Raddi Wala / रद्दी वाला (Story On Family)
अगले हफ्ते दीवाली है, और इस बार तो दीवाली पर मि. और मिसेज रस्तोगी का बेटा माणिक अपने परिवार के साथ जर्मनी से आने वाला है, तो ज़ाहिर-सी बात है रस्तोगी युगल बेहद ही ज़ोरों-शोरों से अपने बेटे माणिक और उसके परिवार के स्वागत की तैयारी कर रहा है, घर का कौना-कौना साफ किया जा रहा है, इस बार तो घर में रंग-रोगन भी करवाया गया है, इतना ही नहीं मिसेज रस्तोगी ने तो इस बार घर की खूबसूरती में चार चाँद लगाने के लिए दीवारों पर सुंदर-सुंदर पेंटिंग भी लगाई हैं, और महँगे-महँगे decorative items भी सजाए हैं, और माणिक के कमरे की तो बात ही मत पूछो, उसे तो रस्तोगी युगल ने दुल्हन की तरह सजाने में कोई कसर ही नहीं छोड़ी, बस अब तो एक ही काम बचा है घर के पुराने और टूटे-फूटे सामान को रद्दी में निकालना, और इसी वजह से मि. रस्तोगी की नजरें आज मैन गेट के बाहर ही टिकी हुई हैं, कि कोई रद्दी वाला आए और उसे वो अपने घर का कबाड़ देकर चैन की साँस ले।
“रस्तोगी जी, आज नाश्ता नहीं करना है
क्या?’ इतने में ही मिसेज रस्तोगी ने आवाज लगाकर पूछा।
“रद्दी वाले का इंतजार कर रहा हूँ,
अब तो रद्दी निकालकर ही कुछ खाऊँगा।“ मि. रस्तोगी ने जवाब में जैसे ही कहा,
“रद्दी तो पिछले एक साल से घर में
रखी है, तो क्या आपने एक साल से कुछ नहीं खाया ? बेकार के नाटक बंद करो और चुपचाप
नाश्ता कर लो, मुझे और भी काम हैं, और वैसे भी रद्दी तो हर साल ही निकलती है, इस
बार भी निकल ही जाएगी।“
“क्या कहा आपने ? निकल ही जाएगी !
मिसेज रस्तोगी जरूर निकल जाएगी अगर आप उसे निकलने देंगी तो”
“रस्तोगी जी आखिरकार आप कहना क्या
चाहते है?”
“श्रीमती जी आप अपनी फ़ितरत के
मुताबिक हर साल रद्दी वाले के सामने घर का कबाड़ तो निकालती है, लेकिन हर चीज के
साथ कोई ना कोई पुरानी याद जोड़कर उसे वापिस उठा लेती है, तो नतीजन घर का कबाड़ घर
में ही रह जाता है, और रद्दी वाला बेचारा खाली हाथ ही वापिस चला जाता है।“ मि. \
रस्तोगी ने ताना मारते हुए कहा।
“सुनों जी, ये कुछ ज्यादा ही हो रहा
है, आप वो सामान याद कर रहे हो जिसे मैंने रोका था, वो नहीं जो निकाला था, और मैं
अकेली ही दोषी हूँ क्या, आपकी यादें नहीं जुड़ी होती उन चीजों से?” मिसेज रस्तोगी
ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा।
“अच्छा बाबा, चलो अब फटाफट नाश्ता
निकालकर दो, बहुत भूख लगी है, लेकिन रद्दी वाले की आवाज आए तो उसे रोक लेना, आज तो
किसी भी हालत में घर का फालतू कबाड़ निकालना ही है।“ मि. रस्तोगी ने स्वंय पर लगे
इल्जाम को खारिज करने की कोशिश करते हुए कहा।
“हम्म, खुद की गलती है तो मानेगें
नहीं, अच्छा चलो अब नाश्ता कर लो।“ मिसेज रस्तोगी बड़बड़ाती हुए रसोई की ओर चल पड़ी।
अभी रस्तोगी युगल ने नाश्ता करना
शुरू ही किया था कि रद्दी वाले की आवाज आ गयी, “रद्दी वाला, रद्दी”
“इसे भी अभी आना था।“ इतना कह मिसेज
रस्तोगी रद्दी वाले को इंतजार करने को बोल वापिस नाश्ते की टेबल पर आ बैठी।
कुछ देर बाद रस्तोगी युगल अपने घर के
कबाड़ के साथ रद्दी वाले के सामने मौजूद था, “आंटी इस बार तो निकालोगे ना घर का
फालतू सामान?’ रद्दी वाले के पूछते ही,
“वाह क्या बात है, क्या सवाल पूछा
है।“ मि. रस्तोगी ठहाका लगाकर हँस पड़े।
“आप ज्यादा दाँत मत निकालो अपने और
मदद करवाओ मेरी.........और इस बार से क्या मतलब है तेरा, हर बार रद्दी नहीं
निकालती हूँ क्या?” मिसेज रस्तोगी ने जैसे ही भड़कते हुए कहा मि. रस्तोगी और रद्दी
वाला दोनों ही कनखियों से एक दूसरे को देख मुस्कुराने लगे।
“आंटी, ये साइकिल ले जाऊँ।“ इतने में
ही रद्दी वाले ने कबाड़ में रखी एक तीन पहिये की टूटी-फूटी साइकिल की ओर इशारा करते
हुए पूछा।
“हाँ-हाँ ले जा, वैसे भी हमारे किसी काम
की नहीं है ये” मि. रस्तोगी ने ने जैसे ही जवाब दिया मिसेज रस्तोगी ने ऐतराज जताया,
“क्यों ले जा ! मेरे माणिक की बचपन की यादें जुड़ी हैं इससे”
“तो क्या ? अब वो बड़ा हो गया है, नहीं चला सकता ये साइकिल, और
उसके बच्चे जर्मनी में रहते हैं, तो ज़ाहिर-सी बात है वो भी नहीं चलायेंगे, और हम-तुम......”
इतना कहते ही मि. रस्तोगी मुस्कुराने लगे।
“आप मज़ाक मत उड़ाइए मेरा, वो तो मुझे इसे देखकर अच्छा लगता है इसलिए
कह रही थी।“
“ठीक है, रोक लो, और भी कुछ ऐसा हो जिसे तुम रोकना चाहती हो तो
रोक लो, मैं कुछ नहीं कहूँगा।“ जैसे ही मि. रस्तोगी की इजाजत मिली मिसेज रस्तोगी दुगने
उत्साह से कबाड़ में से सामान वापिस उठाने लगी, और इतना ही नहीं मि. रस्तोगी ने भी कुछ
चीजों के साथ अपनी यादों का नाता जोड़ उन्हे भी रोक लिया, शायद रस्तोगी युगल पुराना
सामान कबाड़ में निकालने का फैसला तो कर चुके थे लेकिन उससे अपना मोह नहीं छोड़ पाए,
कुल मिलाकर इस साल भी मामूली-सा ही कबाड़ निकल पाया और बाकी वापिस स्टोर-रूम में चला
गया।
“आंटी, अंकल आप लोग बेकार ही मुझे बुलाते हो, निकालते तो कुछ हो
नहीं, खुद का समय भी खोटी करते हो और मेरा भी” पिछले काफी देर से रस्तोगी युगल की हरकते
देख कबाड़ वाले ने बोला।
“बकवास बंद कर अपनी, तू क्या जाने पुरानी यादें क्या होती हैं,
और अगर वो अपने बच्चों से जुड़ी हुई हो तो उनकी कीमत हजार गुना बढ़ जाती है।“ कहते-कहते
मिसेज रस्तोगी भावुक हो गयी, और मि. रस्तोगी ने भी अपनी पत्नी से सहमति जताते हुए उन्हे
अपनी बाहों में भर लिया, और इस साल भी इन दोनों को अपनी ही दुनिया में छोड़ रद्दीवाला
आगे निकल गया।
“रद्दी, रद्दी वाला”
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