Waqt Badal Gaya Hai (Story On Generation Gap)

कुछ हफ्तों पहले अचानक से मेरी मुलाकात मॉल में अपनी एक कॉलेज फ्रेंड से हो गयी (हमने साथ ही दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक कॉलेज से बी. कॉम किया था। लेकिन तीस साल पहले उसकी शादी के बाद हमारी मुलाकते काफी कम हो गयी, और अब तो तकरीबन पिछले दस साल से हम बिल्कुल भी नहीं मिले हैं) “कशिश ! तुम यहाँ !” मैंने उसकी ओर बढ़ते हुए आश्चर्य से पूछा।

“शलोका, बहुत दिनों बाद मुलाकात हुई है तुमसे, कैसी हो”

“बहुत दिनों बाद नहीं, बहुत सालों बाद बोलो।“ मैंने हँसते हुए कहा।

“बिल्कुल” कशिश ने भी मेरी बात का समर्थन किया ।

“अच्छा तुमने बताया नहीं मुंबई में कैसे, और कब से हो यहाँ, तुम्हें तो शायद पता था ना मैं यहीं रहती हूँ तो फिर मुझसे मिलने की कोशिश क्यों नहीं की।“

“बस, बस शलोका, थोड़ा साँस तो ले लो......अच्छा सुनो, मैं पिछले दो साल से मुंबई में हूँ, मेरे पति का ट्रांसफ़र हुआ है यहाँ, और मैं तुमसे कैसे मिलती इतने बड़े शहर में, मेरे पास तुम्हारा कोई कान्टैक्ट नंबर भी तो नहीं था।“ कशिश के कहते ही,

“लेकिन तुम्हारे पास मेरा फोन नंबर है तो सही” मैंने कहा।

“है नहीं था, वो गलती से डिलीट हो गया था।“

“ओह सॉरी, अच्छा कोई बात नहीं, अगर तुम्हारी शॉपिंग हो गयी हो तो तुम मेरे साथ मेरे घर चलो, आराम से ढेरों बातें करेंगे, या फिर यही फूड-कोर्ट में बैठते हैं।“ मेरे कहते ही,

“नहीं, ना तुम्हारा घर और ना ही फूड-कोर्ट, हम मेरे घर जायेंगे, यही पास में ही है, इस बहाने तुम मेरा घर भी देख लोगी, और इतने सालों की बातें भी हो जायेंगी।“ कशिश ने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा।

“ठीक है, आज तुम्हारे घर चलते हैं, फिर कभी मेरे घर आना।“ मेरे कहते ही कशिश ने मुस्कुराकर मौन सहमति जताई।

 

कुछ ही देर में हम दोनों कशिश के घर पहुँच गए, “घर पर कोई नहीं है क्या?” मैंने उसे लॉक खोलते हुए देखा तो पूछा।

“हाँ, पति देव तो ऑफिस के काम से एक महीनें के लिए शहर से बाहर गए हुए हैं, और बच्चे अपनी-अपनी जॉब पर”

“जॉब ! अरे मैं तो भूल ही गयी, तेरे बच्चे तो काफी बड़े हो गए होंगे, और शादी लायक भी, अभी तक सास बनी या नहीं” मैंने उसे छेड़ते हुए पूछा।

“अरे कहाँ यार, आसान नहीं है, आजकल बच्चों की शादी करना, तेरे तो अभी छोटे होंगे, कुछ साल रुक जा, तू भी इन सभी मुश्किलों से रूबरू होगी।“ कशिश ने पानी का गिलास मेरी ओर बढ़ाते हुए कहा।

“मैं कुछ समझी नहीं, कैसी मुश्किलें, थोड़ा विस्तार से बता।“ मैंने पूछा।

“अब क्या बताऊँ, मेरी बेटी नेहा अठाईस साल की हो चुकी है, यूँ तो मैं उसकी शादी के लिए दो-तीन साल और रुक सकती हूँ, लेकिन फिलहाल जो हालात हैं मुझे तो लगता है, अगले पाँच साल भी शादी हो जाए तो गनीमत है, और मेरा बेटा जिगर भी तो अब शादी के लायक हो चुका है। लेकिन शादी के कोई आसार नहीं नजर नहीं आ रहे हैं शलोका”

“मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है, तू कहना क्या चाहती है।“

“मैं पहले चाय बनाकर लाती हूँ, फिर बैठकर सारी बातें विस्तार करेंगे।“ इतना कह कशिश रसोई की ओर चली गयी, और मैं भी उसके पीछे-पीछे चल पड़ी।

चाय नाश्ते के बाद कशिश ने मुझे बताया कि “आजकल बच्चों की शादी करना कोई बच्चों का खेल नहीं है, अब देख ना हमारे जमाने में मम्मी-पापा ने ही फ़ैसला कर लिया था कि हमारी शादी किससे और कब करनी है, उन्होंने वो ही किया जिसमे हमारी भलाई थी, और हमने उनकी बात का मान भी रखा। लेकिन आजकल के बच्चे, बाप-रे-बाप किसी की सुनते ही नहीं है, उन्हे तो लगता है कि उनके माँ-बाप निहायती बेवकूफ हैं, कुछ समझते ही नहीं, और इसी वजह से जब भी हम नेहा के लिए कोई रिश्ता लाते हैं तो कहती है मैं अपने हिसाब से  लड़के की Enquiry करवाऊँगी उसके बाद ही कोई जवाब दूँगी, और एक नई बात और सामने आई है, अगर कही किसी लड़के से थोड़ी मेल-मुलाकात हो जाये या फोन पर बात हो जाए और हमारी बिटिया रानी को उसके साथ अपनेपन का एहसास ना हो तो मना कर दिया जाता है, अरे एक-दो मुलाकातों में कैसे अपनेपन का एहसास होगा, कैसे फीलिंगस आयेंगी, वो तो शादी के बाद धीरे-धीरे आ ही जाती है, और हाँ ऐसा नहीं है कि नेहा ही नखरे कर रही है, कई बार तो लड़कों की ओर से भी ऐसी ही प्रतिक्रिया आती है, सच कह रही हूँ आजकल की Generation की नज़रों में माँ-बापों की कोई इज्जत ही नहीं, यही नहीं और भी कई मुश्किलें है।“ कहते-कहते कशिश पानी पीने के लिए जैसे ही रुकी, मैंने सवाल दाग दिया।

“और कैसी मुश्किलें ?”

“यही कि शक्ल अच्छी नहीं है, कमाता कम है, जॉइन्ट फॅमिली है, मैं उसके पेरेंट्स के साथ नहीं रहूँगी, बड़ी फॅमिली है, हाइट ज्यादा या कम है वगैराह-वगैराह, अब तू ही बता आसान है क्या आजकल के बच्चों की शादी करना?” कशिश ने मेरी ओर सवालिया नज़रों से देखते हुए पूछा।

“तू खुश है अपनी शादी से” मैंने अचानक से उसकी ओर एक सवाल दागा, जिसकी की उसने उम्मीद भी नहीं की थी।

“शलोका, ये तू बातों का रुख मेरी ओर क्यों मोड़ रही है।“

“बता ना” मैंने फिर से वही सवाल पूछा।

“हाँ यकीनन”

“तुम पति-पत्नी एक दूसरे को अच्छे से समझते हो, एक दूसरे की जरूरतों को अच्छे से जानते हो, एक दूसरे के मन की बात अच्छे से समझ सकते हो।“

“हाँ, हाँ लेकिन तू पूछना क्या चाहती है।“ कशिश कुछ हद तक परेशान हो गयी थी।

“वो भी शादी के इतने सालों बाद” मैंने कहा।

“मतलब”

“मतलब ये कि कशिश, अगर हमें भी शादी से पहले अपने होने वाले पति के साथ बातें करने का मौका दिया जाता, उन्हे समझने का मौका दिया जाता और उनके परिवार के बारे में जानने का मौका दिया जाता तो क्या हमें इतने साल लगते उन्हे समझने में, उनके परिवार को समझने में, और ये तो हमारी किस्मत अच्छी थी जो हमारे पति अच्छे निकले, अगर कोई धोखेबाज आदमी मिल जाता, ये फिर कोई ऐसा मिल जाता जिसे कोई गंदी लत होती तो हम क्या कर लेते ज़िंदगी भर पछताने के अलावा”

“ये सब तो ठीक है शलोका लेकिन इन बातों का मेरे बच्चों की शादी से क्या संबंध है।“ कशिश ने पूछा।

“बहुत गहरा सम्बन्ध है, अभी तूने ही बताया ना कि तुम जो भी लड़का देखते हो नेहा कहती है कि वो अपनी तरफ से उसकी Enquiry करवाएगी, तो इसमे गलत क्या है, ये तो अच्छा है ना, cross check हो जायेगा, हो सकता है ऐसा करने से कोई जानकारी तुम्हें ना मिली हो और उसे मिल जाए।“ मेरे कहते ही,

“चल ठीक है, दो बार जाँच-पड़ताल करना हमारे लिए ही फायदेमंद है, क्योंकि हमारी बेटी उस घर में जायेगी, लेकिन ये क्या बात हुई कि जब तक लड़के के लिए फिलिंगस नहीं आ जाती हामी नहीं भरेगी।“ कशिश ने फिर से मेरी ओर सवालिया नज़रों से देखा।

“इसमे भी कुछ गलत नहीं है, बल्कि अभी कुछ देर पहले मैंने तुझसे पूछा था कि तू खुश है ना अपनी शादी से, बस उसी बात से संबंधित है इसका जवाब”

“थोड़ा विस्तार से समझाएगी।“ कशिश ने कहा।

“बिल्कुल, कशिश शादी एक बहुत ही नाजुक मामला होता है, दो अन्जान इंसान एक होते है, वो एक दूसरे के बारे में कुछ नहीं जानते, फिर भी एक-दूसरे के साथ ज़िंदगी गुजारने की कसमें खाते हैं, और फिर धीरे-धीरे एक दूसरे को जानने और समझने की कोशिश करते हैं, और अगर लड़के का संयुक्त परिवार हो तो ये मुश्किलें और बढ़ जाती हैं, क्योंक एक-दूसरे के साथ बिताने के लिए वक्त कम होता है, और बच्चे होने के बाद तो एक-दूसरे के लिए टाइम ही नहीं होता। अगर कम शब्दों में कहूँ तो जिनको हम गाड़ी के दो पहिये कहते हैं वो एक दूसरे की कई बातों से अन्जान होते हैं, तो अगर इसमे नेहा कहती है वो किसी से तब तक शादी नहीं करेगी जब तक कि उसके लिए फिलिंगस नहीं आ जाती तो इसमे बुरा क्या है। अरे फिलिंगस आयेंगी, एक-दूसरे के साथ comfortable feel करेंगे, कम से कम दोस्ती का रिश्ता बनाएगे तब ही तो आगे का सफर आसान होगा, नहीं तो हमारी तरह से पूरी ज़िंदगी एक दूसरे को समझने में ही गुजर जायेगी, और आजकल इतना टाइम है किसके पास, और सबसे बात, एक लड़की को तो शादी से पहले अपने होने वाले पति के साथ कम से कम एक दोस्त का रिश्ता तो बना ही लेना चाहिए। क्योंकि जब वो अपने ससुराल जाए तो कोई हो जिसके भरोसे पर उसकी आने वाली ज़िंदगी आसान हो जाए।“ इतना कहने के बाद मैं कुछ लम्हों तक कशिश की ओर देखती रही, दरअसल उसकी प्रतिक्रिया का इंतजार करती रही।

“बात तो तेरी सही है” अचानक से उसने कहा।

“तो तू भी मुझसे सहमत हो रही है।“

“हाँ शलोका, मैंने इस नजरिए से तो सोचा ही नहीं, अगर मैं अपने अतीत के पन्ने पलट के देखूँ तो पता चलेगा कि मैंने अपने ससुराल में अनगिनीत मुश्किलों का सामना किया है, वो भी सिर्फ इसलिए कि मैं किसी को भी नहीं जानती थी, यहाँ तक कि मेरे पति भी मेरे लिए एक अंजान ही थे।“

“तो फिर बता, नेहा क्या गलत कर रही है, बल्कि हमें तो खुश होना चाहिए कि आजकल की Generation इतनी समझदार है, वो ज़िंदगी का हर कदम सोच-समझकर उठाना चाहती है।

“शलोका, ये सब बातें मेरे दिमाग में क्यों नहीं आयी?” कशिश के पूछते ही,

“होगा तो आएगी ना” मैंने मज़ाक किया, जिसे सुन वो ठहाका लगा हँस पड़ी, और मैंने भी उसका साथ निभाया।

“कशिश और रही बात शक्ल-सूरत की, कमाई की, हाइट की, जॉइन्ट फॅमिली की तो मुझे यकीन है इनका फ़ैसला नेहा situation के हिसाब से ही लेगी।“ मैंने अपनी बात पूरी की।

“लेकिन कुछ भी हो शादी के लिए देर तो हो रही है ना”

“कशिश, कशिश नेहा Independent लड़की है, तेरे ऊपर बोझ नहीं, और अपने बच्चे भी बोझ होते हैं क्या, अगर शादी में थोड़ी-बहुत देरी भी हो जाती है तो इसमे घबराने वाली क्या बात है, कम से कम ये तसल्ली तो रहेगी कि नेहा ने शादी अपनी खुशी से की है।“

“अरे वो तो ये कहती है कि शादी करना जरूरी है क्या, अब तू ही बता क्या जवाब दूँ।“

“जो तू सोचती है वो ही जवाब दे दे।“ मैंने कहा।

“मेरे हिसाब से तो जरूरी है, क्योंकि एक औरत के लिए एक मर्द का सहारा जरूरी है।“

“गलत, बिल्कुल गलत, तेरी सोच ही गलत है।“ मैं आवेश में आ गयी।

“क्यों ! इसमे क्या गलत है?”

“गलत ये है कि हम खुद को, अपनी बेटियों को, यहाँ तक की पूरी नारी जाति से ये कह रहे हैं कि वो कमजोर है, एक मर्द की मदद के बिना वो कुछ नहीं कर सकती, नहीं कशिश ऐसा नहीं है, आजकल की नारी अपने अकेले के बलबूते पर आसमान छू सकती है, खेल-कूद, साइंस, स्टार्ट-अप, पढ़ाई-लिखाई, पॉलिटिक्स हर क्षेत्र में अकेली ही झंडे गाड़ सकती है।“

“लेकिन इन  सबका शादी से क्या लेना-देना?” कशिश के पूछते ही,

“तू समझी नहीं, अगर एक लड़की अकेले हर क्षेत्र में अपना नाम कमा सकती है तो अपनी ज़िंदगी अकेले क्यों नहीं गुजार सकती।“

“इसका मतलब तेरे हिसाब से शादी जरूरी नहीं है।“

“हाँ ऐसा कह सकते हैं।“ मेरे कहते ही,

“वाह, गजब ख्यालत हैं आपके तो शलोका जी, क्या संसार आगे बढ़ाने के लिए भी नहीं”

“कशिश तू मुझे गलत समझ रही है, शादी जरूरी है, लेकिन खुशी से, एक सजा के तौर पर नहीं, अगर हमारे बच्चे शादी खुशी से करना चाहते हैं तो ठीक है, और अगर वो दुखी है तो गलत है, और शादी के बाद दुखी है तो ऐसी शादियों को जबरदस्ती निभाने से बेहतर तोड़ देना ही है।“

“शायद तू सही कह रही है।“ कशिश ने धीमे से कहा।

“कशिश, ऐसा मत सोचना की मैं तेरे ख्यालतों के खिलाफ हूँ, बल्कि मैं तो नेहा का नजरिया समझने की कोशिश कर रही थी, और उसी आधार पर सारे जवाब दिए।“

“हाँ लेकिन तूने सही कहा, दरअसल हमें ही आजकल की पीढ़ी को समझने की कोशिश करनी चाहिए, हो सकता है इससे कुछ हद तक Generation gap कम हो।“ कशिश के कहते ही,

“बिल्कुल, अगर हम चाहते हैं कि आजकल की Generation हमें समझने कोशिश करे तो हमें भी उन्हे समझना चाहिए, और अब मैं चलती हूँ वैसे ही बहुत देर हो चुकी है।“ ऐसा कहते हुए मैं उठकर खड़ी हो गयी।

“अरे रुक-रुक खाना खाकर जाना” कशिश ने आग्रह किया, लेकिन मैं बिना रुके ही अपने घर के लिए रवाना हो गयी, ये सोचते हुए की ज़माना कितना बदल गया है और अब शायद आने वाली पीढ़ी को उन समस्याओं का सामना ना करना पड़े, जिनका हमने किया था। अगर मैं अपनी नजर से देखूँ तो ये एक अच्छी शुरुआत है। खासकर Arrange Marriage में, क्योंकि Love Marriage में तो लड़का-लड़की एक-दूसरे के बारे में पहले से ही सबकुछ जानते हैं। वैसे ये शुरुआत काफी पहले हो जानी चाहिए थी, लेकिन कोई बात नहीं देर आए दुरुस्त आए। और अचानक से आने वाले बदलाव के बारे में सोचकर मेरे होंठों  पर एक मुस्कान आ गयी।

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