकता हो गयी कि जो इन्हे नहीं जानता था वो इन्हे भाई समझता थामाधुरी एवं अनुराधा भी बहनों की तरह से ही रहतीजहाँ विपिन एवं माधुरी की एक बेटी कायरा थी वहीं दूसरी ओर नवीन जी और अनुराधा का एक बेटा चिराग थाये दोनों बच्चे भी आपस में बहुत मिलजुलकर रहतेसाथ खेलनासाथ पढ़नासाथ ही खानाएक ही स्कूल में जानाकभी-कभी तो आलम यह हो जाता की कायरा जब अपने ननिहाल जाती तो चिराग भी उसके साथ जाताऔर जब चिराग अपने ननिहाल जाता तो कायरा भी जातीइसी प्रकार एक-दूसरे के साथ रहते-रहते दोनों बच्चे बड़े हो रहे थेऔर एक दूसरे के प्रति इनकी भावनायें भी बदल चुकी थीजहाँ अब तक ये एक दूसरे को अपना दोस्त समझते थे, वहीं पिछले कुछ वक़्त से ये रिश्ता दोस्ती से कुछ आगे बढ़ चुका था।

"चिरागक्या तुमने अंकल, आंटी को बताया कि हम एक दूसरे को लाइक करने लगे हैं" "नहींऔर बताता तो तुम्हे पता नहीं चलता क्याआखिरकार एक ही घर में तो रहते हैं हम" "हाँ लेकिन तुम नीचे रहते हो और मैं ऊपर"

"तो इससे क्या फर्क पड़ता हैंकहीं भी रहो पड़ी तो हर वक़्त हमारे यहाँ ही रहती हो तुम" "और तुम जो घंटों-घंटों तक हमारे यहाँ पड़े रहते हो उसका क्या"

"अच्छा छोड़ो अब ये लड़ाईकल संडे हैं मूवी देखने चले?"

 "हम्म्मनहीं" कायरा ने मुँह बिगाड़ते हुए जैसे ही ना कहा,

 "क्यों…!"

 "बस मेरा मन नहीं हैं।"

"तो फिर क्या करना हैं?"

"कुछ नहीं बस घर पर रहेंगे।"

"अरे कैसी लड़की होतुम्हे अपने बॉय-फ्रेंड के साथ बाहर घूमने का मौक़ा मिल रहा हैं, और तुम घर पर रहना चाहती हो।"

"हाँ चिरागअभी तो हम कॉलेज के बहाने मिल रहे हैं संडे को क्या कहेंगे।"

 "लेकिन हम पहले भी तो संडे को कई बार मूवी देखने गए हैं नाऔर इस बारें में घरवालों को पता भी हैं।"

"हाँ लेकिन अब कुछ अजीब सा लगता हैं" कायरा ने अपनी नज़रे झुका शर्माते हुए कहा।

"चलो ठीक हैंकल घर पर ही रहते हैंवैसे तुम शर्माती हुई अच्छी लगती हो।" चिराग के कहते ही कायरा ने झट से अपना चेहरा अपनी हथेलियों के पीछे छुपा लियाबस कुछ-कुछ ऐसे ही गुज़रता था इन दोनों का कॉलेज के बाद का कुछ वक़्तलेकिन दोनों में से किसी की भी हिम्मत नहीं थी कि घरवालों को अपने हाल-ए-दिल की जानकारी दे देंलेकिन कहते हैं इश्क़ छुपाना आसां नहींऔर इनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआएक दिन इन दोनों को पार्क में मिलते हुए इन्ही के एक पड़ोसी ने देख लियाफिर क्या थाये घर पहुँचते उससे पहले इनकी शिकायत पहुँच गयी।

"कायराऊपर आओ" कायरा हर बार की तरह से आज भी कुछ देर अनुराधा के पास बैठ बातें करना चाहती थीलेकिन विपिन ने आवाज़ देकर बुला लियाऔर इधर ऊपर जाते-जाते कायरा ने सुना कि अनुराधा एवं नवीन जी भी चिराग को किसी बात पर डांट रहे हैं।

"ये आज क्या हो गया हैं सबको कायरा बड़बड़ाती हुई ऊपर पहुँची, "पापा क्या हुआ?" "कॉलेज के बाद कहाँ गयीं थी तुम?"

"कहीं नहींसीधा घर ही आ रही हूँ।"

"क्या तू चिराग के साथ नेशनल पार्क में नहीं थी?"

"हाँ थीलेकिन तो क्या हो गया"

“सच-सच बता क्या हैं तेरे और चिराग के बीच में" कायरा को कतई भी उम्मीद नहीं थी कि उससे यह सवाल यूँ अचानक से पूछा जाएगा।

कुछ देर तक कमरें में चुप्पी छायी रही फिर, "बोल कायरा तेरे पापा कुछ पूछ रहे हैं।" माधुरी के कहते ही,

"मैं चिराग को पसन्द करती हूँ" कायरा के कहते ही नवीन जी की दिल दहलाने वाली आवाज़ नीचे से आयी,

"विपिन जी नीचे आइएमुझे आपसे एक ज़रूरी बात कहनी हैं।" विपिन कायरा की ओर गुस्से से देखते हुए नीचे चले गए और पीछे-पीछे माधुरी भी चल दी।

"जी भाई-साहब कहिए"

"जितना जल्दी हो सके अपना सामान बाँधिए और इस घर से रुखसत हो जाइये।"

"अब तो हम भी इस घर में किस मुँह से रहेंगेबस आप कुछ दिनों का वक़्त दीजिएजैसे ही कोई घर मिलता है हम यहाँ से चले जायेंगे।" ऐसा कहते ही विपिन एवं माधुरी ऊपर की ओर जाने ही लगे।

"रुक जाइये अंकलमुझे आप सब लोगो से कुछ कहना हैंकायरा तुम भी नीचे आ जाओ।" चिराग ने कायरा को भी आवाज़ देकर नीचे बुला लिया।

"मैं और कायरा एक दूसरे से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं।" एकाएक ही चिराग ने सबके सामने कायरा का हाथ पकड़कर ऐलान कर दिया।

"हाय राम कितना बेशर्म लड़का हैं ये"

"ख़बरदार माधुरी जो मेरे बेटे के बारे में एक भी शब्द कहा तोअरे बेशर्म तो तुम्हारी लड़की हैं जिस घर में रहती हैं उसी घर के लड़के पर डोरे ड़ालती हैं।" माधुरी और अनुराधा के बीच उस वक़्त काफी बहस हुईयहाँ तक की नवीन जी एवं विपिन भी एक दूसरे को अनाप-शनाप कहने से नहीं चुकेघर का इस कदर गरमाया हुआ माहौल देख कायरा बुरी तरह से घबरा गयी, एवं ऊपर अपने कमरे में जाकर फूट-फूटकर रोने लगीनीचे चिराग के हालात भी कुछ कायरा जैसे ही थेबस फर्क इतना था कि वो रो नहीं रहा थाउस दिन के बाद से दोनों घरों में आना-जाना एवं बातचीत बिल्कुल बंद हो गयीविपिन आजकल दिन-रात एक नए मकान की तलाश में रहतेलेकिन किस्मत को शायद कुछ अच्छा होना मंज़ूर था, इसलिए एक दिन वहाँ चिराग के मामा फ़रिश्ता बनकर आ गए।

"मुझे शान्ति से समझाइये दीदी इस रिश्ते में बुराई क्या हैं।" चिराग के मामा के पूछते ही,

"तू क्या चाहता हैं कि मैं उस बेशर्म लड़की को अपने घर की बहु बनाऊँअरे जिस घर में रही उसी घर के लड़के को फँसा लिया उसने"

"क्या पता तुम्हारे लड़के ने उसे फँसाया होवो भी तो प्यार करता हैं ना उससे"

"नहीं ऐसा नहीं हो सकता मैं अच्छे से जानती हूँबहुत ही भोला हैं मेरा बच्चा"

"दीदीजानती तो आप कायरा को भी हो बचपन सेक्या वो भोली नहीं हैं?" अनुराधा अपने भाई की बातों में बुरी तरह से फँस चुकी थी।

"दीदी ज्यादा मत सोचिएबस इस रिश्ते के लिए हाँ कर दीजिएलड़की आप लोगो की देखी हुई हैंघर-परिवार सब आपके सामने हैंदोनों बच्चे एक दूसरे को पसन्द करते हैंऔर दोनों बचपन से साथ हैंअगर प्यार हो गया तो क्या हुआ" अपने भाई की बातों ने अनुराधा को सोचने पर मज़बूर कर दिया।

 "अब ज्यादा मत सोचिए दीदीजीजाजी को लेकर ऊपर जाइये और अपने बेटे का रिश्ता तय कर आइये" उसी वक़्त अनुराधा मुस्कुराती हुई उठी और शगुन का नारियल ढूँढ़ने लगी।

उस दिन दोनों परिवारों के बीच काफी देर तक माफ़ी माँगने का सिलसिला चलता रहाऔर फिर सभी की रज़ामंदी से यह रिश्ता तय हो गया।

"कोई कुछ भी कहे लेकिन धन्यवाद का असली हक़दार तो मैं ही हूँ।"

"बिल्कुलसाले साहबहीरो वाली एंट्री हुई हैं आपकी तो इस पिक्चर में"

"धन्यवाद भाई-साहबआँखे खोल दी आपने तो हम सबकीनहीं तो चिराग जैसा अच्छा दामाद खो देते हम" विपिन ने चिराग के मामा का शुक्रिया अदा करते हुए कहाफिर उसके बाद उस घर में शादी की तैयारियों का सिलसिला कुछ ऐसा शुरू हुआ कि सारी कॉलोनी देखती रह गयीऔर आज चिराग एवं कायरा की शादी हैंघर के बाहर नवीन जी एवं विपिन ने खुद अपने हाथों से सजाया हैं चिराग वेड्स कायरा।

 

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