Badal Gayi Soch ( Article On Step - Relation )

    कुछ महीनें पहले की बात है, मैं अपने ऑफिस के जरूरी काम से कुछ दिनों के लिए दिल्ली गयी हुई थी, जहाँ मैं वसंत विहार स्थित एक अपार्टमेंट में रह रही मेरी फ्रेंड प्रीति के यहाँ रुकी, जो एक नूक्लीअर फैमिली में रहती है, जिसमे उसके साथ उसके पति राघव, 10 वर्षीय बेटा अर्णव, और 15 वर्षीय सौतेली बेटी सानवी रहते हैं।

     सानवी,  राघव पहली पत्नी सारिका की बेटी है, जो कि सानवी को जन्म देने के दौरान लेबर रूम में ही चल बसी थी, अपनी पत्नी के जाते ही राघव ने सानवी की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली, माँ, और पिता दोनों का फ़र्ज़ निभाया, लेकिन ऑफिस, सानवी, और घर तीन-तीन ज़िम्मेदारियाँ संभालना राघव के लिए मुश्किल हो रहा था, इसलिए उसने दूसरी शादी का फ़ैसला किया, और जब अपने इस फ़ैसले से उसने अपने माता-पिता को अवगत करवाया तो, उन्होंने बिना वक्त गँवाए राघव के लिए लड़की देखनी शुरू कर दी, और कुछ ही महीनों में राघव की शादी प्रीति से हो गयी।

     यूँ तो मैं प्रीति, और राघव की शादी में गयी थी, लेकिन वो कुछ समय की औपचारिक यात्रा थी, सानवी के बारें में उसने मुझे शादी के कुछ दिनों बाद फोन पर बताया, और ये सुन मैं थोड़ी चिंतित हो गयी थी, क्योंकि मैं प्रीति के गुस्सैल स्वभाव से भली-भाँति परिचित थी, ऐसे में अगर वो किसी का भी गुस्सा सानवी पर उतार देगी तो बात बिगड़ सकती है, ये सोच मैंने उसे सानवी के साथ बेहद ही नाजुकता से रिश्ते को निभाने की सलाह दी। लेकिन उसने मुझे, “मैं सब मैनेज कर लूँगी” ऐसा कह चुप करा दिया, इस बात को लगभग 11 साल बीत चुके हैं, इन 11 सालों के दौरान हम सिर्फ फोन पर ही संपर्क में रहे, लेकिन उस दिन हम कई सालों बाद आमने-सामने थे। 

     “प्रीति, कई सालों बाद मुलाकात हुई है, कैसी है तू?” मेंने उसके फ्लैट में कदम रखते ही उससे उत्सुकतावश पूछा।

    “बहुत अच्छी, और बहुत खुश भी” उसकी आवाज में एक खनक थी, वाकई में वो बहुत खुश है ऐसा उसकी आवाज से प्रतीत हो रहा था।

     “कहाँ हैं तेरे पतिदेव, और बच्चें, मिलवाएगी नहीं सबसे?” मैंने उसके 12x15 के ड्रॉइंग रूम का चारों ओर नजरें घुमा मुआयना करते हुए पूछा।

    “सब यही हैं, तू बैठ तो सही, सबसे मिलवाती हूँ.......तारा पानी तो लाना जरा।” उसने मुझे बैठने के लिए बोल अपनी मैड को पानी लाने का आदेश दिया, और स्वयं मेरे बगल में बैठ गयी।

    “माफ करना यार, मेरी वजह से तुझे परेशानी होगी, लेकिन क्या करूँ अकेले किसी होटल में रहने की हिम्मत नहीं जुटा पाती।” मेरे कहते ही,

    “क्या जरूरत है होटल में रुकने की, जब आपका अपना घर इस शहर में मौजूद है।” इतने में वहाँ राघव ने आकर कहा।

    “नमस्ते राघव जी, कैसे हैं आप” मेरे पूछते ही,

   “नमस्ते, मैं अच्छा हूँ, जब से आपकी सहेली से मेरी शादी हुई है, सच में घर में खुशियाँ ही खुशियाँ आ गयी हैं।” राघव के कहते ही,

  “अच्छा लगा सुन कर” मैंने अभी अपना वाक्य पूरा किया भी नहीं था कि इतने में सानवी आ गयी,

  “मम्मी, मुझे कोचिंग के लिए देर हो रही है, प्लीज नाश्ता लगा दो” सानवी के कहते ही,

    “आई बेटा........दरअसल इस साल सानवी की 10th बोर्ड है, तो उसे पढ़ने के लिए कोचिंग जाना होता है, मैं अभी आई उसे नाश्ता देकर” इतना कह, अगले ही क्षण प्रीति सानवी का नाश्ता लगाने के इरादे से रसोई की ओर चली गयी, और मैं आश्चर्य से उसकी ओर देखती रही।

    “क्या सोच रहीं है आप, यही ना कि सानवी तो प्रीति की स्टेप डॉटर है, तो फिर इतना अच्छा व्यवहार कैसे उसके साथ” एकाएक राघव की बात सुन मैं चौंक गयी।

   “नहीं, नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है।” मैंने सकपकाकर कहा, क्योंकि कहीं ना कहीं राघव मेरे मन की बात ही कह रहे थे।

   “एक राज की बात बताऊँ, प्रीति के सामने, या उससे बिल्कुल मत कहना कि सानवी उसकी स्टेप डॉटर है, नहीं तो आपको धक्के मार के बाहर निकाल देगी, आप जानती है प्रीति ने सानवी को दिल से अपनाया है, शायद उसकी सगी माँ भी उसे इतना प्यार नहीं दे पाती, जितना की प्रीति देती है, स्टेप मदर की परिभाषा को ही बदल दिया है इसने” राघव जी के इस कथन से प्रीति के प्रति उनके मन में गर्व महसूस हो रहा था। और ये सब देख मैं स्टेप मदर अच्छी नहीं होती हैं, जैसी राय बदलने पर मजबूर हो गयी। लेकिन यकीनन ये राय हर स्टेप मदर पर लागू नहीं होती, नहीं तो वो बदनाम नहीं होतीं।


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