Zid / जिद (Story on Conflict Of Ideas)

 “भाभी ये लीजिए मुँह मीठा कीजिए, गुँजन का ब्याह तय हो गया है।“ Doorbell बजते ही जैसे ही मैंने दरवाजा खोला, सामने खड़ी मेरी मैड अरुणा ने चहकते हुए कहा।

“अरे वाह अरुणा, बहुत-बहुत बधाई हो, क्या करता है लड़का”

“भाभी, वो एक सरकारी दफ्तर में चपरासी है, सच बताऊँ तो बहुत खुश हूँ मैं, क्योंकि उसकी पक्की नौकरी है, और कोई बुरी लत भी नहीं है, मेरी बेटी कभी भूखी नहीं मरेगी वहाँ पर”

“ये तो तूने सही कहा अरुणा, अच्छा चल अब फटाफट मेरे लिए एक कप चाय बना दे, तेरे हाथ की चाय पिए बिना मेरी सुबह ही नहीं होती।“ मेरे कहते ही,

“हाँ भाभी अभी बनाती हूँ, और साथ में कुछ नाश्ता भी बना देती हूँ, तब तक आप बालकनी में बैठ आज की ताज़ा खबरों पर नजर ड़ालों।“ ये मेरे रोजाना का रूटीन था अरुणा के आने के बाद उसके हाथ की एक कप चाय पीते हुए मैं अखबार पढ़ती थी। लेकिन आज जैसे ही मैं अखबार लेकर बैठी, ना जाने क्यों उसे पढ़ने में मेरा मन ही नहीं लगा और विचारों का कारवाँ दो साल पीछे ढेरा ड़ाल बैठ गया।

 

Mom, I am in love” मुझे अच्छे से याद है जब आरुषि ने दो साल पहले मुझसे ये शब्द कहे थे, होंठों पर मुस्कान आ गयी थी मेरे, सच कहूँ तो सबकुछ  जान लेना चाहती थी मैं उसके राजकुमार के बारे में, “कौन है वो खुशकिस्मत, जिसे मेरी बिटिया का साथ मिला है।“

Mom, उसका नाम निशांत है।“ कहते ही आरुषि की आँखें शर्म से झुक गयी थी।

“अरे, अरे क्या बात है, अरे भई कोई शर्माना तो देखो मेरी बिटिया का” मैंने चहकते हुए कहा था।

“और कुछ बताओ उसके बारे में” मैं बेहद ही उत्सुक थी निशांत के बारे में सबकुछ जानने के लिए।

“मेरे ही ऑफिस में काम करता है, कलीग है मेरा”

Wow, लेकिन तेरे मुँह से शायद पहले कभी ये नाम नहीं सुना मैंने” मैंने दिमाग पर जोर ड़ालते हुए कहा।

“हाँ, शायद कभी जिक्र नहीं आया होगा।“

Its okay, कुछ और बताओ उसके बारे में, लेकिन उससे पहले उसका कोई फोटो तो दिखाओ” मैं जैसे निशांत के बारे में सबकुछ जल्द से जल्द जान लेना चाहती थी।

“मेरे मोबाईल की फोटो-गेलरी मैं है, बताती हूँ।“ और इतना कह उसने निशांत का फोटो मेरे सामने खोल कर रख दिया।

Wow, राजकुमार ढूँढा है मेरी बिटिया ने तो” मैंने उस फोटो पर एक नजर ड़ालते हुए कहा, लेकिन सच कहूँ तो वो मुझे ऐसा कुछ खास नहीं लगा था, लेकिन कुछ भी negative बोलकर आरुषि को निराश नहीं करना चाहती थी।

Mom, he is Punjabi, and non-veg also.

Its okay baby, its not a big deal” मेरा स्वर थोड़ा धीमा हो गया था।

“लेकिन डैड, उन्हे तो objection होगा ना, हम ब्राह्मण, और वो पञ्जाबी” आरुषि ने उदास होते हुए कहा।

“अरे ऐसा कुछ नहीं है, मैं समझाऊँगी उनको, फिलहाल तुम और तुम्हारी फीलिंगस important है, और आरुषि अगर तुम्हें इन सब बातों से कोई ऐतराज नहीं तो हमें क्यों होगा, क्योंकि रहना तुम्हें है उस घर में, और सबसे बड़ी बात तुम प्यार करती हो निशांत से” मैं समझा तो रही थी आरुषि को, लेकिन सच कहूँ तो मैं भी comfortable नहीं थी इस रिश्ते से”

“पापा को भी तो बताना होगा ना निशांत के बारे में, उनका रिएक्शन पता नहीं कैसा होगा।“ निराशा आरुषि की चेहरे पर साफ नजर आ रही थी।

“अरे, अरे, इतना negative मत सोचों सब अच्छा ही होगा, लेकिन उससे पहले मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ।

Yes mom, कहिए क्या कहना है आपको” आरुषि के कहते ही,

“आरुषि, तुम समझदार हो, जॉब करती हो, कई तरह के लोगों से मिलती हो, अगर बहुत ही कम शब्दों में कहूँ तो तुम्हें दुनिया का तजुर्बा है, और शायद मुझसे ज्यादा, जिसका कारण है कि मेरी दुनिया केवल ये घर ही है, कभी इस चारदीवारी से बाहर निकली नही, लोगों से ज्यादा मेलजोल नहीं हुआ, या फिर हुआ भी है तो एक सीमित दायरा है मेरा। लेकिन ये भी सच है कि जिस उम्र से तुम आज गुजर रही हो, उससे मैं और तुम्हारे पापा गुजर चुके है, ये प्यार-मोहब्बत के बारे में हम भी जानते है, इस समय में कैसा फ़ील होता है, क्या अच्छा लगता है, क्या बुरा लगता है, समझते है, दिमाग में क्या चलता है, इस वक्त इंसान दिमाग से कम दिल से ज्यादा सोचता है ये मालूम है हमें, इसलिए वादा करो कि अगर हमें तुम्हारी इस Relationship में कुछ भी गलत लगा तो हम तुम्हें आगे बढ़ने से रोकेंगे, तुम्हें समझायेंगे, आरुषि मैं उम्मीद करती हूँ कि तुम हमे समझोगी।“ मेरे कहते ही,

Off course mom, ये सब क्या कहने की बात है, मैं जानती हूँ आप लोग जो भी कहोगे मेरे भले के लिए होगा, और विश्वास रखिए मैं आपकी सारी बातें मानूँगी।“

“और हाँ मैं भी तुमसे वादा करती हूँ कि कोई Valid reason होगा तो ही हम इस रिश्ते को आगे बढ़ने से रोकेंगे, by the way तुम इससे शादी के लिए तैयार तो हो ना, या फिर इतना कुछ बोलकर मैंने यूँ ही अपनी energy waste कर दी।“ मैंने आरुषि का हाथ अपने हाथ में ले सहलाते हुए पूछा।

Mom, मैं निशांत से शादी करने के लिए तैयार हूँ।“ एक बार फिर मुझे आरुषि की आँखों में शर्म नजर आयी।

Okay, तो फिर तुम्हारे डैड से बात करे।“ मैंने आरुषि से पूछा, लेकिन मैं मन ही मन ये सोचकर घबरा भी रही थी, कि दीपांकर (मेरे पति) का Reaction कैसा होगा।

“हाँ, आप कहोगी या फिर......” कहते-कहते अचानक से आरुषि रुक गयी।

“मैं चाहती हूँ कि इस बारे में तुम खुद बात करो।“ मेरे कहते ही,

Okay, I will try” आरुषि का स्वर थोड़ा धीमा पड़ गया था।

“आरुषि, घबराने वाली कोई बात नहीं है, मैंने कहा ना कोई valid reason होगा तब ही तुम्हें इस रिश्ते में आगे बढ़ने से रोका जाएगा।“

Yes mom, तो फिर ठीक है मैं शाम को डैड के ऑफिस से लौटने पर उनसे बात करती हूँ।

 

“रात नौ बजे डिनर के बाद, “Dad....”

Aarushi my dear daughter, what happened?”

Dad, I want to say something

Tell me dear” दीपांकर ने आरुषि को अपने पास बैठाते हुए कहा।

Dad, I am in love” आरुषि के कहते ही,

Okay, who is he” दीपांकर का स्वर कुछ धीमा पड़ गया था, शायद वो इन सब के लिए तैयार नहीं था।

‘उसका नाम निशांत है, ऑफिस में मेरा कलीग है, पञ्जाबी है और वो नॉन वेजिटेरीअन भी है।“

“हम्म, बेटा बाकी सब तो ठीक है caste भी हम consider नहीं करेंगे, लेकिन ये non-veg....” कहते-कहते अचानक से दीपांकर रुक गए, मुझे भी यही लग रहा था कि इस पॉइंट पर आकर बात अटकेगी।

“तो फिर डैड?’ आरुषि की सवालिया नजरें दीपांकर के चेहरे पर जा टिकी।

“सोचते है, लेकिन उससे पहले मुझे उसके बारे में बहुत कुछ जानना है, जैसे कि उसकी education, family, age, job-profile, कुल मिलाकर मुझे उसकी पूरी Detail चाहिए।“

“ठीक है जितना मुझे पता है उतना तो मैं आपको बता देती हूँ......” और जैसे-जैसे आरुषि उसके बारे में बताती गयी, मैं निराश की ओर बढ़ती चली गयी , क्योंकि वो आरुषि के लिए Completely mismatch था। कुछ भी नहीं था उस लड़के में ऐसा जिसे सुनकर हम खुश हो सके, या फिर आरुषि की पसंद पर गर्व कर सके, बल्कि सच कहूँ तो मुझे आरुषि की पसंद पर आश्चर्य होने लगा, यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये मेरी ही बेटी है।

“तुम इस लड़के के साथ ज़िंदगी बिताने के लिए तैयार हो या फिर एक बार और सोचना चाहती हो।“ अचानक से दीपांकर के सवाल ने मुझे ख्यालों की दुनिया से बाहर निकाला।

“डैड, मैं निशांत को लेकर Confident हूँ, और उसी से शादी करूँगी, बल्कि उसके parents तो इस रिश्ते के लिए तैयार भी है।“ आरुषि का इतना कहना ही था कि मैं खुद पर काबू नहीं रख सकी और चिल्लाते हुए उस पर सवाल दाग दिया।

“जब सबकुछ तय ही है तो ये नाटक क्यों, शादी करने के बाद inform कर देती, पहले बताकर भी क्यों एहसान कर रही हो।“

Nikita, calm down, मैं बात कर रहा हूँ ना” अगले ही पल मुझे दीपांकर ने शांत करते हुए कहा।

Mom, क्या हुआ आप इतना गुस्सा क्यों हो रही हो, उसने ही अपने पेरेंट्स को बताया है मैंने नहीं, और उन्होंने एक बार में ही मुझे पसंद कर लिया, जिसकी की हम दोनों को ही उम्मीद नहीं थी।

“हाँ क्योंकि तुम में कुछ negative है ही नहीं, और वो निशांत negativity की खान है, compare करो उसको खुद के साथ तो तुम्हें समझ आएगा कि तुम दोनों का कोई मेल ही नहीं है, education, job, salary, family-background, financial condition सब में हमसे कम है, और थोड़ा फ़र्क नहीं है, बहुत ज्यादा है, अरे 17-20 का फ़र्क भी होता तो हम adjust कर लेते, लेकिन यहाँ तो 10-20 का फ़र्क है, कहाँ तक adjust करेंगे, sorry to say, मुझे ये रिश्ता मंजूर नहीं।“ मैं लगातार चिल्लाते हुए बोलती जा रही थी, लेकिन मेरे रुकते ही,

“लेकिन मॉम मैं उससे प्यार करती हूँ, मुझे उसके साथ अपनी ज़िंदगी बितानी है, जब भी उसके साथ रहती हूँ खुश रहती हूँ, वो मेरी care करता है, मेरा ध्यान रखता है, उसके साथ बिताया हुआ वक्त मेरे लिए Golden period होता है, और मॉम प्यार 10-20 फ़र्क नहीं देखता, वो सिर्फ compatibility देखता है और हम एक-दूसरे के साथ compatible फ़ील करते है।“ मैं आरुषि को पहली बार बहस करते हुए देख रही थी, और उसका ये रवैया मुझे बुरी तरह से ड़रा रहा था।

“निकिता, मुझे लगता है कि हमें इस मामले में सोच-विचारकर कदम आगे बढ़ाने चाहिए।“ ऐसा कहते हुए दीपांकर ने मुझसे शांत होने का इशारा किया।

“ठीक है।“ और बुझे मन से मैं बिना कुछ कहे रसोई में बाकी का काम निपटाने चली गयी, लेकिन मन में अभी भी विचारों का बवंडर हिलोरे खा रहा था।

 

हमारी लाख कोशिशों के बावजूद भी आरुषि टस से मस नहीं हुई तो finally हमने ये फैसला किया कि निशांत और उसके पेरेंट्स से एक बार मिल लेने में कोई हर्ज नहीं। हो सकता है उनसे मिलकर सबकुछ अच्छा लगे, और हमारा इरादा बदल जाए, और इसी सोच के साथ तकरीबन दो महीने बाद एक दिन मैं और दीपांकर आरुषि के साथ निशांत के पेरेंट्स की जानकारी में उनके घर उनसे मिलने पहुँच गए। लेकिन वहाँ पहुँचकर तो हमारी निराशा का स्तर आसमान छूने लगा। उनकी living style ने तो हमें जैसे तोड़कर ही रख दिया था, इससे अच्छी तरह से तो शायद मेरी मैड ही रहती होगी, ना जाने क्यों ये ख्याल बार-बार मेरे ज़ेहन में आने लगा, लेकिन मैंने ज़ाहिर नहीं होने दिया।

“बेटा आप क्या करते हो?” आरुषि के सबकुछ बताने के बावजूद मैंने निशांत की बहन से कुछ बात करने के इरादे से सवाल पूछा।

“जी, मैं B. A. कर रही हूँ।“

“ग्रेट, आगे क्या करने का इरादा है।“ मेरे इस सवाल का निशांत की बहन जवाब देती उससे पहले ही उसकी मम्मी बोल पड़ी।

“करना क्या है भाभी जी शादी करेगी, लड़कियाँ घर संभालते अच्छी लगती है, ना कि घर के बाहर जाकर गैर मर्दों के साथ खिलखिलाती हुई।“ निशांत की माँ का जवाब सुन मैं स्तब्ध रह गयी, और ये सोचने पर मजबूर हो गयी कि जो महिला अपनी बेटी के ही नौकरी करने के खिलाफ है वो नौकरी वाली बहु कैसे स्वीकार करेगी।

“आप लोग कुछ तो लीजिए नाश्ता बाहर से मँगवाया है शाकाहारी दुकान से” इतने में ही निशांत के पापा ने कहा।

“जी नहीं, नाश्ता चाहे आपने शाकाहारी दुकान से मँगवाया हो लेकिन उसे परोसा तो आपके non-veg खाने वाले बर्तनों में ही है ना” मैंने तपाक से जवाब दिया, जिसे सुन निशांत का परिवार चुप हो गया। उसके बाद कुछ देर और इधर-उधर की बातें हुई और फिर हम वापिस अपने घर के लिए रवाना हो गए, लेकिन रास्ते भर गाड़ी में एक अजीब-सी चुप्पी छाई रही, ऐसा लग रहा था कि दीपांकर और मेरे जेहन में उथल-पुथल चल रही है लेकिन वहीं आरुषि के चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान थी, शायद वो ये सोच रही थी कि हमें निशांत के परिवार से मिलकर अच्छा लगा।

 

“आरुषि, बेटा मैं चाहता हूँ कि तुम्हें एक बार और इस रिश्ते के बारे में सोचना चाहिए, कहीं ऐसा ना हो बाद में पछतावा हो” निशांत के घर से लौटते ही दीपांकर ने आरुषि से कहा।

“डैड, मैं Decide कर चुकी हूँ, अब सोचना आप लोगों को है।“

“वो शायद तेरी नौकरी भी छुड़वा दे” अचानक से मैंने कहा।

So what, छोड़ दूँगी, लेकिन निशांत के बिना नहीं रह पाऊँगी।“ ऐसा लगा जैसे कि आरुषि ने अपना अंतिम फैसला सुनाया हो हमें, और उसके बाद दिन पर दिन गुजरते गए लेकिन इस टॉपिक पर कोई बात नहीं हुई, लेकिन तकरीबन दो हफ्ते बाद,

 

Mom-dad मुझे आप लोगों का जवाब चाहिए, जिससे की मैं और निशांत शादी कर सके।“

“अगर मैं ना कहूँ तो ?” दीपांकर ने आरुषि के सवाल के बदले सवाल दागा।

“तो फिर मैं कोई बड़ा कदम उठाने पर मजबूर हो जाऊँगी।“ आरुषि ने बेझिझक कहा।

“ठीक है, जो तुम्हारी इच्छा हो वो करो, हमारी तरफ से तो ना है।“ और इस घटना के एक महीने बाद ही आरुषि और निशांत हमारे पास शादी के जोड़े में आशीर्वाद लेने आ गए, और हम उन्हे आशीर्वाद देने के अलावा और कुछ नहीं कर पाए, लेकिन मन में ढ़ेरों सवालों ने जन्म ले लिया, जैसे की माँ-बाप के तजुर्बे की कोई अहमियत नहीं, और आरुषि का वो वादा कहाँ गया जो उसने पहले दिन मुझसे किया था, क्या प्यार के आगे सबकुछ बेमानी हो जाता है, और भी बहुत कुछ दिमाग में चल रहा था, लेकिन जवाब कहीं नहीं था।

 

 

आरुषि की शादी को एक साल हो चुका है, लेकिन हमारे बीच अब कोई संबंध नहीं है, लेकिन इतना जरूर पता चला है कि उसने शादी के कुछ महीनों बाद ही नौकरी छोड़ दी थी, और अब वो सिर्फ एक होम-मैकर ही बनकर रह रही है। वो अब मुझसे बात नहीं करती, सच कहूँ तो अपनी ही बेटी से हमारा रिश्ता टूट गया है, ऐसा नहीं है कि हमने उससे बात करने की कोशिश नहीं की, बल्कि हमने तो उसे नादान समझ कुछ दिनों में ही माफ कर दिया था, वो ही आत्मग्लानि में हमसे बात करने में हिचकिचा रही है, लेकिन इतना जानती हूँ कि वो अपनी ज़िंदगी में खुश नहीं है, क्योंकि उसकी हर खुशी, और दुख, मैं महसूस कर सकती हूँ, माँ जो हूँ उसकी, अगर दिल की बात कहूँ तो मैं उससे कहना चाहती हूँ कि आरुषि हम आज भी तुम्हारे साथ है, एक आवाज तो देकर देखो हमें अपने पास ही पाओगी।

“भाभी चाय और ये गरमागरम सैंडविच” इतने में ही अरुणा की आवाज ने मेरी विचारों की शृंखला भंग की।

“वाह क्या बात है, तुझे कैसे पता चला कि मुझे सैंडविच की तलब हो रही है।“ मैंने सैंडविच का कौर दाँतों से काटते हुए अरुणा से पूछा।  

“मुझे तो ये भी पता है कि आप इस वक्त आरुषि के बारे में सोच रही है।“ अरुणा का इतना कहना ही था कि मेरी आँखें नम हो गयी, और मेरी मनस्थिति समझ उसने मुझे संभाल लिया, जो कि आरुषि के जाने के बाद वो महीने में दो तीन बार तो करती ही है।

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