Article - Job Ya Passion / जॉब या पैशन
“Mom, please try to understand, ज़माना बदल गया है, आप समझते क्यों नहीं हो।“ मेरी फ्रेंड की बेटी काव्या पिछले काफी देर से अपनी मॉम अंजलि यानि की मेरी फ्रेंड से बहस कर रही थी।
“क्या समझना है, बकवास बातें हैं तेरी सारी, अरे हमने तुझे इतना
पढ़ाया-लिखाया M. Sc करवाया, इसलिए तो नहीं ना कि तू एक दिन बावर्ची बन जाए” अंजलि
ने गुस्से से कहा।
“मॉम कुकिंग मेरा Passion है, मुझे
किसी भी हालत में शेफ बनना है।“ काव्या के कहते ही,
“अगर शेफ ही बनना था तो इतनी पढ़ाई क्यों की।“
“अब आप मेरा मुँह मत खुलवाओ, अगर सच कह दिया तो आप बर्दाश्त नहीं कर
पाओगी।“
“अब कह ही दे, मै भी तो सुनो ऐसी क्या बात है जो मैं बर्दाश्त नहीं कर
पाऊँगी।“ अंजलि और काव्या के बीच बहस बढ़ती ही जा रही थी, इतने में मैंने कहा,
“मुझे अब चलना चाहिए।“
“नहीं, तू अभी रुक दीप्ति, तू भी तो सुन जो काव्या कहने वाली है।“
“अरे मुझे तो तुम माफ ही करो।“ इतना कह मैं जैसे ही सोफ़े पर से उठी, काव्या
ने जबरदस्ती वापिस बैठा दिया।
“नहीं दीप्ति मौसी, आपको भी सुनना होगा।“
“मैं ! लेकिन क्यों ये तुम्हारा फ़ैमिली मैटर है।“
“मैंने साइंस बायो ली आपके कहने से, याद है उस वक़्त भी मुझे खाना बनाना
अच्छा लगता था, लेकिन मुझे आप रसोई में आने ही नहीं देती थी, कहती थी पढ़ाई कर,
खाना बनाकर क्या करेगी, वो तो ज़िंदगी भर बनाना ही है, फिर जब मैंने medical entrance exam clear नहीं किया तो, फिर यही मुद्दा उठा था, उस दिन भी आपने
मुझे नजरंदाज कर दिया, मॉम ये मुद्दा कई बार उठा है, मेरे B. Sc के टाइम भी और M. Sc के टाइम भी, लेकिन
आपने और पापा ने इसे important
समझा ही नहीं, मॉम प्लीज मुझे समझने कोशिश करो, मेरा
किसी भी काम में मन नहीं लगेगा, मुझे सिर्फ शेफ बनना है, मौसी प्लीज समझाओ ना मॉम
को” अचानक से काव्या ने अपने फ़ैमिली मैटर में मुझे भी घसीट लिया।
“मैं क्या बोलूँ, वैसे अगर मेरी राय जानना ही चाहते हो तो मेरे हिसाब से
काव्या गलत नहीं है, बल्कि अंजलि तूने ही उसे समझने में देर कर दी।“ मैंने अपना
पक्ष रखा।
“ये तू क्या कह रही है, दीप्ति” एकाएक अंजलि मुझ पर भड़क पड़ी।
“अंजलि मेरी बात तुझे बुरी लग सकती है, लेकिन जरूरी तो नहीं न कि हर इंसान
एक सा हो, किसी को कुछ करना अच्छा लगता है तो किसी को कुछ”
“तू कहना क्या चाहती है।“
“अंजलि, अगर सचिन तेंडुलकर के पेरेंट्स उसे क्रिकेट नहीं खेलने देते और
कहते ही पढ़-लिखकर कोई नौकरी करो तो क्या हमें इतना होनहार क्रिकेटर मिलता, या फिर
लता मंगेशकर, या पी. टी. उषा की बात करे तो इन्हे सपोर्ट नहीं मिलता तो क्या हमें
इतने होनहार लोग मिलते, और अगर कुकिंग की दुनिया की बात करे तो कितने बढ़े-बढ़े शेफ
है, जैसे कि संजीव कपूर, विकास खन्ना, रणबीर बरार, गरिमा अरोरा, कुणाल कपूर और ना
जाने कौन-कौन”
“तू कहना क्या चाहती है दीप्ति, और इन लोगों से हमारी क्या बराबरी, ये बड़े
लोग है।”
“अंजलि, ये बड़े बने हैं अपने हुनर से, संजीव कपूर अच्छा खाना बनाते है
इसलिए लोग उन्हे जानते है, उनका नाम है, अगर वो आज कुछ नहीं कर रहे होते या फिर
किसी ऑफिस में 9 to 5 जॉब कर रहे होते तो कोई उन्हे पहचानता भी नहीं, अंजलि
इंसान अपने नाम से नहीं काम से जाना जाता है, तू जानती है, अपने स्कूल में रणवीर
पढ़ा करता था, और उसका सरनेम सिंह था, आज उसे कोई नहीं जानता, और Film star रणवीर सिंह को सब जानते हैं......अंजलि, तू गलत नहीं है और ना ही काव्या गलत है, बस
थोड़ा-सा एक-दूसरे को समझने की जरूरत है।“
“दीप्ति मौसी मुझे क्या समझना होगा।“ काव्या ने लगभग चिल्लाते हुए पूछा।
“बताती हूँ......अंजलि, तू चाहती है कि काव्या एक अच्छी-सी जॉब करे और अपनी
लाइफ में सेटल हो जाए।“
“हाँ, क्योंकि मैं नहीं चाहती कि ये मेरी तरह से पूरी ज़िंदगी रसोई में
गुजारे।
“Okay, और काव्या बेटा तुम चाहती हो कि सबकुछ छोड़कर अपने passion कुकिंग पर concentrate
करो।
“जी मौसी” काव्या ने पूरे विश्वास के साथ कहा।
“काव्या बेटा, हो सकता है तुम्हें मेरी बात बुरी लगे, लेकिन तुम्हारी मम्मी
गलत नहीं है, वो तुम्हें financially independent बनाना चाहती है।“
“मौसी, मेरे लिए मेरा passion important है ना कि पैसा, और हो सकता है आगे future में income भी हो।“
“काव्या, बात तुम्हारी सही है, अच्छा कुछ ऐसा करते है कि तुम दोनों की ही
बात रह जाए।“
“देख दीप्ति मैं नहीं झुकने वाली”
“जिद्दी हो आप बहुत जिद्दी अपनी औलाद की खुशी नहीं देखी जाती आपसे” अचानक
से काव्या अंजलि पर बरस पड़ी।“
‘प्लीज शांत हो जाओ, और मेरी बात ध्यान से सुनो....काव्या, तुम अपनी कुकिंग
पर concentrate करो और साथ ही एक part-time job के लिए भी apply करो, या फिर
कोई ऐसा जॉब जो घर से ही हो सके, मेरा मतलब है Work from home हो।“
“इससे क्या होगा दीप्ति” अंजलि बीच में ही बोल पड़ी।
“इससे काव्या की इच्छा भी पूरी होगी और तेरी भी, क्योंकि मेरे हिसाब से तुम
दोनों की ही माँगे जायज हैं।“
“लेकिन मौसी ये सब possible कैसे होगा,
मैं एक साथ दोनों तरफ कैसे ध्यान दे पाऊँगी, और जॉब में तो मेरा मन ही नहीं लगेगा।
“काव्या, मैं सब जानती हूँ, लेकिन तुम्हें जॉब केवल तब तक करनी है जब तक कि
तुम एक अच्छी शेफ नहीं बन जाती या फिर इस फील्ड में एक मुकाम हासिल नहीं कर लेती,
और तुम्हारी एक अच्छी-खासी इंकम शुरू नहीं हो जाती, उसके बाद चाहे तो जॉब छोड़
देना।“
“तू कहना चाहती है कि मैं इसलिए मना कर रहीं हूँ क्योंकि हम इसका खर्चा
नहीं उठाना चाहते।“ अंजलि एकाएक जोर से चिल्लाई।
“अंजलि बकवास बंद कर अपनी, मैं तेरी बेटी को सिखाना चाहती हूँ कि financially independent होना भी जरूरी है। और तुझे समझाना चाहती हूँ कि पढ़ लिख कर 9 to 5 job के अलावा भी लाइफ हो सकती है। पैसे कमाने के और भी ज़रिए
हो सकते है इसके लिए जरूरी नहीं कि आप जॉब ही करो। बस तुझे काव्या को support करना होगा, उसे समझना होगा, और आजकल तो कुकिंग के क्षेत्र में कितना scope है, जैसे कि आप अपना यूट्यूब चैनल चला सकते हो, इंस्टाग्राम पर रील्स डाल
सकते हो, घर पर ही कुकिंग क्लासेस चला सकते हो,Food blogger बन सकते हो, और मजे कि बात तो ये है कि इन सभी से तुम income कर सकती हो।“
“वाह, मौसी इतने सारे ideas तो मुझे भी
नहीं आए थे, गज़ब, आप तो कमाल हो, फिर तो मुझे कुकिंग पर ही फोकस करना चाहिए, मुझे
लगता है starting में भी जॉब का ख्याल कुछ ठीक नहीं” काव्या ने अपना मत
रखा।
“वो तो ठीक है काव्या लेकिन तुम्हारे passion को आगे बढ़ाने के लिए जो भी तरीके मैंने बताए उनसे कमाई होने में कुछ वक्त
तो लगेगा, जब तक तुम कोई जॉब कर सकती हो।“ मेरे कहते ही,
“कोई जरूरत नहीं है, तू बस अपनी कुकिंग पर ध्यान दे, मुझे तेरी खुशी से
मतलब है, ना कि तेरी कमाई से, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मैं तुझे financially independent
नहीं बनाना चाहती, हाँ बस इसके लिए इंतजार जरूर कर सकती हूँ।“
अंजलि ने एकाएक पासा पलटा,
“मॉम, लव यू, थैंक्स मुझे समझने के लिए”
“थैंक्स बेटा दीप्ति मौसी का कहो जिन्होंने हमें इतने अच्छे से समझाया,
नहीं तो हमारे बीच का ये confusion कभी clear ही नहीं होता, thank you Deepti” इतना
कह अंजलि ने मुझे अपने गले लगा लिया।
“It’s okay dear, अब बातों से ही पेट भरोगी या कुछ खिलाओगी भी, जानती हो
तुम दोनों माँ-बेटी को समझाते-समझाते मुझे भूख लगने लगी है।“
“हाँ भूख तो मुझे भी लग रही है।“ इतने में ही अंजलि ने कहा।
“Okay, मैं समझ गयी, बनाकर लाती हूँ तड़कता-फड़कता कुछ आप लोगों
के लिए।
“जी बिल्कुल, पहले जज हम ही होंगे तुम्हारे” और फिर कुछ देर पहले जो माहौल
तनावपूर्ण हो चुका था एकाएक खुशियों में बदल गया।
सच में, हर बात का solution हमारे पास ही
होता है, बस हम उसे समझ नहीं पाते, और विचारों में थोड़ा-सा बदलाव हमे और हमारे अपनों
को ढ़ेर सारी खुशियाँ दे सकता है, ये भी नहीं समझ पाते, पहले पढ़ाई, फिर किसी ऑफिस में
बैठकर सुबह से शाम तक नौकरी, और फिर घर संभालना ये ज़िंदगी तो हर कोई करता है, बल्कि
हमें तो उन लोगों को appreciate
करना चाहिए जो कुछ लीक से हटकर करना चाहते हैं और उनका हौंसला
बढ़ाना चाहिए। अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो विभिन्न प्रकार की कलायें विकसित होने की बजाय
लुप्त हो जायेंगी।
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