Chah Bachche Ki (Story On Childless Parents)
'अर्जुन, मुझे तुमसे कुछ बात करनी हैं।' सुबह के वक़्त बालकनी में बैठे अपने पति अर्जुन से जब साक्षी ने कहा तो वो आश्चर्य से उसकी ओर देखने लगा।
'हाँ बोलो' अर्जुन के कहते ही,
'तुम आज ऑफिस से छुट्टी ले सकते हो क्या?'
'छुट्टी! क्यों क्या हुआ, कहीं जाना हैं तुम्हे ?'
'हाँ, डॉक्टर के पास' साक्षी के
कहते ही,
'मैं कुछ समझा नहीं, तुम्हारी तबीयत तो ठीक हैं ना'
'हम्म ठीक हैं, अर्जुन मैं किसी अच्छे गायनोक्लोजिस्ट
से मिलना चाहती हूँ।' साक्षी के कहते ही,
'साक्षी फिर से वही बात लेकर बैठ गयी तुम, अरे जब
हमारी किस्मत में बच्चा हैं नहीं तो कोई बात नहीं, और वैसे
भी हम एक-दूसरे के साथ खुश हैं ना' अर्जुन के कहते हैं।
'नहीं अर्जुन मैं खुश नहीं हूँ, माँ बनाना हैं मुझे, किलकारियाँ सुननी हैं घर में बच्चें
की, और वैसे भी अब मुझसे लोगों के ताने नहीं सुने जाते।'
'लोगों का क्या हैं साक्षी, कुछ भी बोलते हैं,
तुम उनकी तरफ ध्यान मत दो।'
'अर्जुन तुम दूसरी शादी क्यों नहीं कर लेते।'
'साक्षी......! कहने से पहले सोच तो लिया करो,
अरे माँ बनने का इतना भूत सवार हैं तुम्हारे ऊपर की कुछ भी बोले जा
रही हो।' अर्जुन गुस्से से तिलमिला उठा।
'तो तुम ही बताओ क्या करूँ।' साक्षी अर्जुन के सामने
ज़मीन पर बैठ रोने लगी।
'कुछ मत करो, भूल जाओ सबकुछ, हम
दोनों एक दूसरे के साथ खुश हैं, और इसी तरह ख़ुशी-ख़ुशी बाकी
की ज़िन्दगी भी काट लेंगे।' अर्जुन ने प्यार से साक्षी के
चेहरे को अपने हाथों में लेते हुए कहा।
'अच्छा ठीक हैं, भूल जाऊँगी सबकुछ, बस एक बार किसी अच्छे से गायनोक्लोजिस्ट से कंसल्ट कर लो।'
'साक्षी-साक्षी, तुम फिर से वही बात लेकर बैठ गयी।'
'अर्जुन प्लीज, एक बार, हो सकता
हैं कोई रास्ता निकल जाए।'
'ठीक हैं, लेकिन आज नहीं दो दिन बाद, क्योंकि इन दो दिनों में मुझे ऑफिस में बहुत काम हैं।'
'ठीक हैं, जब तक मैं इंटरनेट पर किसी अच्छे से डॉक्टर
के बारे में सर्च करती हूँ।' एकाएक ही साक्षी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, और उसे देख
अर्जुन भी मुस्कुराने लगा, दरअसल अर्जुन भी पिता बनने के लिए
व्याकुल था, लेकिन उसने अभी तक हुए साक्षी के तीन मिस्कैरेज
की वजह से हालातों से समझौता कर लिया था, जो साक्षी नहीं कर
पा रही थी।
दो दिन बाद, 'डॉक्टर साहब कोई तो
रास्ता होगा मेरे माँ बनने का' शहर की एक जानी-मानी
गायनोक्लोजिस्ट ड़ॉ मल्होत्रा के सामने बैठे अर्जुन और
साक्षी उनके जवाब का इंतज़ार कर रहे थे।
'मैंने आपकी सारी रिपोर्ट्स देखी, इनको देखते हुए ऐसा
लग रहा हैं की आपकी वूम बच्चा होल्ड नहीं कर पाती,
लेकिन घबराने वाली कोई बात नहीं हैं, साइंस ने
बहुत तरक्की कर ली हैं, आप माँ बन सकती हैं।'
'क्या! आप सच कह रहीं हैं, मैं माँ बन सकती हूँ।'
'हाँ, साक्षी ये पॉसिबल हैं, बस
आपको एक लेडी ढूँढ़नी होगी जो की आपके लिए सेरोगेट मदर बन सके।' ड़ॉ मल्होत्रा के कहते ही,
'क्या हम कुछ समझे नहीं' अर्जुन के कहते ही,
'हाँ मि. अर्जुन, क्या आप लोग सेरोगेसी के बारे में
कुछ नहीं जानते।'
'सुना तो हैं, लेकिन डिटेल में कुछ नहीं पता' अर्जुन कभी साक्षी तो कभी ड़ॉ मल्होत्रा की ओर देखता।
'मि. अर्जुन और साक्षी, देखिए इसके लिए आपको सबसे
पहले एक लेडी की तलाश करनी होगी जी की आपके बच्चें की माँ बनने को तैयार हो,
फिर हम उसका कम्प्लीट मेड़िकल चेक-अप करेंगे और फिर फ़ैसला करेंगे की
वो लेडी वाक़ई में माँ बनने के लिए तैयार हैं या नहीं।'
'लेकिन कोई ऐसा क्यों करेगा, क्यों किसी ओर के बच्चें
की माँ बनना चाहेगा, और इसके लिए उसे अर्जुन से शादी भी तो
करनी पड़ेगी ना।' साक्षी के कहते ही
'नहीं, नहीं साक्षी ऐसा कुछ नहीं हैं.....अच्छा मैं
आपको समझाती हूँ।' और ऐसा कहते ही ड़ॉ मल्होत्रा सेरोगेसी के
बारें में सबकुछ विस्तार से उन दोनों को समझाने लगी।
'डॉक्टर साहब लेकिन हम इतना पैसा कहाँ से लायेंगे।' अर्जुन
के कहते ही
'पैसा तो ख़र्चा करना पड़ेगा, आप ही बताईये जो भी इस
काम को करेगा ज़ाहिर सी बात हैं उसे पैसे की ज़रुरत होगी, नहीं
तो ये काम कोई मज़े के लिए नहीं करेगा।'
'हम्म आपकी बात सही हैं, तो ठीक हैं हम आपको सोचकर
बताते हैं।' ऐसा कह अर्जुन व साक्षी ड़ॉ मल्होत्रा के कैबिन
से बाहर आ गए।
रात का वक़्त, अर्जुन व साक्षी
दोनों ही पलँग पर लेटे सीलिंग फैन को चलते हुए देख रहे
हैं, 'अर्जुन, ये तो बहुत मुश्किल काम
हैं।' साक्षी के कहते ही,
'हाँ लेकिन हम एक कोशिश ज़रूर करेंगे, मैं कल ही अखबार
में सेरोगेट मदर के लिए इश्तहार देता हूँ।'
'तुम्हे क्या लगता हैं कोई तैयार होगी हमारे बच्चें को जन्म देने के लिए'
'साक्षी, इस दुनिया में ज़रुरतमंदो की कमी नहीं हैं,
कोई ना कोई तो ज़रूर तैयार हो जायेगा।' अर्जुन
के कहते ही,
'अर्जुन, लेकिन मुझे अब बच्चा नहीं चाहिए।'
'क्या! ये क्या कह रही हो, अभी तक तो तुमने ये कहकर
की बच्चा चाहिए, बच्चा चाहिए पूरा घर सिर पर उठा रखा था,
अब अचानक से क्या हो गया।'
'बच्चा तो मुझे अभी भी चाहिए अर्जुन, लेकिन इस तरीक़े
से नहीं' साक्षी के कहते ही,
'मैं कुछ समझा नहीं'
'अर्जुन जो भी औरत हमारा बच्चा इस दुनिया में लाएगी वो उसे नौ महीनें अपने
पेट में रखेगी, उसे पैदा करने के लिए असहनीय दर्द सहेगी,
और फिर बच्चें पर हम अपना हक़ जता देंगे, क्या
ये ग़लत नहीं हैं।'
'लेकिन साक्षी ऐसा आजकल होता हैं।'
'मैं मानती हूँ की साइंस ने बहुत तरक्की कर ली हैं, और
उसी की बदौलत आज के समय में ऐसा संभव हैं, लेकिन क्या ये किसी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं.......अर्जुन एक औरत जिसे की पैसे
की ज़रूरत हैं ये काम मज़बूरी में करेगी, लेकिन इसका मतलब ये
तो नहीं ना की उसे बच्चे से लगाव ही नहीं होगा, अरे बच्चें
और माँ का रिश्ता तो उसी दिन से बन जाता हैं जब एक बच्चा माँ के पेट में आता हैं......अर्जुन
मुझे इस तरीक़े से बच्चा नहीं चाहिए।' साक्षी ने अपनी बात
पूरी करते ही एक गहरी सांस ली।
'तो फिर अब क्या करना हैं।'
'हम अनाथाश्रम से एक बच्चा गोद लेंगे, उस बच्चें को
माँ-बाप मिल जायेंगे और हमें हमारा बच्चा, अगर तुम मेरे इस
विचार से सहमत हो तो' साक्षी ने उम्मीद भरी नज़रों से देखते
हुए अर्जुन से कहा......... 'क्या हुआ तुम चुप क्यों हो,
कुछ बोलते क्यों नहीं, क्या तुम्हे मेरा ये
विचार सही नहीं लगा।' साक्षी के पूछते ही,
'नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं बल्कि मैं तो ये सोच रहा
हूँ की ये विचार मेरे मन में क्यों नहीं आया।'
'तो क्या तुम खुश हो अर्जुन मेरे इस विचार से'
'हम्म, और मैं सोच रहा हूँ की क्यों ना हम कल सुबह ही
अनाथाश्रम चलें, एक प्यारी सी बच्ची लेने के लिए'
'अर्जुन तो क्या हमें हमारी बेटी कल ही मिल जायेगी।'
'अरे नहीं पगली, अभी तो बहुत सारी क़ानूनी कार्यवाहियाँ
होंगी, अनाथाश्रम वाले हमारे बारे में जानना चाहेंगे,
हमारा बैक ग्राउंड जानना चाहेंगे, और भी ना
जाने क्या-क्या, लेकिन ये तय हैं की हम अब एक बच्चा गोद
लेंगे और उसे ढ़ेर सारा प्यार देंगे, दुनिया की हर हर ख़ुशी हम
उसे दे देंगे।'कहते-कहते अर्जुन भावुक हो गया, और ये देख साक्षी ने अपना सिर अर्जुन के सीने पर रख दिया और फिर दोनों
अपने आने वाले बच्चें की भविष्य की रूपरेखा तैयार करने लगे।
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