Puchtaach (Story On Murder Mystery)

“वो 25 दिसंबर 2018 की रात थी, अपार्टमेंट में रहने वाले अधिकतर लोग सोसायटी कम्पाउन्ड में आयोजित क्रिसमस पार्टी का आनंद उठा रहे थे, लेकिन सेवन्थ फ्लोर पर रहने वाली अनामिका जाधव सुबह से ही अपने घर से बाहर नहीं निकली थी, और शायद आस-पास के फ्लैट्स वालों ने भी इस ओर खास ध्यान नहीं दिया, नहीं तो किसी ना किसी को तो फ्लैट के अंदर क्या चल रहा है पता चल ही जाता” ये कहते ही नव्या ने चाय का कप मेरे हाथ में थमा दिया।

“गजब है, सच में आजकल लोग बहुत ही व्यस्त रहने लगें हैं, आस-पास क्या हो रहा हैं उन्हे कुछ पता ही नहीं चलता।“ मैंने चाय का पहला घूँट भरते हुए कहा।

“मिसेज पाटिल, वैसे आप इतने सालों बाद इस केस के बारे में क्यों इतनी पूछताछ कर रहीं हैं, अब तो पुलिस ने भी इस केस की फाइल बंद कर दी है।“ नव्या के पूछते ही,

“पुलिस ने ये केस इसलिए बंद किया क्योंकि उन्हे अनमिका के कातिल का कोई सुराग ही नहीं मिला, और इसे आत्महत्या का रूप दे दिया गया।“

“हाँ तो वो आत्महत्या ही थी।“

“नहीं वो एक हत्या थी, और मैं साबित भी कर सकती हूँ।“ मैंने पूरे विश्वास के साथ कहा।

“लेकिन आप अनामिका को कैसे जानती हैं, और उसके जाने के चार साल बाद क्यों आयीं हैं, इससे पहले आप कहाँ थी, और सबसे बड़ी बात आप इतने यकीन के साथ कैसे कह सकती हैं कि उसकी हत्या ही हुई थी, और सबसे बड़ी बात आपको मुझसे ही सारी पूछताछ क्यों करनी है।“ नव्या ने एक साथ कई सवालों की मुझ पर बौछार कर दी,

“अरे, अरे, मैंने तुम्हें बताया तो था कि मैं एक समाज सेविका हूँ, और महीना भर भर पहले ही मुझसे किसी ने अनामिका के कातिल को पकड़ने में मदद माँगी है, और पिछले एक महीने से मैं और मेरे साथी तुम्हारी इस सोसायटी पर नजर रखे हुए हैं, और हमारे हिसाब से कातिल इसी सोसायटी का रहने वाला है।“ मैंने बेहद ही तसल्ली से नव्या के सवालों का जवाब देने की कोशिश की, क्योंकि मैं बात को बिगड़ने नहीं दे सकती थी।

“लेकिन आपने अभी तक ये नहीं बताया कि पूछताछ मुझसे ही क्यों की जा रही है, किसी और से क्यों नहीं”

“पहले तुम बताओ, तुम कबसे जानती थी अनामिका को”

“साल 2010 से, हमारी पहली मुलाकात उस साल सोसायटी में होने वाले गणपति स्थापना के अवसर पर हुई थी।“

“और तब से ही वो तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड बन गयी?” मेरे पूछते ही,

“नहीं, मैं सेकंड फ्लोर पर रहती हूँ, और वो सेवन्थ पर रहती थी, हमारी मुलाकते काफी कम होती थी, वैसे हम अधिकतर लिफ्ट में ही मिलते थे।“

“तो फिर वो तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड कैसे बनी !” मैंने पूछा।

“साल 2015 की बात है, एक कॉमन फ्रेंड की बर्थडे पार्टी में हम दोनों ही मेहमान थे, मैं नहीं जानती थी कि अनामिका से वहाँ मुलाकात हो जायेगी।“

“और शायद अनमिका भी नहीं जानती थी कि उसकी तुमसे मुलाकात हो जाएगी।“

“जी” नव्या ने छोटा-सा जवाब दिया।

“वो कॉमन फ्रेंड कौन था, या फिर कौन थी, कुछ बता सकती हो उसके बारे में” नव्या को शायद मुझसे इस सवाल की उम्मीद नहीं थी इसलिए वो सकपका गयी।

“जी वो मेरा कॉलेज फ्रेंड था”

“था या थी” मैंने नव्या से आँखे मिलाते हुए सवाल दागा।

“जी था, रोहित नाम था उसका”

“और तुमने बताया कि वो था, मतलब वो अब तुम्हारा फ्रेंड नहीं है या फिर कोई ओर बात है।“ मैं धीरे-धीरे नव्या को अपने सवालों के घेरे में लेने की कोशिश कर रही थी।

“जी वो......अब इस दुनिया में नहीं है। नव्या के कहते ही,

“कैसे, क्या हुआ था उसे”

“जी, सुना है कि उसे हार्ट अटैक आया था।“ नव्या के शब्दों से उसका असहज होना साफ झलक रहा था।

“हे ईश्वर आजकल किसी को कब क्या हो जाये पता ही नहीं चलता, भगवान उसकी आत्मा को शांति दे।“ मैंने ऊपर देख दोनों हाथ जोड़ते हुए कहा।

“तुम्हारे लिए तो बेहद ही दुखद रहा होगा ये सबकुछ, इधर अनामिका का जाना और दूसरी तरफ रोहित का जाना।“ ये कहते हुए मैं लगातार नव्या का चेहरा पढ़ रही थी।

“जी, लेकिन कर भी क्या सकते हैं, लेकिन आपने बताया कि अनामिका की हत्या हुई है तो फिर आपको किस पर शक है।“ नव्या को जैसे सबकुछ जान लेने की बेहद ही जल्दी थी।

“इतनी भी क्या जल्दी है तुम्हें सबकुछ जान लेने की, ऐसा करो पहले एक-एक कप चाय और बना लाओ, और साथ में कुछ नाश्ता भी” मैं अभी कुछ और बातें करना चाहती थी नव्या से

“जी, अभी लाती हूँ।“ इतना कह नव्या जैसे ही ड्रॉइंग रूम से किचन की ओर जाने लगी।

“नव्या, अगर तुम्हें बुरा ना लगे तो क्या मैं भी तुम्हारे साथ आ सकती हूँ।“ मैं बिना उसके जवाब का इंतजार किए अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गयी।

“जी, बिल्कुल आइए” नव्या को ना चाहते हुए भी मुझे अपनी किचन में आमंत्रित करना पड़ा।

किचन में पहुँचकर वो चाय बनाने में मशगूल हो गयी और मैं उसकी किचन का मुआयना करने में, “अकेली रहती हो?”

“जी” नव्या ने आश्चर्य से मेरी ओर देखा,

“मैने पूछा अकेली रहती हो?”

“जी हाँ”

“बाकी परिवारवाले कहाँ हैं, मेरा मतलब माता-पिता, भाई-बहन या फिर पति बच्चे”

“जी मेरी शादी नहीं हुई, और माता-पिता, भाई-बहन में से कोई नहीं है मेरा।“ नव्या ने चाय में चीनी डालते हुए कहा।

“ओके, शादी हुई नहीं या फिर की नहीं” मेरे पूछते ही नव्या झल्ला उठी,

“हुई नहीं या की नहीं इससे क्या फ़र्क पड़ता है, आप अनामिका के कातिल की खोज करने आई है या मेरी ज़िंदगी में दखलंदाज़ी”

“सॉरी, मेरा मतलब तुम्हें दुख देना नहीं था।“

“नहीं, सॉरी तो मुझे बोलना चाहिए, मुझे आपसे ऐसे बात नहीं करनी चाहिए।“

“इट्स ओके, अगर चाय नाश्ता तैयार हो तो ड्रॉइंग रूम में चलकर बैठे” मैंने चाय की ट्रे उठाते हुए कहा।

“अरे आप रहने दीजिए, क्यों तकल्लुफ़ कर रहीं हैं, मैं लेकर चलती हूँ ना”  नव्या ने ऐसा कहते ही चाय की ट्रे मेरे हाथ से ले ली।

“इसमे तकल्लुफ़ कैसा, खुद के घर में भी तो काम करते हैं।“ दरअसल इस तरह की बातें कर मैं नव्या का पूरी तरह से सहज कर लेना चाहती थी।

“जी, लेकिन आप यहाँ मेहमान हैं।“ ऐसा कह नव्या नाश्ते के लिए बनाए गए पनीर के पकोड़े चटनी के साथ प्लेट में परोसने लगी।

“नव्या तुमने बताया कि एक कॉमन फ्रेंड के यहाँ तुम्हारी और अनामिका की मुलाकात हुई थी, इस फ्रेंड से कैसी फ्रेंडशिप थी तुम्हारी”

“रोहित, मेरा कॉलेज फ्रेंड था, फर्स्ट ईयर से जानते थे हम एक दूसरे को”

“केवल दोस्ती ही थी या कुछ और” मैंने गरम-गरम पकोड़ा अपने मुँह में डालते हुए पूछा।

“दरअसल मैं उसे चाहने लगी थी, लेकिन उसको इस बात का इल्म तक नहीं था।“ नव्या अब मेरे साथ कुछ हद तक सहज होने लगी थी, जो कि मेरे लिए सकारात्मक था।

“शायद वो अनामिका को चाहता था।“ मैंने अचानक से तीर चलाया।

“पता नहीं, इस बारे में मैं कुछ नहीं जानती।“ मेरे कहते ही नव्या सकपका गयी।

“नव्या, सच-सच बताना रोहित और तुम्हारे बीच निश्चित तौर पर अनामिका ही आ रही थी ना।“ मैंने अपनी कमान से एक और तीर छोड़ा।

“ये क्या बोल रहीं हैं आप, मुझे नहीं पता अनामिका का और रोहित का क्या रिश्ता था।“

“रोहित के घर पहली बार मिलने के बाद तुम अनामिका से कितनी बार मिली ?

“कई बार, उसके बाद हम एक अच्छे दोस्त बन गए थे।“

“या फिर तुम्हारी ओर से उससे दोस्ती करना एक मजबूरी थी।“ मेरी ओर से अब लगातार सवालों की बौछार जारी थी।

“मजबूरी ! कैसी मजबूरी ! दोस्ती भी कोई मजबूरी में की जाती हैं भला” नव्या लगातार अपना बचाव करने की कोशिश कर रही थी।

“हाँ जब दो लड़कियों का एक ही बॉय फ्रेंड हो तो ऐसा करना पड़ सकता हैं।“ मैंने पूरे विश्वास के साथ कहा।

“क्यों करना पड़ सकता है।“ नव्या बिल्कुल भी कमजोर पड़ने को तैयार नहीं थी।“

“सामने वाले प्रतिद्वंदी को रास्ते से हटाने के लिए।“ मेरे कहते ही नव्या एकाएक सिहर गयी।

“ये क्या बकवास कर रहीं हैं आप”

“नव्या, 2015 में रोहित के घर होने वाली पार्टी के बाद तुम्हें अनामिका के साथ दोस्ती बढ़ाने की जरूरत क्यों महसूस हुई। मैंने पूछा।

“महसूस का क्या मतलब है, मुझे पार्टी में उससे बात करके अच्छा लगा तो सोचा कि इस दोस्ती को आगे बढ़ाया जा सकता है।“ नव्या ने बेहद ही धीरज से जवाब दिया।

“हम्म...तो तुम कहना चाहती हो कि अनामिका तुम्हारी अच्छी दोस्त थी।“

“हाँ, कितनी बार कहनी पड़ेगी ये बात”

“सॉरी, मैं तुम्हें परेशान नहीं करना चाहती।“

“आप कर रहीं हैं मिसेज पाटिल, मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा कि आप क्यों मेरे पीछे पड़ गयी हैं।“ नव्या अब हिम्मत हारने लगी थी।

“तुम अपना गुनाह कबूल कर लो। मैं चली जाऊँगी यहाँ से” मैंने बिना लाग-लपेट के अपनी बात कह दी।

“गुनाह कबूल कर लूँ ! कौनसा गुनाह !”

“अनामिका और रोहित की हत्या का गुनाह” मेरे कहते ही नव्या एकाएक सोफ़े पर से उठकर खड़ी हो गयी।

“गेट आउट, मैं पिछले दो घंटे से आपकी इज्जत कर रहीं हूँ, मेहमाननवाजी कर रहीं हूँ इसका मतलब ये तो नहीं है ना कि आप मुझ पर ही सारे इल्जाम लगा दे।“ नव्या की आँखे गुस्से से लाल हो चुकी थी, और उसका ये व्यवहार देख मुझे बनती बात बिगड़ती हुई नजर आ रही थी।

“ओके, इसका मतलब तुमने कुछ नहीं किया।“

“नहीं मिसेज पाटिल, मैंने कुछ नहीं किया।“

“तो फिर ये रिकॉर्डिंग कैसी” मैंने अपने मोबाईल पर एक औडियो रिकॉर्डिंग चला दी।

“क्या है ये” नव्या अब कुछ घबराने लगी थी।

“खुद ही सुन लो” ये कह मैंने मोबाईल उसके कुछ और नजदीक कर दिया। वो जैसे-जैसे रिकॉर्डिंग सुनती जा रही थी उसके माथे पर पसीने की बूँदों की संख्या बढ़ती जा रही थी, औडियो का अंत होता उससे पहले ही वो अपना संतुलन खो बैठी और जमीन पर गिर पड़ी...... अब बाजी पूरी तरह से मेरे हाथ में थी।

“ये रिकॉर्डिंग कहाँ से मिली आपको ?”

“रोहित के मोबाईल से, किस्मत से उस वक्त उसके फोन की रिकॉर्डिंग ऑन थी, ये बात एक-डेढ़ महीना पहले ही उसके पेरेंट्स को पता चली, और इस केस की छानबीन मैं उसके परिवारवालों के कहने पर ही कर रहीं हूँ, और मैं समाज सेविका नहीं बल्कि सीआईडी इन्स्पेक्टर मिसेज पाटिल हूँ।“ दरअसल मोबाईल में वो सबकुछ रिकार्ड हो चुका था जो कि नव्या ने रोहित को जहर देने के तुरंत बाद कहा था, उस रिकॉर्डिंग के मुताबिक नव्या खुद स्वीकार कर रही है कि उसने ही रोहित को जहर दिया है और उसने ही अनामिका को भी जहर दिया है, कारण था वो रोहित और अनामिका को एक साथ नहीं देख पाई।

“क्या ! इसका मतलब आपने मुझसे झूठ बोला”

“हाँ, ये जरूरी था, अब बोलो करती हो अपना गुनाह कबूल या फिर कोई ओर रास्ता अपनाना पड़ेगा मुझे” अब मेरा व्यवहार सख्त हो चुका था।

“हाँ किया था मैंने दोनों का खून, नहीं देख पा रही थी अपने रोहित को किसी ओर के साथ, इसलिए दोनों को ही मार दिया, क्रिसमस वाले दिन अनामिका को मैं दोपहर में ही ठिकाने लगा चुकी थी, और रोहित को अगले साल 14 जनवरी 2019 को उस वक्त ठिकाने लगा दिया जब सब पतंगे उड़ाने में मशगूल थे।“ कहते ही नव्या फूट-फूटकर रो पड़ी। 

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