Khooni Chor (A thriller Story)
'हैलो डैड, कहाँ हैं आप, मैं आपका पिछले आधे घंटे से एयर-पोर्ट
पर इंतज़ार कर रही हूँ।' पूर्वी ने लगभग चिल्लाते हुए अपने
डैड आदित्य से फ़ोन पर कहा।
'सॉरी बेटा बस अभी दस
मिनिट में पहुँचता हूँ, ज़रा ट्रैफिक जाम में फँस गया था।'
'तो बताना चाहिए था ना'
'कहाँ ना बेटा सॉरी, हो गयी गलती, अब माफ़ भी कर दो अपने डैड को' आदित्य के कहते ही,
'ओके अब जल्दी से आ जाईए।'
ऐसा कह पूर्वी ने फोन रख दिया और अराइवल पर आती हुए गाड़ियों को
देखने लगी।
कुछ ही देर में एक बड़ी-सी गाड़ी पर्वी के
सामने आकर रुकी जिसमे उसके डैड आदित्य ड्राइविंग सीट पर बैठे हुए थे, अपने डैड को देख पूर्वी दौड़कर गाड़ी
के पास चली गयी, 'डैड डिक्की खोलिए सामान रखना हैं।'
'पूर्वी के कहते ही आदित्य
ने गाड़ी की डिक्की खोल दी और फिर पूर्वी तुरंत अपना सामान रख पैसेंजर सीट पर आकर बैठ गयी।
'और क्या हाल-चाल हैं
पूर्वी' आदित्य के पूछते ही,
'मैं आपसे नाराज़ हूँ।'
'अरे बाप रे, मेरी गुड़िया मुझसे नाराज़
हैं, कोई गलती हुई हैं क्या मुझसे'
'पहली गलती, आप मेरे कनवोकेशन में नहीं आये, आफ्टरऑल आपकी बेटी
को इंजीनियरिंग की डिग्री मिली थी, दूसरी गलती आप मुझे
एयर-पोर्ट पर देर से लेने आए, और तीसरी और सबसे बड़ी गलती की
आप मम्मी को साथ नहीं लाए......डैड कहाँ हैं मम्मी,
मैं पूरे चार साल बाद वापिस लौटी हूँ, और
मम्मी ही मुझे लेने नहीं आई, मम्मी ठीक तो हैं ना' पूर्वी के पूछते ही,
'हाँ बेटा सब ठीक हैं,
तुम घर चलो फिर बात करते हैं।' आदित्य ने कहा।
कुछ देर बाद , 'डैड आर यू ओके' पूर्वी के पूछते ही,
'हाँ पूर्वी मैं ठीक हूँ,
तुम मेरी फ़िक्र मत करो'
तो फिर मुझसे बातें क्यों नहीं कर रहे, कितना बदले-बदले लग रहे हो आप'
'अच्छा ये बताओ की घर चलकर
क्या खाओगी।' आदित्य ने बातों का रुख बदलते हुए कहा।
'कुछ भी मम्मी के हाथ का
बना हुआ, वैसे डैड मुझे आपसे
मम्मी की शिकायत करनी थी।' पूर्वी
के कहते ही,
'शिकायत! वो क्या'
'आप जानते हैं मम्मी पिछले
दो दिनों से मुझे अवॉयड कर रही हैं, मुझसे फोन पर भी बात नहीं कर रही।'
'अच्छा, लेकिन मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता, कोई बात नहीं
किसी इम्पोर्टेन्ट काम में बिजी होगी।'
'लेकिन मुझसे ज्यादा
इम्पोर्टेन्ट क्या हो सकता हैं! हाँ डैड जब भी मैं फोन करती हूँ फोन स्विच-ऑफ होता
हैं, अब आप मम्मी को मेरी ओर से
डाँटना'
'ओके, जो हुकुम' आदित्य के ऐसा कहते ही पूर्वी और आदित्य
दोनों हँस पड़े।
कुछ ही देर में गाड़ी एक बड़े से बँगले के
बाहर आकर रुकी, और उसके रुकते ही पूर्वी
गाड़ी से उतर लगभग भागती हुई बँगले के अंदर चली गयी। 'मॉम,
मॉम कहाँ हैं आप' पूर्वी पूरे बँगले में दौड़ती
हुई चिल्लाने लगी।
'पूर्वी, बेटा पहले फ्रेश होकर कुछ खा लो फिर मॉम से मिल लेना' आदित्य के कहते ही,
'आप भी कमाल करते हैं डैड,
और ये घर के सारे नौकर कहाँ हैं, कोई नज़र
क्यों नहीं आ रहा।'
'पूर्वी बेटा वो सब छुट्टी
पर गए हैं।'
'सब एक साथ, तो क्या घर का सारा काम मम्मी अकेली कर रही
हैं।' पूर्वी ने गुस्से में पूछा।
'नहीं बेटा मैं हूँ ना,
मैं मदद करता हूँ।' लेकिन पूर्वी आदित्य को अनसुना कर बेसमेंट की ओर अपनी मॉम को ढूँढ़ने चली गयी।
'मॉम, मॉम, वेयर आर यू' पूर्वी
आवाज़ें लगाती रही लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
'पूर्वी तुम बेसमेंट में
क्या कर रही हो।' इतने में ही आदित्य ने आवाज़ देकर पूछा।
'मॉम को ढूँढ रही हूँ डैड,
आप भी तो नहीं बता रहे हैं की मॉम कहाँ हैं, और
यहाँ की लाइट क्यों नहीं जल रही हैं, बहुत अंधेरा हैं।'
पूर्वी के इतना कहते ही उसका पैर किसी चीज़ से टकराया, 'क्या हैं ये' पूर्वी टकराते ही उस चीज़ पर गिर पड़ी,
इतने में ही आदित्य टॉर्च लेकर बेसमेंट में आ गया, और जैसे ही टॉर्च की रौशनी में पूर्वी की नज़र उस चीज़ पर पड़ी तो उसकी चीख
निकल गयी, क्योकि वो किसी चीज़ पर
नहीं बल्कि अपनी मॉम की डेड-बॉडी पर गिरी हुई थी।
'मॉम! डैड ये
क्या......क्या हुआ मॉम को वो यहाँ ऐसे कैसे' पूर्वी के कहते ही आदित्य ने अपनी जेब से रिवॉल्वर
निकाल उसके माथे पर तान दी।
'डैड, ये क्या कर रहे हैं आप'
'खबरदार जो किसी को भी
अपनी मॉम के बारे में बताया, नहीं तो तुम्हारा भी वही हाल
करूँगा जो तुम्हारी मॉम का किया हैं।' आदित्य के मुँह से ये
सब सुन पूर्वी के पैरों तले ज़मीन खिसक गयी।
डैड आप पागल हो गए ये क्या अनाप-शानप बके जा रहे
हैं।
'डैड कौन डैड, मैं तुम्हारा डैड नहीं हूँ।' ऐसा कहते ही आदित्य बने
उस व्यक्ति ने अपने चेहरे पर लगाया हुआ आदित्य के चेहरे जैसा मास्क हटा दिया।
'कौन हो तुम! मेरे डैड
कहाँ हैं ! डैड-डैड' चिल्लाती हुई पूर्वी बेसमेंट से बाहर
जाने लगी, लेकिन उस व्यक्ति ने पूर्वी को ज़बरदस्ती पकड़कर
रस्सियों से बाँध वहीं बेसमेंट में ही बैठा दिया, और खुद ना
जाने कहाँ चला गया, वो चिल्लाती रही, चीखती
रही, और रोती रही लेकिन कोई भी उसकी आवाज़ सुनने वाला नहीं
था....... इतने में ही किसी के करहाने की आवाज़ सुनाई दी, 'कौन, कौन हैं।'
'पूर्वी बेटा'
'डैड, डैड, कहाँ हैं आप' पूर्वी ने
बेसमेंट में चारों ओर अपनी नज़र दौड़ाई लेकिन उसे कोई नहीं दिखाई दिया, लेकिन करहाने ही आवाज़ें अभी भी आ रहीं थी, फिर अचानक
से उसे लगा की ये आवाज़ तो दीवार में से आ रही हैं। 'डैड आर यू इन वाल, से समथिंग डैड'
पूर्वी चिल्लाने लगी, वो समझ चुकी थी की
आदित्य दीवार में ही हैं, वो अपनी रस्सी खोलने की कोशिश करने
लगी, लेकिन वो इतनी मज़बूती से बँधी हुई थी की उसे खोलना
नामुमकिन हो रहा था, फिर भी पूर्वी ने हिम्मत नहीं हारी,
और बड़ी मुश्किल से लेकिन अपनी रस्सी को खोल ही ड़ाला और जैसे ही रस्सी खुली वो दौड़ती हुई उस दीवार की तरफ गयी जिसमे से
उसे आदित्य की आवाज़ आ रही थी, 'डैड, डैड
से समथिंग डैड'
'पूर्वी बेटा मुझे बचा लो' ये आवाज़ आदित्य की ही थी।
'डैड पर कैसे, कैसे निकालूँ मैं आपको बाहर' और फिर वो अपने आस-पास
कुछ ऐसा ढूँढने लगी जिससे की दीवार तोड़ सके, काफी कोशिशों के
बावजूद जब पूर्वी को एक हथोड़ा मिला तो वो उसे ज़ोर-ज़ोर से दीवार पर मारने लगी। काफी
देर तक हथोड़े मारने के बाद दीवार टूटने लगी, और फिर उसमे से
अधमरी हालत में आदित्य बाहर गिर पड़ा। 'डैड, डैड' पूर्वी आदित्य के गले लग बुरी तरह से रोने लगी।
'पूर्वी बचा लो बेटा मुझे,
तुम्हारी मम्मी को तो उस दरिंदे ने मार ही ड़ाला हैं।'
'हाँ डैड, ऐसा कह पूर्वी एम्बुलेंस बुलाने के लिए अपना फोन ढूँढने लगी, 'मेरा फोन कहाँ हैं, कही वो दरिंदा तो नहीं ले गया,
हे ईश्वर हमारी रक्षा करो' ऐसा कहते ही पूर्वी
फिर से रोने लगी, फिर वो हिम्मत कर बेसमेंट के दरवाज़े की और
दौड़ी, लेकिन वो बाहर से बंद था। 'ये तो
बंद हैं, अब क्या करूँ, फिर अचानक से
उसकी नज़र रोशनदान पर पड़ी, 'रोशनदान, लेकिन
इससे बाहर कैसे निकलूँ, अरे ये तो सड़क की तरफ खुलता हैं'
बस फिर क्या था पूर्वी रोशनदान से ज़ोर-ज़ोर से आवाज़े लगाने लगी
बचाओ-बचाओ' लेकिन काफी देर तक किसी ने भी उसकी आवाज़ नहीं
सुनी, या जिसने सुनी उसने उसे सुनकर अनसुना दिया, पूर्वी अब टूट चुकी थी, उसकी हिम्मत जवाब दे चुकी थी,
वो हार कर एक तरफ बैठ गयी और ना चाहते हुए भी अपने डैड आदित्य को
अपनी आँखों के सामने मरते हुए देखती रही...... आदित्य
जा चुका था और अब पूर्वी भी बेहोश हो चुकी थी।
बाद में जब पूर्वी को होश आया तो उसने
खुद को अंजान जगह पर पाया,
'कहाँ हूँ मैं' पूर्वी के स्वंय से पूछते ही
एक आवाज़ आई,
'उठ गयी महारानी जी'
'कौन, कौन हो तुम, और क्या चाहते हो, क्यों मारा तुमने मेरे मॉम और डैड को, और क्यों मेरे
डैड का चेहरा लगाए घूम रहे थे ' पूर्वी चिल्लाने लगी।
'ऐ आवाज़ नीचे, मेरी कोई गलती नहीं हैं इसमें, सारी गलती तेरे
माँ-बाप की हैं, बड़ा तीसमारखां समझते थे खुद को, जान से हाथ धो बैठे ना' वो आदमी वहीं पूर्वी के पास
बैठ सिगरेट फूँकने लगा, जिस वजह से पूर्वी असहज महसूस रही
थी।
'क्या हुआ परेशानी हैं
सिगरेट से' ऐसा कहते ही उस आदमी ने सिगरेट बुझा दी।
'आई हेट यूँ, बताओ क्यों मारा तुमने मेरे मॉम और डैड को...बोलो' पूर्वी
ज़ोर से चिल्लाई।
'चोर हूँ मैं, चोरी करने आया था तुम्हारे घर, लेकिन तेरे
माँ-बाप......करने ही नहीं दी उन्होंने मुझे चोरी, बहुत
धमकाया की अगर वो मेरे रास्ते में आये तो जान से हाथ धो बैठेंगे, फिर भी वो बीच में आये मुझे और मेरे साथियों को चोरी करने से रोका,
और अब नतीजा तुम्हारे सामने हैं।
'लेकिन हमारे घर के नौकर कहाँ हैं, तुमने पापा के चेहरे जैसा मास्क कैसे
बनवाया और मुझे कैसे पहचाना, और तुम्हे कैसे पता चला की मैं
आने वाली हूँ, और पापा जैसी आवाज उसका क्या राज हैं?'
'नौकर, तो भाग गए मुझसे ड़रकर या ये कह लो की मैंने ही
उन्हें भागने के लिए कहा था, ग़रीब थे ना बेचारे क्यों अपने
मालिक की ग़लतियों की सजा भुगतते, और तेरे पापा के चेहरे जैसा मास्क, हाँ वो काम थोड़ा मुश्किल ज़रूर था, लेकिन मेरे साथी ने कर दिया, अब तुझे कैसे पहचाना
अरे बेवकूफ पूरे घर में तेरी फोटोज लगी हुई हैं, तो बस उन्ही
से पहचान लिया, और क्या पूछा था तूने.....हाँ, मुझे कैसे पता की तू आने वाली हैं....तेरी माँ के फोन के एक व्हाट्सअप
मैसेज से, मैसेज पूरे डिटेल में लिखा था, कोई बेवकूफ भी समझ जाता, रही आवाज की बात तो किसी की भी आवाज निकालने में मुझे
महारथ हासिल हैं, बस एक बार उस आदमी की आवाज सुननी पड़ती हैं।' उस आदमी कहते ही,
'भगवान् तुम्हे कभी माफ़
नहीं करेंगे, नरक में भी जगह नहीं मिलेगी तुम्हे' पूर्वी जो मुँह में आ रहा था बोले जा रही थी, और वो
आदमी वहशियों की तरह हँस रहा था, लेकिन फिर अचानक वो आदमी
पूर्वी के पास आया और बोला,
'मैं बुरा आदमी नहीं हूँ,
लेकिन कोई मेरे काम के रास्ते में आएगा तो उसे मैं नहीं छोड़ूँगा,
और तेरे माँ-बाप ने यहीं एक गलती की थी, अगर
वो बिना ऑब्जेक्शन किये मुझे चोरी करने देते तो उनका क्या चला जाता....बोल क्या
चला जाता, अब बेवजह अपनी जान से हाथ धो बैठे ना, और तेरी जान को भी ख़तरे में ड़ाल दिया।' वो आदमी
बोलते हुए बेहद ही डरावना लग रहा था, जिसे देख पूर्वी पहले
से भी ज्यादा ड़र रही थी, उसके पूरा शरीर पसीने से भीग चुका
था, समझ नहीं आ रहा था की क्या करे, फिर
एकाएक उसे थोड़ी ही दूरी पर एक बड़ा सा पत्थर नज़र आया, जिसे
देख तुरंत ही उसके दिमाग में एक आईडिया आ गया।
'सुनो मुझे प्यास लगी हैं,
थोड़ा पानी मिलेगा' पूर्वी ने झूठ बोल उस आदमी
को अपने सामने से हटाना चाहा।
'हाँ, हाँ ज़रूर, अब मैं तुझे प्यासी तो मारूँगा नहीं,
और बस ऐसा कहते ही वो आदमी पास ही रखे एक मटके से पानी भरने के लिए
खड़ा हो गया, पूर्वी इसी मौके की तालाश में थी, उसने उसके उठते ही तुरंत पास रखे पत्थर को उठाया और पीछे से उसके सिर पर
दे मारा, सिर पर चोट लगते ही वो आदमी तिलमिला गया, आनन्-फानन में उसने अपनी जेब से रिवाल्वर निकाली और पूर्वी की ओर चला दी,
गोली लगते ही पूर्वी वहीं ढ़ेर हो गयी, और उस
आदमी के सिर पर लगी चोट भी इतनी गहरी थी की कुछ देर तड़पने के बाद वो भी चल बसा।
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