Badla (Story On Revenge)


सुबह के सात बजे थे और उत्तर भारत के एक छोटे से शहर में बने एक महिलाश्राम की रसोई में चाय-नाश्तें की तैयारी चल रही थी, इतने में ही वहाँ उस आश्रम की शुरुआत करने वाली चालीस वर्षीय गीत दीदी आ गयी, क्या हुआ, अभी तक चाय नहीं बनी, बहुत वक़्त बर्बाद करती हो तुम सब फालतू की बातों में' गीत दीदी के कहते ही

'दीदी, ये लीजिए आपकी चाय, और आपसे एक बात पूछनी थी ' उनमे से एक महिला सारिका ने गीत के हाथ में चाय का कप पकड़ाते हुए कहा। 

'हाँ पूछो

'दीदी आज इतवार हैं, और हमारे पास आज कुछ ज्यादा काम भी नहीं हैं तो क्या हम फिल्म देख आए।

'हाँ ठीक हैं जाओ, लेकिन लौटने में रात नहीं होनी चाहिए।' गीत के कहते ही

'नहीं होगी दीदी, लेकिन आप भी तो चल रहे हो हमारे साथ' इतने में ही वहाँ बैठी अनु बोल पड़ी। 

'अरे नहीं अनु, मुझे तो तुम लोग बख्श ही दो, बल्कि मैं आज पूरा दिन आराम करने के मूड़ में हूँ। 

'क्या हुआ तबीयत तो ठीक हैं ना दीदी आपकी' अनु के पूछते ही

'हाँ, हाँ बिल्कुल ठीक हैं, कभी-कभार शरीर को भी थोड़ा आराम मिलना चाहिए, अच्छा अब मैं अपने कमरें में जा रही हूँ, तुम नाश्तें की तैयारी करके जाने के लिए तैयार हो जाना, और हाँ मेरे दोपहर के खाने की चिंता मत करना, मैं खुद ही कुछ बना लूँगी।

'लेकिन दीदी, आप कैसे' सारिका के पूछते ही

'सारिका, मुझे आता हैं खाना बनाना, अब जाने की तैयारी करो और मेरी चिंता छोड़ दो।' इतना कह गीत अपने कमरे में जा आराम कुर्सी पर बैठ चाय पीने लगी।

 

दस साल पहले की बात हैं जब गीत ने  महिलाश्रम की  शुरुआत  थी, उसने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था की ज़िन्दगी में कभी वो एक महिलाश्रम भी चलाएगी, बात तब की हैं  जब गीत का एडमिशन बी. टेक फर्स्ट ईयर में हुआ था, उसका सिर्फ एक ही सपना था, एक होनहार सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना, और अपने डांस करने के शौक को पूरा करनालेकिन ऐसा हो ना सका और उसकी किसी पर अति विश्वास करने की गलती ने उसकी ज़िन्दगी बर्बाद कर दी। 

 

 तक़रीबन बाईस साल पहले, 'वाह क्या बात हैं ध्रुव, तुम तो मेरे लिए बहुत ही प्यारा गिफ्ट लेकर आए हो।

'गीत, आज तुम्हारा जन्मदिन हैं, भला तुम्हे मैं कोई छोटा-मोटा गिफ्ट कैसे दे सकता था।

'हाँ वो सब तो ठीक हैं लेकिन इतना महँगा डायमंड का ब्रेसलेट देने की क्या ज़रुरत थी......और तुम्हारे पास इतने पैसे आये कहाँ से

'गीत, अब तुम मेरे गिफ्ट की तौहीन कर रही हो, कहीं से भी आये हो पैसे, तुम्हे उससे क्या, तुम तो ये बताओ की गिफ्ट पसंद आया या नहीं' ध्रुव के पूछते ही

'बहुत पसंद आया, ध्रुव तुम जानते हो इतना कीमती तोहफ़ा पहली बार किसी ने मुझे दिया हैं।

'और तुम्हारे पहनते ही ये अनमोल हो गया।

'ओह ध्रुव आई. लव. यू.' गीत ऐसा कहते ही ध्रुव के गले से जा लगी।

ध्रुव और गीत एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे, उनकी पहली मुलाकात तक़रीबन चार महीनें पहले गीत की एक फ्रेंड साक्षी की बर्थडे पार्टी में उसके घर पर हुई थी, उसके बाद तो जैसे इनका रोज़ ही मिलना होता, ध्रुव आये दिन गीत के लिए तोहफ़े लेकर आता, तो कभी उसे महँगे रेस्टोरेंट में खाना खिलाने ले जाता, वो कभी पूछती की मुझ पर इतना ख़र्चा क्यों कर रहे हो तो नाराज़ हो जाता, ध्रुव का इतना कुछ करना गीत के लिए अजीब था, और आज ये इतना कीमती तोहफ़ा देखकर तो वो ये सोचने पर मज़बूर हो गयी की आखिर माज़रा क्या हैं, लेकिन उसके मन में क्या चल रहा हैं ये उसने ध्रुव को महसूस भी नहीं होने दिया, और उसके साथ प्यार भरी बातें करने लगी। 

'गीत, आज तो तुम्हारे घर पर पार्टी होगी ना' ध्रुव के पूछते ही

'नहीं कोई पार्टी-वार्टी नहीं हैं, मेरी छोटी-बहन के बोर्ड एग्जाम हैं इस बार, इसलिए घर में बस शांति ही शांति हैं।' गीत के कहते ही

'ग्रेट, तो फिर आज मेरी तरफ से पार्टी

'ध्रुव, तुमने महँगा तोहफ़ा दिया हैं और अब ये पार्टी की बात कर रहे हो, क्या ज़रुरत हैं इतना ख़र्चा करने की

'याद हैं पिछले महीनें जब तुमने तुम्हारे कॉलेज में होने वाला डांस कॉम्पिटिशन जीता था तब भी पार्टी देने से रोका था, और आज भी रोक रही हो, क्या तुम्हे मेरे साथ अपनी ख़ुशी बाँटना अच्छा नहीं लगता।

'नहीं ध्रुव ऐसी कोई बात नहीं हैं, लेकिन तुम जब ज़रुरत से ज्यादा खर्चा करते हो तो मुझे अच्छा नहीं लगता।

'गीत, मेरे पास पैसे हैं इसलिए ख़र्च करता हूँ, और गर्ल-फ्रेंड्स तो अपने बॉय फ्रेंड का खर्चा करवाती हैं और तुम हो की मना करती हो।

'अच्छा बाबा गलती हो गयी अब मना नहीं करूँगी.......अब ये तय रहा की आज की पार्टी तुम्हारी ओर से, अब बताओ कहाँ चलना हैं।' गीत कहते ही

'पहले अपनी आँखों पर ये पट्टी बाँधो और साथ चलो, सरप्राइज़ हैं तुम्हारे लिए

'ओह्, तो जनाब ने पूरी प्लानिंग पहले से ही की हुई थी।' और फिर ध्रुव ने गीत की आँखों पर पट्टी बाँध दी और अपनी मोटर-साइकिल के पीछे बिठाकर ले गया।

 

कुछ देर बाद मोटर-साइकिल के रुकते ही, 'पहुँच गए हम ध्रुव

'हाँ

'तो फिर मेरी पट्टी खोलो ना

'गीत, सब्र करो, मेरा हाथ पकड़ो और मेरे साथ चलो।

'लेकिन ध्रुव तुम मेरी आँखों की पट्टी क्यों नहीं खोल रहे हो।

'बड़ी जल्दी हैं छोरी तुझे अपनी आँखों की पट्टी खुलवाने की

'कौन, कौन ध्रुव ये किसकी आवाज़ थी, तुम जानते हो इसे

'बिल्कुल जानता हैं, अरे तुझ पर ख़र्चा करने के लिए पैसे मैं ही तो देता था इसे, और इस ब्रैसलेट ने तो मुझे कंगाल ही कर दिया, तो मैंने सोचा की अब समय आ गया सारे पैसे वापिस वसूलने का

'मैं.... मैं कुछ समझी नहीं, और तुम कौन हो, ध्रुव, ध्रुव कहाँ हैं, ध्रुव, ध्रुव' गीत चिल्लाने लगी।

'चुप, चुपकर ख़बरदार जो एक भी शब्द मुँह से निकाला।' ये आवाज़ ध्रुव की थी।

'ध्रुव, ये क्या कह रहे हो तुम, मैं तुम्हारा प्यार हूँ।'

'प्यार माय फुट, वो तो तुझे अपने जाल में फँसाने के लिए मैंने प्यार का नाटक किया था....और अब उतार ये ब्रेसलेट, तेरे बाप के पैसों से नहीं आया हैं ये जो शान से पहनकर खड़ी हैं।

'ध्रुव, ये तुम क्या कह रहे हो, और अब कम से कम मेरी पट्टी तो खोल दो।

'पागल समझा हैं हमें' और ऐसा कहते ही ध्रुव गीत के हाथ से ब्रैसलेट उतारने लगा, और फिर उसे ज़बरदस्ती एक कोठरी में बंद कर दिया, गीत चिल्लाती रही, अपने बचाने की गुहार लगाती रही नहीं लेकिन किसी ने उसकी चीखें नहीं सुनी।  

 

एक हफ्ते बाद जब गीत बेहोश पड़ी हुई थी तो, 'ध्रुव अब इस लड़की को छोड़ दे किसी जँगल में, जितना मज़ा हमें इससे लेना था ले लिया, अब दूसरे शिकार की बारी हैं।

'लेकिन बॉस जिन्दा या मुर्दा' ध्रुव के पूछते ही

'मार ड़ाल, जिन्दा छोड़ा तो हमारे लिए ही ख़तरा बन जायेगी।' और अगले ही पल ध्रुव गीत का गला दबाने लगा, उसने उसका गला दबाने में अपनी पूरी ताकत लगा दी, पहले तो गीत तड़फड़ाई फिर शांत हो गयी। 

'बॉस काम हो गया।

'जा फेंक दे किसी गन्दी नाली में इसे' और फिर ध्रुव गीत की लाश एक सुनसान जगह पर फेंक आया।

 

कुछ दिनों बाद, 'इंस्पेक्टर साहब, मुझे रिपोर्ट लिखवानी हैं।

'कहिये क्या बात हैं।

'मेरा एक हफ्ते तक सामूहिक बलात्कार हुआ हैं, और फिर मुझे मारने की कोशिश की गयी, बल्कि उन दरिंदो को तो लगता हैं की उन्होंने मुझे मार ही ड़ाला हैं।

'कौन है वो

'मेरा बॉय फ्रेंड ध्रुव और उसके साथी' गीत वापिस आ चुकी थी, दरअसल उस दिन वो मरी ही नहीं थी, लेकिन अब वो ध्रुव और उसके साथियों का जीना ज़रूर हराम कर देगी, यही सोचकर वो पुलिस की मदद माँगने आई हैं, और कुछ ही दिनों में गीत की हिम्मत और पुलिस की मदद से ध्रुव और उसके साथी जेल की सलाखों के पीछे थे। और अपना बदला लेने के बाद गीत ने गरीब और बेसहारा लड़कियों के लिए एक महिलाश्राम खोल लिया, यूँ तो ये उसकी मंजिल नहीं थी लेकिन जैसा उसके साथ हुआ वो किसी के साथ ना हो और अगर हो भी जाए तो वो महिला दर-दर ना भटके बस इसलिए उसने ये महिलाश्राम खोल लिया, और अपनी पिछली ज़िंदगी को भूल नई ज़िंदगी में खुद को एडजेस्ट करने लगी, लेकिन उसके मन में क्या चल रहा हैं ये सिर्फ वो ही जानती थी।


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