Sshh..... Kisi Se Kuch Naa Kahna (Article On Sexual Harassment)


कैसे भूल सकती हैं मानसी  वो दिन, उस दिन ने उसके बचपन को जो कुचल डाला था, मात्र 11 साल की ही तो थी वो जब उसके बुआ के बेटे 20 वर्षीय गगन ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की थी, और वो बेचारी तो अपनी कज़िन भाई की इस हरक़त को समझ ही नहीं पा रहीं थी, बस अपने कज़िन द्वारा इधर-उधर हाथ लगाना उसको परेशान ज़रूर कर रहा था।  

"भैया ये क्या कर रहे हो मुझे गुदगुदी  रहीं हैं, हम सब तो लुका-छुपी खेल रहे थे ना, और हम दोनों इस कमरें में छुपने के लिए आए थे फिर आप कमरा बंद करके मुझे गुदगुदी क्यों करने लगे, भैया प्लीज छोड़ो मुझे बाहर जाना हैं, आपका ये व्यवहार मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा हैं, बहुत डर लग रहा हैं आपसे आज" ऐसा नहीं था कि गगन ने कभी मानसी को छुआ नहीं था लेकिन  स्पर्श कुछ हटकर था, इससे मानसी को असुविधा  रही थी  

"बस मानसी कुछ नहीं होगा, जो भी हो रहा हैं उसे एन्जॉय करो, लेकिन इसके बारें में किसी से कुछ मत कहना।" 

"क्यों नहीं कहना, मैं तो सबको बताऊँगी की कमरा बंद करके गगन भैया मेरे ज़बरदस्ती गुदगुदी कर रहे थे।" 

"मानसी.....खबरदार जो किसी से कुछ भी कहा मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।" ये बात गगन ने लगभग मानसी का गला दबाते हुए कही, और गगन की ये हरकत मानसी के दिल को दहलाने के लिए पर्याप्त थी। वो बुरी तरह से डर चुकी थी, वो चाहती थी की कम से कम अपनी माँ को तो अपने कजिन भाई की इस अज़ीब हरक़त के बारें में बताए लेकिन उसका गला दबाकर दी गयी धमकी उसे ऐसा करने  रोक रही थी, फिर भी एक दिन जब मानसी ने हिम्मत करके अपनी माँ को सबकुछ बता ही दिया। 

"देख मानसी आज तो तूने बोल दिया लेकिन आज के बाद इस बात के बारें में किसी को मत बताना, बेटा इससे तेरी बदनामी होती हैं, और अगर बात ज्यादा फ़ैल गयी तो जब तू बड़ी होगी तेरी शादी में अटकलें आएंगी।

"लेकिन माँ, भैया ऐसे क्यों कर रहे थे।" 

"मानसी बेटा ध्यान से सुन मेरी बात, गगन लड़का हैं, लड़कों की तो फ़ितरत ही ऐसी होती हैंउसकी कोई गलती नहीं हैं, गलती तुझसे ही हुई होगी। 

"मुझसे......! मैं कुछ समझी नहीं माँ" 

"बेटा, अब तू बड़ी हो रही हैं, कपड़े ढंग से पहना कर, मैं आज ही बाज़ार जाकर तेरे लिए तीन-चार जोड़ी सलवार-सूट सिलवा देती हूँ, अब से तू उन्ही को पहनना, और जहाँ तक हो सके गगन से दूरी बनाए रखना। क्योंकि कुछ भी ऊँच-नीच हो गयी तो हम समाज में मुँह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।" 

"माँ, गगन भैया ने मेरा गला दबाने की कोशिश की क्या आप इसके लिए भी भैया को नहीं डाटेंगी।" 

"दिमाग ख़राब हो गया हैं क्या तेरा, अगर मैं उसे डाटूँगी तो कमरें में क्या हुआ था ये बात फ़ैल नहीं जाएगी।" 

"माँ लेकिन...!" 

"बस मानसी अब इस बारें में कोई बात नहीं, तू भी सबकुछ भूल जा मैं भी भूल जाती हूँ।" ऐसा कहकर मानसी की माँ अपने कामों में लग गयी, और छोड़ गयी उसे उसके ज़ेहन में उठते हज़ारों सवालों के साथ। 

"दिन पर दिन गुजरते गए मानसी के ज़ेहन से अपनी कजिन द्वारा की गयी वो आपत्तिजनक हरकत की यादें हट ही नहीं रही थी, और अगले कुछ हफ़्तों तक शान्ति का माहौल देख गगन ने गलत मतलब निकाल लिया, उसने समझा की मानसी को उसके द्वारा की गयी हरकत से कोई ऐतराज़ नहीं हैं, और इसी वजह से गगन अब मानसी पर हावी होने लगा. 

 जब भी वो मानसी से मिलता उसे गंदे-गंदे इशारे करता, उसके इधर-उधर हाथ लगता, जो की मानसी को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता, लेकिन अपनी माँ के द्वारा कही गयी बात की वजह से वो सबकुछ सहन करती रहती और इसी प्रकार कई सालों तक मानसी अपने कज़िन के द्वारा किए जाने वाले आपत्तिजनक हरकतों का शिकार होती रही। और घुट-घुटकर जीती रही। 

इसी प्रकार की अनगिनित घटनाये हमारे देश में आए दिन होती हैं, और लड़कियों को चुप करवाकर एक तरफ बैठा दिया जाता हैं, उनके पहनावे पर उँगलियाँ उठाई जाती हैं, वक़्त-बेवक़्त घर से निकलने पर रोक लगा दी जाती हैं, शादी की उम्र हुई नहीं कि उसके लिए लड़के देखने शुरू कर दिए जाते हैं, शायद इस वजह से की एक बार शादी का ठप्पा लग जायेगा तो कोई लड़का उसकी तरफ आँख उठाकर नहीं देखेगा, उनकी पढाई पर रोक लगा दी जाती हैं, और भी ना जाने कितनी ही बंदिशें और यही डर लड़कों को ग़लत हरकतें करने की हिम्मत देता हैं। ऐसा नहीं हैं की बदलते ज़माने के साथ लोगों की सोच नहीं बदल रही हैं, आज के समय में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसके ख़िलाफ़ आवाज़ भी उठाते हैं, किसी से भी डरें बग़ैर अपनी बेटियों के साथ खड़े होते हैं, लेकिन अफ़सोस एक बड़ा तबका ऐसे लोगों का भी हैं जो की मानसी की माँ की श्रेणी में आता हैं, जो की गलत हैं। ये सबकुछ तब ही रुकेगा जब हम लड़कों को लड़कियों की इज़्ज़त करना सिखाएंगे, उन्हें बताएँगे की लड़कियाँ कोई भोग की वस्तु नहीं हैं वो भी उनकी ही तरह एक इंसान हैं, उन्हें भी इज़्ज़त के साथ समाज में रहने का हक़ हैं। और उसके बाद भी अगर कोई लड़का ये बात ना समझे तो तो उसे ये कहकर समझाना चाहिए की जो हरक़त वो कर रहा हैं वो उसकी बहन के साथ भी हो सकती हैं, तो शायद उसे कुछ समझ में आए जिसकी भी उम्मीद काफी कम हैंनहीं तो ना जाने कितनी ही लड़कियाँ घुट-घुटकर जीती रहेंगी और समाज के डर से अपनी ज़ुबान भी नहीं  खोलेंगी। बहुत ज़रूरी हैं लड़कियों के प्रति लड़कों की सोच बदलना, उन्हें लड़कियों की इज़्ज़त करना सिखाना, नहीं तो इसी प्रकार लड़कियाँ मर-मरकर जीती रहेंगी बिल्कुल मानसी की तरह, यूँ तो हमारें देश में अनगिनित मानसी हैं और हमें अब आगे किसी भी लड़की को मानसी बनने से एवं किसी भी लड़के को गगन बनने से रोकना होगा तब ही हमारा देश प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगा। 


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