Valentine Love (Story On Valentine's Day)

आज वैलेंटाइन डे हैं, और मुंबई के सांता क्रूज़ इलाके में स्थित एक अपार्टमेंट के दसवीं मंज़िल पर बने एक फ्लैट में पार्टी चल रही हैं। पार्टी उस फ्लैट के मालिक अनिरुद्ध और उसकी वाइफ एकता ने दी हैं और वहाँ आने वाले सभी मेहमान उनके कॉलेज फ्रेंड्स हैं, लेकिन इस पार्टी में कुछ गिने-चुने लोग ही शामिल हुए हैं, दरअसल कोरोना की तीसरी लहर के चलते उन दोनों ने ज्यादा दोस्तों को इनवाईट ही नहीं किया, बस कुछ नज़दीकी दोस्तों को ही बुलाया हैं। 

"अनिरुद्ध, यार तू भी गज़ब करता हैं, आज वैलेंटाइन डे वाले दिन तुझे और एकता को एक रोमांटिक पार्टी करनी चाहिए थी, और तूने हम सबको बुला लिया। 

"You're right nikhil, I told him, लेकिन तुम्हारा दोस्त मुझसे ज्यादा वक़्त तुम लोगों के साथ गुजारना चाहता हैं, बीवी हूँ ना शायद इसलिए मुझसे दूर भागता हैं, जब गर्ल फ्रेंड थी तो मेरे पीछे-पीछे भागता था।" एकता ने जैसे ही अनिरुद्ध की ओर देखते हुए कहा। 

"हाँ, क्योंकि प्यार में इंसान की अकल पर पत्थर पड़ ही जाते हैं।"

"o come on guys, हम यहाँ पार्टी के लिए इकट्ठे हुए हैं, पति-पत्नी का झगड़ा देखने के लिए नहीं।" इतने में ही एकता की childhood and best friend पूर्वी ने कहा।

"तो फिर शुरू की जाए पार्टी.....लेकिन ड्रिंक्स कहाँ हैं।" 

"गौरव मेरे दोस्त आज की पार्टी में ड्रिंक्स नहीं हैं।" 

"अनिरुद्ध यार, तू भी ना पार्टी का सारा मज़ा ही ख़राब कर दिया, चलो कोई बात नहीं दोस्ती के नशे से ही काम चला लेंगे।" 

"Good boy" अनिरुद्ध के घर पर जहाँ एक ओर पार्टी चल रही थी, वहीं दूसरी ओर अनिरुद्ध के एक दोस्त मयंक की नज़रें बार-बार पूर्वी से मिल रहीं थी, यूँ तो इन दोस्तों का किसी ना किसी बहाने मिलना-जुलना होता रहता हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ हैं की इनकी पार्टी में पूर्वी भी शामिल हुई हैं, यूँ तो वो दिल्ली में रहती हैं लेकिन पिछले कुछ दिनों से अपने किसी ऑफिस के काम से मुंबई आई हुई हैं और अपने किसी रिलेटिव के यहाँ ठहरी हुई हैं। 

"हाय, मैं मयंक" 

"हाय पूर्वी" 

"आपको आज पहली बार देखा हैं, इससे पहले कभी मुलाक़ात नहीं हुई हमारी" मयंक के कहते ही

"हाँ मैं और एकता स्कूल तक ही साथ पढ़े थे उसके बाद नहीं, और आप उसके कॉलेज फ्रेंड हैं, और मैं यहाँ नहीं दिल्ली में रहती हूँ, बस इसलिए पहले कभी अपनी मुलाक़ात नहीं हुई, वैसे मैं एकता के कनवोकेशन में आपके कॉलेज आई थी लेकिन आपसे मुलाकत नहीं हुई, शायद आप उस वक़्त वहाँ नहीं थे।" 

"Ya you're right.....ok, if you don't mind can we become a friend" मयंक के कहते ही

"Ok, I have no problem" पूर्वी के इतना कहते ही मंयक ने उसकी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया, उसके बाद इनकी बातों का सिलसिला जो शुरू हुआ ये दोनों भूल ही गए की कहाँ आये हुए हैं और क्यों आये हुए हैं।  

"पूर्वी, खाना खा लो यार, तुम तो मयंक के साथ बातों में इतनी बिजी हो गयी हो की बाकी फ्रेंड्स के साथ तो बात ही नहीं कर रही हो।" इतने में ही एकता ने कहा। 

"हाँ आती हूँ।" 

"पूर्वी, अगर तुम्हे ऐतराज़ ना हो तो क्या हम हम अपने फ़ोन नंबर एक्सचेंज कर सकते हैं।" 

"ya, why not, वैसे भी अपनी इतनी दोस्ती तो हो ही चुकी हैं की एक-दूसरे से फोन पर बात कर सकते हैं।"

"defenetly, या फिर इससे थोड़ी ज्यादा" 

"क्या मतलब हैं तुम्हारा" 

"कुछ नहीं, चलो खाना खा ले" मयंक की बातों से साफ ज़ाहिर था की वो पूर्वी को दोस्त से कुछ ज्यादा मानने लगा हैं। 

कुछ घंटों की मुलाक़ात में प्यार हो जाना ! कुछ अजीब हैं, लेकिन पता नहीं शायद हो जाता होगा, या फिर ये मात्र आकर्षण हैं, पता नहीं  जो भी हो आगे कहानी में पता चल ही जायेगा। 

"Surprise" इतने में ही अनिरुद्ध ने सबका ध्यान खुद ही ओर आकर्षित किया। 

"क्या हैं इस पैकेट में अनिरुद्ध, हमारे लिए गिफ्ट्स?" गौरव के पूछते ही

"फ्रेंड गिफ्ट तो नहीं हैं, लेकिन जो कुछ भी हैं उससे इस पार्टी का मज़ा दुगना हो जायेगा।" और इतना कहते ही अनिरुद्ध ने पैकेट खोलकर सबके सामने रख दिया। 

"Wow champagne, लेकिन तुमने तो कहा था पार्टी में ड्रिंक्स हैं ही नहीं" 

"गौरव मेरे यार पार्टी में ड्रिंक्स ना हो ऐसा हो सकता हैं क्या, friends, let's enjoy, music" अनिरुद्ध के इतना कहते ही सब मस्ती में झूमने-गाने लगे।  

"पूर्वी, क्या तुम भी ड्रिंक करती हो।" 

"yes off course mayank, क्या तुम नहीं लेते" 

"लेता हूँ, लेकिन कभी-कभार" 

"तो मैं भी शराब के नशे में हमेशा झूमती नहीं रहती।" 

"हा हा हा तुम भी कमाल करती हो, मेरा वो मतलब नहीं था।" 

"मैं मज़ाक कर रही थी।" 

"जानता हूँ, चलो अपने-अपने गिलास भर ले" 

"बिल्कुल, वैसे भी ये वाली ड्रिंक मेरी फ़ेवरेट हैं।" 

"ओह फिर तो पीनी ही पड़ेगी।" 

"फ्रेंड्स आज पूरी रात पार्टी हैं, जमकर मज़ा करेंगे।" एकता ने नशे में झूमते हुए जैसे ही कहा। 

"बीवी मज़ा करेंगे नहीं, कर रहें हैं।" पास ही खड़ा अनिरुद्ध ने भी ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा। 

पार्टी पूरे शबाब पर थी, वहाँ मौजूद हर किसी के हाथ में champagne थी, सब नाच रहे थे, गा रहे थे, किसी को किसी का होश ही नहीं था, और इसी नशे की हालत में अचानक से पूर्वी की ड्रिंक उसकी ड्रेस पर गिर गयी। 

"Oh shit" 

"purvi don't worry, मेरे साथ चलो मैं तुम्हारी ड्रेस साफ़ करवा देता हूँ। इतने में ही मयंक ने कहा। 

"मयंक, थैंक्स पूर्वी की मदद करने के लिए....पूर्वी मेरे रूम के वाशरूम में चली जाओ।" एकता के कहते ही

"welcome bhabhi ji" मयंक ने कहा, दरअसल नशे में सभी अपने होश-हवास खो बैठे थे। 

 

पूर्वी वाशरूम में जाकर अपने ड्रेस साफ़ करने लगी, लेकिन जब थोड़ी देर बाद वापिस आई तो मयंक वहीं पलंग पर लेटा हुआ था। 

"तुम यहाँ क्या कर रहे हो, जाओ पार्टी एन्जॉय करो" 

"अरे तुम भी कमाल करती हो, तुम्हारी मदद के लिए आया था ना" 

"No thanks, now leave me" 

"what happened purvi" 

"nothing, sorry" इतना कहते ही पूर्वी वहीं पास रखी कुर्सी पर सिर झुकाकर बैठ गयी। 

"पूर्वी तुम ठीक तो हो।" 

"Hello friends, any problem" पूर्वी कुछ कहती इससे पहले ही रूम में गौरव आ गया।  

"नहीं कुछ नहीं, वो पूर्वी की ड्रेस पर ड्रिंक गिर गयी थी तो वही साफ करने आये थे।" 

"ओके, मयंक तुझे अक्षत बुला रहा हैं।" 

"लेकिन, पूर्वी" 

"उसे मैं संभालता हूँ तू जा" गौरव के कहने पर मयंक चला गया, लेकिन उसके जाते ही

"गौरव, माय लव क्या हैं ये, तुम्हारा ये दोस्त तो मेरे पीछे ही पड़ गया।" 

"गलती तुम्हारी भी हैं, क्यों की तुमने उसके साथ दोस्ती, और उसको इतना भाव क्यों दे रही हो, ख़ैर तुम चिंता मत करो करते हैं कुछ, पूर्वी, ऐसा लगता हैं इश्क़ हो गया हैं इसे तुमसे" 

"इश्क़ ! my foot, gaurav, i am always your, love you baby." 

"love you my sweet heart, and now let's go,will enjoy the party" 

"ठीक हैं चलो, लेकिन तुम्हारे इस दोस्त से पीछा कैसे छुड़ाऊँ।" 

"वैलेंटाइन पार्टी खत्म होने के बाद ब्रेक-अप करके।" 

"क्या !" 

"हाँ बेचारे को एक रात का बॉय फ्रेंड तो बना रहने दो।" 

"गौरव तुम भी ना, कमाल करते हो।" 

"कमाल मैं नहीं तुम करती हो, किसी को शक भी नहीं हो रहा की हम एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं, और वो भी पिछले पाँच सालों से, जब तुम पहली बार एकता के कनवोकेशन में कॉलेज आई थी।" 

"क्यों, तुम्हारा कनवोकेशन नहीं था उस वक़्त" 

"हाँ मेरा भी था...... ख़ैर छोड़ो अब ये सोचो की उस मयंक का क्या करोगी।" 

"सोचती हूँ.....फिलहाल पार्टी एन्जॉय करें।" और फिर दोनों ही उस रूम की ओर चले गए जहाँ पार्टी चल रही थी। लेकिन पूर्वी को पार्टी के बाद मयंक से कुछ कहने की ज़रुरत ही नहीं पड़ी क्योंकि उसने सबकुछ सुन लिया था।  


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