Kastoori (Story On Women Empowerment)

 मध्यप्रदेश के एक छोटे से गाँव में रहने वाली 12 वर्षीय नन्ही कस्तूरी गाँव के एक ओर बने आम के बगीचे में कभी एक डाली से दूसरी तो कभी दूसरी से तीसरी पर खुद की ही मस्ती में मस्त होकर छलाँगे लगा रही थी कि इतने में ही, “अरी ओ कस्तूरी कहाँ मर गयी?” एक महिला की आवाज गूँजी।

“माँ, कच्ची कैरी तोड़ रही हूँ, तूने ही कहा था ना आचार बनाने के लिए चाहिए।“ चिल्लाते हुए कस्तूरी ने जवाब में कहा।

“अरी, कैरी बाद में तोड़ना पहले घर चल”

“क्यों भला?” कस्तूरी ने पेड़ पर बैठे-बैठे ही पूछा।

“मेहमान आ रहे हैं घर पर, अब चल जल्दी ज्यादा सवाल ना कर” कस्तूरी की माँ ने कहा।

“हाँ ठीक है आयी, वैसे कौन आ रहा है माँ, और मेरे लिए क्या उपहार ला रहे हैं।“ कस्तूरी ने बेहद ही मासूमियत से पूछा।

“हट, वो क्यों उपहार लायेंगे तेरे लिए, अब ज्यादा जुबान ना चला और घर चल कर तैयार हो जा”

“तैयार ! अच्छी तो लग रही हूँ माँ, फ्राक पर थोड़ी मिट्टी है, झाड लूँगी।“ ऐसा कहते ही कस्तूरी अपनी फ्राक पे लगी मिट्टी साफ करने लगी।

‘अरी साड़ी पहन लेना, वो कोई ऐसे-वैसे मेहमान नहीं, शादी के लिए तुझे देखने आ रहें हैं।“

“किसकी शादी?” कस्तूरी को कुछ समझ नहीं आ रहा था।

“अरे तेरी और किसकी”

“मेरी ! नहीं माँ मुझे नहीं करनी शादी”

‘क्यों नहीं करनी, शादी तो सभी करते हैं लाड़ो” कस्तूरी की माँ के कहते ही,

“अच्छा ठीक है तू कहती है तो कर लूँगी, अगर मेरा दूल्हा सफेद घोड़े पर आया तो”

“ये कहाँ से सुना तूने, ये सब तो कहानियों मे होता है।“ कस्तूरी की माँ ने हँसते हुए कहा।

“नहीं माँ असलियत में भी होता है, ध्यान है विमला का दूल्हा उसे सफेद घोड़े पर लेने आया था” कस्तूरी ने बड़ी ही मासूमियत से बोली।  

“हट पगली, वो तो घोड़ी थी सभी दूल्हे उसी पर आते हैं, वो तो सफेद भी हो सकती है और काली भी, और भूरी भी”

“अच्छा माँ तो सफेद घोड़े पर किसका दूल्हा आता है।“

“किसी का नहीं पगली, ये तो कहानियों में होता है, चल घर आ गया अब फटाफट तैयार हो जा, नहीं तो बाबा गुस्सा करेंगे।

“ठीक है माँ” और फिर आने वाले भविष्य से अन्जान कस्तूरी खुशी-खुशी तैयार होने चली गयी।

कुछ देर बाद, ”अजी सुनती हो कस्तूरी की माँ, कस्तूरी तैयार हुई या नहीं” इतने में ही आँगन से मर्दाना आवाज आयी।

“जी, बस हो ही गयी।“ कस्तूरी की माँ के कहते ही,

“थोड़ा जल्दी करो, लड़केवाले आते ही होंगे।“

कुछ देर बाद जब लड़केवाले कस्तूरी को देखने आए तो उन्होंने पहली ही नजर में उसे पसंद कर लिया, जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी, “मनोहर सिंह जी बधाई हो हमने अपने बेटे केशव के लिए आपकी बेटी कस्तूरी को पसंद कर लिया है, हमारी ओर से ये रिश्ता पक्का है।“

“आपका बहुत-बहुत आभार सरकार, हमारे तो भाग खुल गए।“ ये कहते हुए कस्तूरी के पिता मनोहर सिंह जी भावुक हो गए।

“लेकिन मुझे नहीं मंजूर” अचानक से कस्तूरी ने कहा।

“चुप कर” अगले ही क्षण ऐसा कह उसकी माँ ने उसके मुँह पर हाथ रख चुप कराने की कोशिश की, लेकिन वो कहाँ मानने वाली थी,

“माँ मैंने अपने दूल्हे को तो देखा ही नहीं”

“ओह, तो तुम्हें अपना दूल्हा देखना है।“

“हाँ दूल्हे की माँ, उसे देखे बिना कैसे ब्याह कर लूँ।“ कस्तूरी ने बड़ी ही मासूमियत से कहा।

“कस्तूरी......जुबान संभाल अपनी, कस्तूरी की माँ क्या यही संस्कार दिए हैं तूने इसे” इतने में ही मनोहर सिंह जी अपनी पत्नी पर चिल्ला पड़े।

“अरे कोई बात नहीं भाईसाहब बच्ची है, धीरे-धीरे सब समझ जाएगी, आप तो मुँह मीठा करवाइए।“ लड़के की माँ ने बात को संभालते हुए कहा। और फिर सभी एक दूसरे का मुँह मीठा करवाकर खुशी का इजहार करने लगे।

कुछ दिनों बाद एक शुभ महुर्त निकाल कस्तूरी और केशव की शादी कर दी गयी, एक ऐसी शादी जिसमे शादी से पहले ना तो लड़के ने लड़की को देखा ना ही लड़की ने लड़के को, यहाँ तक की बेचारी लड़की को तो शादी का मतलब तक नहीं पता था, ना ही किसी ने उसे बताया।

“शादी करके जैसे ही कस्तूरी अपने ससुराल गयी तो पूरा दिन रस्मों-रिवाज में ही गुजर गया, लेकिन जैसे ही साँझ ढलने लगी घर की औरतें फुसफुसाने लगी, लेकिन कस्तूरी कुछ भी समझ नहीं पा रही थी। वो तो बस अपनी नन्द और जेठानियों के द्वारा तैयार किये जाने के बाद आने वाले पलों से अन्जान अपने कमरे में चार हाथ लंबा घूँघट निकालकर पलंग पर जाकर बैठ गयी।

“कस्तूरी, कैसी हो, मैं तुम्हारा पति केशव” कुछ देर बाद कदमों की आहट के साथ एक मर्दाना आवाज गूँजी।

“जी, और इतना कहते ही कस्तूरी अपना घूँघट हटाने लगी।“

“अरे, अरे रुको, ये तो मुझे करना है, तुम्हें इतना भी नहीं पता” ये कहते हुए कस्तूरी से 10 साल बड़ा उसका पति उसके पास जा बैठा और बड़े ही प्यार से उसका घूँघट हटाने लगा।

“’गजब, तुम तो बहुत ही सुंदर हो और कितनी गोरी भी, क्या लगाती हो अपनी त्वचा पर”

“हाँ हूँ, लेकिन तुम तो कितने काले और बदसूरत हो, नहाते नहीं हो क्या कभी” कस्तूरी ने पहली बार अपने पति केशव को देख प्रतिक्रिया दी।

“हट पगली, लड़कों की सुंदरता नहीं उनकी कमाई देखी जाती है, और लड़कियों की सुंदरता और घर के कामों का हुनर.....तुझे आता है ना सिलाई-बुनाई-कढ़ाई और रसोई बनाना”

“हाँ आता है माँ ने सब सिखाया है, तो तुम कमाकर लाओगे और मैं घर के काम करुँगी।“

“हाँ बिल्कुल ठीक समझी, और फिर रात को हम खेलेंगे।“ केशव ने शरारत भरी नज़रों से देखते हुए कहा, लेकिन इसका मतलब कस्तूरी ने कुछ ओर ही समझा,

“सच, रोजना, फिर तो बहुत ही मज़ा आएगा।“ लेकिन बेचारी कस्तूरी को क्या पता था की यहाँ खेलने का क्या मतलब है, और जब तक उसे पता चला बहुत देर हो चुकी थी।

 

आज कस्तूरी की शादी हुए पूरे बीस बरस हो चुके है, उसके पाँच बच्चे भी है, जिनमे से तीन लड़कियाँ तो बड़ी हैं और दो लड़के छोटे हैं, दरअसल पहली तीन लड़कियाँ तो लड़के के चक्कर में हुई और एक लड़का होने बाद दूसरा लड़का उसकी सास की फरमाइश पर हुआ, ये अलग बात थी की इसमे पचास प्रतिशत चांस लड़की होने के भी थे, लेकिन ऊपरवाले ने कस्तूरी की सास की सुनी और पाँचवा बच्चा लड़का हो गया।

सबसे बड़ी लड़की उन्नीस बरस की हो चुकी है, क्योंकि शादी को एक साल पूरा होता इससे पहले ही कस्तूरी को प्रसव पीड़ा से गुजरना पड़ा। उसके बाद तो हर साल कस्तूरी पेट से हो जाती, क्योंकि उसकी सास जल्द से जल्द पोते का मुँह देखना चाहती थी।

कस्तूरी अपनी ज़िंदगी के बत्तीस वर्ष और शादी के बीस वर्ष पूरे करने और ढ़ेर सारे उतार-चढ़ाव देखने के बाद सोचती है क्या यही नारी जीवन है, और जब अपने पति केशव की ओर देखती है तो उसकी बदसूरती देख यही सोचती है क्या वाकई में ये आदमी मेरे बच्चों का पिता है, क्या मैंने इसके साथ बीस साल गुजारे हैं, क्या पिछले इतने सालों से हर दिन मैं इसकी हमबिस्तर हो रही थी, जब भी यह बातें उसके मन में चलती वो सहम जाती, क्योंकि पिछले बीस सालों से उसका और उसके पति का रिश्ता केवल बिस्तर से शुरू होकर बिस्तर पर ही खत्म हो जाता, उसमे भी केवल उसके पति की ही मर्जी चलती, क्योंकि कस्तूरी का तो अपने बदसूरत पति का चेहरा देख उसके पास तक जाने का मन नहीं करता था, यहाँ तक की उसे ये भी याद नहीं की कब उसने अपने पति से बातें की थी, या फिर दोनों ने मिलकर कोई सलाह-मशविरा किया था, बच्चों का तो शायद उनके पिता को नाम भी याद नहीं होगा। लेकिन ऐसी ज़िंदगी वो अपनी बेटियों के लिए नहीं चाहती, इसलिए तो सभी की मर्जी के खिलाफ जाकर उसने उन्नीस की हो जाने के बावजूद भी अभी तक अपनी बड़ी बेटी की शादी नहीं की, वो अपने बच्चों को खूब पढ़ाना चाहती है, उन्हे समझदार और काबिल बनाना चाहती है, अतीत में जो कुछ भी उसके साथ हुआ उसे दोहराने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता, और शादी का एक सबसे बड़ा कारण सेक्स भी होता है, ये तो वो बहुत पहले अपनी बेटियों को खुद ही सेक्स-एजुकेशन देकर समझा चुकी है, और अपनी आने वाली बहुओं से इस बारे में खुलकर बातें करेगी ये फ़ैसला है उसका, लेकिन जो कुछ उसके साथ हुआ अपने बच्चों के साथ नहीं होने देगी।

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