Kya Samaj Itna Aham Hai ? / क्या समाज इतना अहम है ?(Story On A Woman)

तू क्यों सुनती है सबकी बातें, अरे जवाब क्यों नहीं दे देती, कि हमारी लाइफ है तो डिसिजन भी हमारा ही होगा।” ऑफिस जाने के लिए तैयार होते हुए विहान ने वान्या से जैसे ही कहा,

    “तो तू क्या सोचता है, मैं सिर्फ सबकी सुनती हूँ, अरे उल्टे जवाब भी देती हूँ, लेकिन कोई समझता ही नहीं, बार-बार एक ही बात कि खुशखबरी कब सुना रही हो।” वान्या ने मुँह बिगाड़ते हुए कहा।

    “जिसे देखो उसे दूसरों की ज़िंदगी में दखलंदाज़ी करनी है, अपने घर-परिवार संभलते नहीं दूसरों के परिवार में टाँग फँसानी है, अरे कहते तो ऐसे हैं जैसे कि बच्चे की जिम्मेदारी वो ही निभायेंगे,  इन्हे तो बस उसके साथ खेलना है, और बाकी की जिम्मेदार हमारी होगी।” विहान खीझकर बोला।

    “तू क्यों अपना दिमाग खराब करता है, बोलने दे जिसको जो बोलता है, हमें सिर्फ अपने करियर पर ध्यान देना है, और रही बच्चे की बात, तो इसका फैसला हम करेंगे कोई और नहीं, अब तू ऑफिस जा और मुझे भी काम के लिए निकलना है......याद है विहान इस साल मेरा प्रमोशन ड्यू है।” वान्या ने विहान का मूड ठीक करने के लिहाज से बातों का रुख पलटते हुए।

    “अरे हाँ मैं तो भूल ही गया था, फिर तो तू अपने प्रमोशन इंटरव्यू की तैयारी कर, और बच्चे के बारे में बिल्कुल भी मत सोच, और घर के कामों की बिल्कुल भी चिंता मत करना, मम्मी से कहकर कुक का इंतजाम करवाता हूँ।”

    “विहान उस बारे में भी सोच लेंगे, और वैसे भी चार लोगों का ही तो काम है, थोड़ा-थोड़ा सब मिलकर करें तो हो जाता है।”

    “हम्म, अच्छा मैं अब ऑफिस के लिए निकलता हूँ, तू साथ चल रही है या बाद में निकलेगी?” विहान ने पूछा।

    “थोड़ी देर में निकलती हूँ, नाश्ता करके”

    “ठीक है।” संक्षिप्त-सा जवाब दे विहान ऑफिस के लिए निकल गया और वान्या नाश्ता करने के इरादे से रसोई की ओर चल पड़ी।

 

    वान्या और विहान दोनों ही मुंबई शहर के कांदिवली इलाके में विहान के माता-पिता के साथ रहते हैं, और एक मिडिल क्लास फैमिली से बिलोंग करते हैं, कॉलेज में एक ही क्लास में साथ पड़ते थे बस तभी से एक दूसरे को जानते हैं, शुरुआत में तो दोनों अच्छे दोस्त बने, फिर धीरे-धीरे ये दोस्ती कब प्यार में बदल गयी इन्हे खुद ही पता नहीं चला। फिर दोनों ही के परिवारवालों की रजामंदी से दो साल पहले दोनों की शादी करवा दी गयी। मायका और ससुराल में ज्यादा दूरी नहीं होने की वजह से वान्या कभी ससुराल, तो कभी मायके आती-जाती रहती थी।

    लेकिन पिछले कुछ महीनों से वान्या का अपने मायके जाना कुछ कम हो गया था, कारण उसकी दादी का बार-बार यही कहना कि मुझे बड़ी दादी कब बना रहे हो। ऐसा नहीं था उसे ससुराल में इस बात से राहत थी, फिर भी ससुराल में उसका पक्ष लेने के लिए विहान खड़ा रहता था, अगर कोई भी वान्या को बच्चे के लिए टोकता तो विहान उल्टा जवाब देकर उसे चुप करा देता, लेकिन यही काम वो अपने ससुराल यानि कि वान्या के मायके में नहीं कर पाता था।

    ऐसा नहीं था कि वो दोनों बच्चा नहीं चाहते थे, लेकिन इससे पहले वो अपने करियर पर ध्यान देना चाहते थे, खुद को आर्थिक तौर पर इतना मजबूत बनाना चाहते थे कि बच्चे की जिम्मेदारी, उसके खर्चे आसनी से उठा सकें, यहाँ तक कि अगर बच्चे की वजह से कुछ समय के लिए अगर वान्या को जॉब छोड़नी भी पड़े तो घर का बजट ना गड़बड़ाए। लेकिन ये सब बातें दोनों के ही परिवार वाले नहीं समझना चाहते थे, बल्कि उनका कहना था कि चिंता की क्या बात है, बच्चा अपनी किस्मत लेकर आएगा, जितना उसकी किस्मत का पैसा होगा अपनेआप आएगा, तुम तो निश्चिंत होकर बच्चा पैदा करो, बाकी सब ऊपरवाले पर छोड़ दो। और यही सब बातें वान्या और विहान को अच्छी नहीं लगती थी, जिस वजह से आजकल रात-दिन घर में खिच-खिच रहने लगी।

    “जीजी, मैं तो कहती हूँ वान्या की डॉक्टरी जाँच करवा लो, जिससे पता लग जाएगा कि वो बच्चा पैदा करने में सक्षम है भी या नहीं, अगर नहीं तो इलाज करवायें।“ कुछ देर पहले ही बनारस से आयी विहान की मौसी राशि ने विहान की मम्मी शशि से कहा।

    “अरे नहीं राशि, बहु नहीं मानेगी, अरे दोनों अड़े बैठे हैं, कहते हैं फिलहाल बच्चा नहीं करेंगे।” शशि ने बताया। 

    “इसलिए तो कह रही हूँ, जाँच करवा लो, हो सकता है बहु में कोई कमी हो जिसको छुपाने के लिए दोनों बच्चा पैदा नहीं करने का नाटक रच रहे हो, वैसे भी शादी को पाँच साल हो गए, अब तो बच्चा हो ही जाना चाहिए।” राशि ने शशि के कान में फुसफुसाते हुए जैसे ही कहा।

    “लेकिन उसे जाँच के लिए लेकर कैसे जाऊँ?” शशि ने भी फुसफुसाते हुए पूछा।

    “हम्म, काम तो मुश्किल है, और वैसे भी जीजी तेरी बहु बहुत तेज है, उड़ते परिंदे के पर गिन लेती है, उसे बेवकूफ़ बना कर भी नहीं ले जा सकते।” राशि ने अपनी गर्दन मटकाते हुए जैसे ही कहा, दोनों ही बहने ठहाका लगाकर हँस पड़ी।

    “नमस्ते मौसी जी, कब आयी आप बनारस से?” इतने में दरवाजे पर खड़ी वान्या ने राशि का अभिनंदन करते हुए पूछा।

    “अरे वान्या बेटी, कब आयी तुम ऑफिस से, मैंने तो देखा ही नहीं” अचानक से वान्या को दरवाजे पर देख राशि हड़बड़ा गयी।

    “बस तब ही जब आप मेरी तारीफ़ कर रही थी, मेरा मतलब है मुझे उड़ते परिंदों के पर गिनने में निपुण बता रही थी।” वान्या ने बिना चेहरे पर कोई शिकन लाए ताना मारा, जिसे सुन दोनों ही बहनें सकपका गयी।

    “वान्या बेटी, तुम फ्रेश हो जाओ, मैं तुम्हारे लिए चाय-नाश्ता तैयार कर देती हूँ।” वान्या की सास ने बात संभालते हुए जैसे ही कहा।

    “रुकिए मम्मी जी, मुझे पहले ये बताइए कि आप दोनों मेरे बारे में क्या बात कर रहे थे, और मौसी जी आपने बताया नहीं कि आप कब आयी बनारस से?” वान्या के पूछते ही,

    “अरे कुछ नहीं बेटी, तेरी मौसी तो बस यूँ ही, और ये अभी कुछ देर पहले ही तो आयी है।” शशि के कहते ही,

    “अरे ऐसे ही कुछ नहीं जीजी, रुको मैं बताती हूँ वान्या को सबकुछ” मौका देख राशि ने वान्या से साफ-साफ बात करने का मोर्चा संभाल लिया।

    “लेकिन राशि बहन......”शशि बस इतना ही कह पायी थी कि वान्या ने उसे टोक दिया,

    “ठहरिए मम्मी जी, मुझे बात करने दीजिए मौसी जी से, हाँ तो मौसी जी क्या कह रहीं थी आप” कहीं ना कहीं वान्या को अंदाजा था कि किस संदर्भ में बात होने वाली है।

    “वान्या बेटी, तुम बुरा मत मानना मेरी बात का, दरअसल मैं सोच रही थी क्यों ना तुम्हारी डॉक्टरी जाँच करवालें।” राशि के कहते ही,

    “वो क्यों मौसी जी, और मुझे हुआ क्या है, जिसके बारे में मुझे ही नहीं पता?” वान्या ने सवालिया नज़रों से राशि की ओर देखते हुए पूछा।

    “नहीं हुआ कुछ नहीं.......”राशि के कहते ही,

    “अरे रहने भी दो ये सब बातें, शाम के खाने में आज क्या बनेगा तुम तो बस यह डिसाइड करके बताओ, कुछ ही देर में विहान और उसके पापा आते होंगे, आते ही भूख-भूख चिल्लायेंगे।” शशि ने बातों का रुख पलटने के इरादे से बनावटी हँसी हँसते हुए कहा,

    “नहीं जीजी, जब बात शुरू हुई है तो उसे खत्म भी होने दे।”

    “हाँ मम्मी जी, मौसी जी सही कह रही है, हाँ तो मौसी जी बोलिए ना क्या बात हो रही थी मेरी डॉक्टरी जाँच को लेकर?” वान्या ने आँखें तरेरते हुए पूछा।

    “वान्या, मैं घूमा-फिरा कर बात नहीं करूँगी, मैं तुमसे बस इतना पूछना चाहती हूँ, तुमने और विहान ने बच्चे के बारे में क्या सोचा है।” राशि ने एक ही साँस में अपना सवाल पूछ लिया।

    “कुछ नहीं” वान्या ने संक्षिप्त-सा जवाब दिया और वहाँ से उठकर जाने लगी।

    “कहीं तुम्हारे अंदर कोई कमी तो नहीं।” राशि के पीछे से टोकते ही,

    “कमी तो आपके बेटे विहान में भी हो सकती है मौसी जी”  वान्या ने जवाब दिया।

    “वान्या बहु, कुछ तो लिहाज करो अपनी मौसी सास का, कम से कम जुबान तो मत लड़ाओ उनसे, और ये बेचारी गलत क्या कह रही है, तुम लोग बच्चे की बात हर बार टाल देते हो, तो हमें तो यही लगेगा कि तुममे कुछ कमी होगी” इसी दौरान शशि बीच में बोली।

    “ओह, अगर बच्चा नहीं हो तो लड़की में कमी, लड़के में क्यों नहीं?” वान्या ने लगभग चिल्लाते हुए पूछा।

    “खबरदार बहु, जो तुमने हमारे बेटे के बारे में एक भी शब्द कहा, उसमे कोई कमी नहीं हो सकती।” शशि के कहते ही वान्या एक पल भी और वहाँ नहीं रुक सकी और रोते हुए अपने कमरे की ओर चली गयी, और वो शाम काफी हद तक तनाव में गुजरी।

    “वान्या क्या हुआ, कुछ टेंशन है क्या?” विहान ने रात का डिनर एवं बाकी सब काम निपटने के बाद वान्या से पूछा।

    “नहीं कुछ भी तो नहीं, सब ठीक है, आज ऑफिस में काम कुछ ज्यादा था बहुत थकान हो रही है, शायद इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा होगा, और फिर आते ही मौसीजी मिल गयी तो उनके साथ भी कुछ वक्त गुजारना पड़ा, उसके बाद शाम का खाना” वान्या नहीं चाहती थी कि आज घर में उसकी शशि और राशि के साथ जो भी बहस हुई है उसके बारे में विहान को कुछ पता चले।

    “हाँ बात तो सही है, वैसे अब तुम्हें अपने प्रमोशन इंटरव्यू की भी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।

    हम्म” बस इतना कह वान्या चादर ओड़ दूसरी ओर मुँह कर सो गयी, और विहान ने भी उसके इस व्यवहार पर कोई ऐतराज नहीं जताया, क्योंकि वो समझ सकता था कि वो वाकई में बहुत थकी हुई है, लेकिन हकीकत में बात क्या है वो तो सिर्फ वान्या ही जानती थी।

 

    अगले दिन सुबह “विहान आज मुझे ऑफिस से आने में लेट होगा, एक जरूरी मीटिंग है।” नाश्ते की टेबल पर वान्या के कहते ही,

    “ओके” विहान ने जवाब दिया।

    “अरे क्या ओके...दिख नहीं रहा तेरी मौसी आयी हुई है, बहु से बोल जब तक राशि यहाँ है वो थोड़ा जल्दी ऑफिस से लौटे और मैं तो कहती हूँ किछ दिनों की छुट्टी क्यों नहीं ले लेती ऑफिस से” शशि ने आदेशात्मक स्वर में कहा।

    “रुक सकती तो जरूर रुक जाती मम्मी जी, लेकिन जाना जरूरी है।” और बड़े ही रूखेपन से जवाब दे वान्या अपना बैग उठा वहाँ से निकल ली।

    “मम्मी, घर पर कुछ बात हुई है क्या?” वान्या के जाते ही विहान ने शशि से पूछा।

    “नहीं तो, क्यों क्या हुआ?” शशि ने पलटकर पूछा।

    “कल शाम से देख रहा हूँ वान्या का मूड कुछ ठीक नहीं लग रहा।”

    “हुआ होगा ऑफिस में कुछ, या फिर काम ज्यादा होगा, बोली तो सही अभी, लेट होगा उसे ऑफिस से वापिस आने में” इतने में काफी देर से चुप बैठी राशि ने कहा।

    “हाँ हो सकता है, कोई बात नहीं शाम को बात करता हूँ मैं उससे?” इतना कह विहान भी अपने ऑफिस के लिए निकल लिया।

 

    रात 10 बजे, “वान्या कैसी चल रही है तुम्हारी प्रमोशन इंटरव्यू की तैयारी?” विहान ने आदतन सोने से पहले उपन्यास पढ़ती वान्या से अचानक से पूछ डाला।

    “विहान मुझे तुमसे कुछ कहना है।” अगले ही पल उपन्यास साइड में रख वान्या बोली।

    “हाँ बोलो ना” विहान ने कहा।

    “मुझे बच्चा चाहिए”

    “क्या, तुम पागल हो? वान्या हम इसके लिए अभी तैयार नहीं हैं, और दो दिन पहले तक तो हम दोनों का यही फैसला था कि अभी बच्चा प्लान नहीं करेंगे और अचानक से क्या हो गया?” विहान ने आश्चर्यचकित होते हुए वान्या से पूछा।

    ‘ज़िंदगी में कुछ ना कुछ प्रॉबलम आती रहेंगी, और उनके चलते हम कभी भी बच्चे के लिए तैयार नहीं हो पायेंगे, विहान प्लीज समझने की कोशिश करो, हमे अब बच्चा प्लान कर लेना चाहिए।” वान्या ने विनती भरे स्वर में विहान से कहा।

    “क्या बात है, किसी ने कुछ कहा है क्या, अचानक से तुमने ये फैसला लिया, वो भी उस समय जब तुम्हारा प्रमोशन ड्यू है, मैं विश्वास नहीं कर पा रहा हूँ।” विहान ने आश्चर्यचकित होते हुए पूछा।

    “नहीं, कुछ भी तो नहीं, सब ठीक है, और रही प्रमोशन की बात तो उसकी भी तैयारी करूँगी।” इतना कह वान्या ने बनावटी हँसी हँसते हुए विहान के कँधे पर अपना सिर रख दिया।

    उस रात विहान के दिमाग में बस यही चलता रहा कि अचानक से वान्या ने इतना बड़ा फैसला कैसे ले लिया, जिसके कि वो फिलहाल सख्त खिलाफ़ थी, और दूसरी ओर वान्या रात के अंधेरे में अपने आँसू छुपाते हुए रिश्तेदारों का मुँह बंद करने लिए क्या-क्या करना पड़ता है ये सोचती रही।  

    एक साल बाद, “वान्या बाबू रो रहा है, संभालों इसे” ऑफिस के लिए तैयार होते विहान ने रसोई में बच्चे के लिए दूध बनाने गयी वान्या से जैसे ही कहा,

    “ला रही हूँ दूध, इंसान हूँ मशीन नहीं, मुझसे भी बर्दाश्त नहीं होती इसकी आवाज, नफरत है मुझे इस आवाज से, लेकिन क्या करूँ, तुम्हारी माँ और मौसी ये नहीं समझे कि मैं बच्चा पैदा नहीं कर सकती, समाज ये ना कहे कि मैं बांझ हूँ, इसलिए मुझे लाना पड़ा इसे इस दुनिया में, नफरत करती हूँ मैं इससे, नफरत” और इतना कह वान्या जोर-जोर से रोने लगी, और विहान समझ गया कि वान्या के द्वारा इतना बड़ा फैसला लेने के पीछे क्या कारण था।

    वान्या अब बीमार रहने लगी थी, डॉक्टर के मुताबिक वो postpartum psychosis नामक बीमारी से ग्रसित थी, लेकिन साथ ही ये उम्मीद भी थी कि समय के साथ धीरे-धीरे ठीक जायेगी। “शायद”

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