Adhuri Prem-Kahani (A Love Story)


पिछले कुछ दिनों से  कॉलेज में ज़ोरों-शोरों से इलेक्शन की तैयारियाँ चल रही हैं, कॉलेज प्रेसिडेंट कौन बनेगा ये बताना तो मुश्किल हैंलेकिन गर्वित और आरुषि दोनों ही अच्छे उम्मीदवार हैं, जहाँ एक तरफ आधा कॉलेज गर्वित के सपोर्ट में खड़ा हैं तो वहीं दूसरी ओर बाकी का आधा कॉलेज आरुषि के सपोर्ट में खड़ा हैं। 

'अगर आप अपने कॉलेज का सुनहरा भविष्य चाहते हैं तो, कृप्या करके गर्वित को वोट दीजिए, विपक्षी दल वाले आपको उकसाने की कोशिश करेंगे, वो चाहेंगे की आप उनके उम्मीदवार को वोट दे, लेकिन आपका भला इसी में हैं की आप उनकी बातों में नहीं आये. गर्वित, गर्वित' गर्वित के दल का एक सदस्य मिहिर माइक लेकर भाषण देने लगा। 

'ये क्या पागलपन हैं, मिहिर, हमें वोट देने के लिए किसी के भी साथ ज़बरदस्ती नहीं करनी चाहिए, जिसको भी देने का उनका मन होगा देंगे।' गर्वित के कहते ही,

'ऐ.....इसे इलेक्शन में खड़ा करने का किसका फैसला था, मैंने तो पहले ही कहा था मत खड़ा करो इसे इलेक्शन में, मरवाएगा हमें' मिहिर चिल्लाने लगा। 

'लेकिन.......

'लेकिन-वेकिन कुछ नहीं गर्वित, मिहिर सही कह रहा हैं, तेरा ये व्यवहार हमें इलेक्शन हरवा देगा।' इतने में ही मिहिर का दोस्त नमन बोला। 

'अरे मुझे तो लगता हैं की इसे आरुषि से प्यार हो गया हैं।' इतने में ही रूचि ने कहा।  

'ये क्या बकवास कर रही हो रूचि, मैं बिल्कुल पसंद नहीं करता आरुषि को

'तो फिर तू ये क्यों चाहता हैं की वो जीते' रूचि के पूछते ही

'मैंने ऐसा कब कहा।

'अरे क्यों फ़ालतू की बातों में तुम सब लोग वक़्त बर्बाद कर रहे हो, इलेक्शन नज़दीक ही हैं, फिलहाल अपना दिमाग प्रचार में लगाओ।' मिहिर के कहते ही सभी फिर से नारे लगाने लगे। 

 

दूसरी और आरुषि के साथी भी इलेक्शन के प्रचार-प्रसार में ज़ोरों-शोरों से लगे हुए हैं, और आरुषि भी जीतने के लिए जी-जान लगा रही हैं, उसका केवल एक ही मकसद हैं वो ये की किसी भी तरीके से गर्वित का हराना। 'आरुषि हमारी जीत तो निश्चित हैं।' आरुषि की दोस्त मीनल के कहते ही

'बिल्कुल मीनल, तू सही कह रही हैं, और उस गर्वित को हराकर मुझे जो ख़ुशी मिलेगी उसका तो तू अंदाजा भी नहीं लगा सकती।' आरुषि के कहते ही,

'लेकिन मेरे एक बात समझ में नहीं आती तू गर्वित को इतना नापसंद क्यों करती हैं।'

'पता नहीं क्यों, लेकिन वो मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं हैं, जब देखो तब बेवजह घूरता रहता हैं।

'हो सकता हैं तुझसे प्यार करने लगा हो, और तुझे भी उससे प्यार हो गया हो।'

'छी; उस गर्वित से प्यार करने से अच्छा हैं कि मैं किसी से भी प्यार ना करूँ।

'लेकिन उसमे बुराई क्या हैं।' मीनल के कहते ही

'तू मेरे साथ हैं या उस गर्वित के साथ

'तेरे यार

'तो फिर उसका पक्ष क्यों ले रही हैं।

'वो तो मैं थोड़ा मज़ाक कर रही थी।

'फ्रेंड्सक्या हो रहा हैं, चलो लंच के लिए चलते हैं।' इतने में वहाँ अनन्या भी आ गयी। 

'अनन्या तेरे पास विपक्षी टीम की कोई खबर हैं क्या यार' आरुषि के पूछते ही

'हाँ हैं तो सही......सुना हैं गर्वित के मन में जीतने की कोई ख़ास इच्छा नहीं हैं।

'वो क्यों भला

'सुनने में आया हैं की उसे तुझसे प्यार हो गया हैं, लेकिन स्वीकार करने में हिचकिचा रहा है।

'बकवास, सबकुछ बकवास हैं, ये सब उनके चुनाव जीतने के मंसूबे हैं।

'पता नहीं क्या सच हैं, लेकिन मुझे तो उसकी आँखों में तेरे लिए प्यार नज़र आता हैं, और कभी-कभी तेरी आँखों में भी

'हैं ना आता हैं ना, मैं भी अभी यही कह रही थी।' मीनल के कहते ही

'ये क्या बकवास कर रही हो तुम दोनों' आरुषि चिल्लाने लगी लेकिन इतने में ही उसी के दल का एक लड़का अर्पण दौड़ता हुआ आया,

 'आरुषि, मीनल, अनन्या जल्दी चलो मेरे साथ गर्वित कॉलेज की चौथी मंज़िल से लॉन में गिर गया हैं, सुना हैं काफी चोट आयी हैं, उसे अस्पताल लेकर जा रहे हैं।' अभी अर्पण की बात पूरी भी नहीं हुई थी की आरुषि पागलों की तरह उस तरफ दौड़ पड़ी जहाँ गर्वित गिरा था। 

 

'क्या हुआ गर्वित को, कैसे गिर गया।' हड़बड़ाई सी आरुषि पूछने लगी।

'बैलेंस बिगड़ गया था उसका, लेकिन ये सब तुम क्यों पूछ रही हो, तुम्हे क्या लगता हैं हम हार मान लेंगे।' नमन के कहते ही

'शट-अप इडियट, प्यार करती हूँ मैं उससे' आरुषि के कहते ही वहाँ खड़ा प्रत्येक स्टूडेंट उसे घूरने लगा, यहाँ तक की आरुषि की फ्रेंड्स मीनल और अनन्या भी उसे आश्चर्य से देखने लगी और उन्हें घूरता देख आरुषि सकपका गयी।

'और गर्वित' नमन के पूछते ही,

'पता नहीं' आरुषि ने बड़ी ही बेरुखी से जवाब दिया और वहाँ से जाने लगी, लेकिन इतने में ही पीछे से नमन ने आवाज़ लगाई। 

'आरुषि, चलो मेरे साथ अस्पताल में गर्वित से मिलने' और बिना कोई सवाल-जवाब किये आरुषि नमन के साथ चल पड़ी। 

'जब तुम गर्वित से प्यार करती हो तो उसे बताती क्यों नहीं।'

'तुम्हे इससे क्या ये मेरा पर्सनल मेटर हैं।' आरुषि के कहते ही,

'पर्सनल, मुझे तो ऐसा नहीं लगता, उधर गर्वित तुम्हारे लिए बैचेन रहता हैं, और इधर तुम

'क्या! क्या कहाँ तुमने, गर्वित मेरे लिए बैचेन रहता हैं.....हो ही नहीं सकता, वो तो ये जानता भी नहीं की मैं उससे प्यार करती हूँ, और मुझे नहीं लगता की उसके दिल में मेरे लिए कुछ हैं।' आरुषि  के ऐसा कहते ही नमन ने एकाएक बाइक सड़क के किनारें रोक दी। 

'क्या हुआ नमन बाइक क्यों रोक दी।

'तुम जानती हो गर्वित कॉलेज की चौथी मंज़िल से नीचे कैसे गिरा।

'हाँ, बैलेंस बिगड़ गया उसका, तुम्ही ने तो बताया था।

'नहीं, बल्कि वो तुम्हारे रास्ते से हटना चाहता था।' नमन के कहते ही

'तुम क्या कह रहे हो नमन, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।

'मैं कह रहा हूँ की गर्वित भी तुमसे बहुत प्यार करता हैं, वो चाहता हैं की ये इलेक्शन तुम ही जीतो, बल्कि वो तो इलेक्शन में खड़ा नहीं होना चाहता था, हमने ज़बरदस्ती उसे खड़ा किया, और अभी कुछ देर पहले जब गर्वित ने हमें ये बताया की वो तुमसे बहुत प्यार करता हैं तो हमारे दल की एक लड़की नेहा ने उससे पूछा की तो फिर वो तुम्हारी जीत के रास्ते से हटने के लिए क्या कर सकता हैं तो वो तुरंत चौथी मंज़िल से कूद गया। 

'ये तुम क्या कह रहे हो नमन, तो फिर तुमने कॉलेज में ये क्यों पूछा की गर्वित मुझसे प्यार करता हैं या नहीं

'ये जानने के लिए की तुम्हे उसके बारे में कितना पता हैं।' नमन के कहते ही

'जल्दी चलो, मुझे अभी गर्वित से मिलना हैं......कितनी पागल हूँ मैं, उसकी फीलिंग्स को समझ ही नहीं पाई।

'आरुषि पागल केवल तुम ही नहीं बल्कि वो भी हैं, वो कहाँ तुम्हारी फीलिंग्स को समझ पाया, अरे बेवकूफों अगर प्यार करते हो तो उसे इज़हार करने की भी हिम्मत रखो।

'बस तुम मुझे जल्दी से मेरे गर्वित के पास पहुँचा दो, देखना आज तो मैं उसके सामने अपने प्यार का इज़हार कर ही दूँगी।

'ओके देखते हैं।' और नमन तुरंत ही बाइक स्टार्ट कर आरुषि को लेकर अस्पताल की ओर चल पड़ा, लेकिन अस्पताल पहुचँते ही, 'मिहिर कैसा हैं गर्वित

'आरुषि तुम यहाँ' मिहिर ने नमन को नज़रंदाज़ करते हुए आरुषि से पूछा। 

'हाँ गर्वित से मिलने आई हूँ, कैसा हैं वो' आरुषि के कहते ही,

'यार तू मिहिर जानता हैं अपना गर्वित ही नहीं बल्कि आरुषि भी उससे बहुत प्यार करती हैं, और आज उससे अपने प्यार का इज़हार करने वाली हैं, अब जल्दी बता कैसा हैं वो

'नहीं हैं।' मिहिर के कहते ही

'मतलब' आरुषि मिहिर की ओर सवालिया नज़रों देखने लगी।

'तुम बहुत लेट हो गयी आरुषि, गर्वित तो चला गया।

'लेकिन ऐसी हालत में कहाँ चला गया।

'वहीं जहाँ से वो कभी वापिस नहीं आ सकता.......आरुषि तुम्हारा गर्वित दुनिया में नहीं रहा, अधूरी रह गयी तुम्हारी प्रेम-कहानी, वो प्रेम-कहानी जिसके बारे में पूरा कॉलेज जानता था, बस तुम दोनों ही एक दूसरे के दिल की बात नहीं जानते थे।' मिहिर के कहते ही आरुषि  पागलों की तरह से अचानक ही सड़क की ओर दौड़ पड़ी। 

'आरुषि, आरुषि रुको आरुषि एक्सीडेंट हो जायेगा तुम्हारा' नमन और मिहिर चिल्लाते ही रहे और तेज़ी से आती एक बस ने आरुषि को कुचल ड़ाला और कुछ ही पलों में वो भी चली गयी अपने प्यार गर्वित के पास और रह गयी अधूरी इनकी प्रेम-कहानी।

 

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